ग्रामीणों के प्रस्तावों की अनदेखी का आरोप,हाथी प्रभावित गांव में सुरक्षा व्यवस्था और बकरी शेड की मांग अधर में…
सुदामा राजवाड़े
बलरामपुर/राजपुर,22 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। शासन-प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में पारदर्शी विकास और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करता है, लेकिन राजपुर जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत चंद्रगढ़ में पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव रामचंद्र यादव की कथित लापरवाही और अनियमित उपस्थिति के कारण पंचायत के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि बार-बार मांग और शिकायत के बावजूद समस्याओं का निराकरण नहीं हो रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, पंचायत सचिव नियमित रूप से पंचायत भवन में उपस्थित नहीं रहते। वे ग्रामसभा की बैठकों या विशेष शिविरों के दौरान ही नजर आते हैं। सामान्य दिनों में पंचायत संबंधी कार्यों के लिए पहुंचने वाले ग्रामीणों को निराश होकर लौटना पड़ता है। इससे छोटे-छोटे कामों और शासकीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
हाथियों के खतरे के बीच
रोशनी की मांग अधूरी
ग्राम पंचायत चंद्रगढ़ हाथी प्रभावित क्षेत्र में आता है। ग्रामीणों के अनुसार, शाम ढलते ही हाथियों की आवाजाही और अन्य खतरों के कारण लोगों की चिंता बढ़ जाती है। ऐसे में गांव के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर रोशनी की व्यवस्था करना जरूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि 20 सितंबर की ग्रामसभा और 2 अक्टूबर की विशेष ग्रामसभा में मरकरी लाइट लगाने का प्रस्ताव रखने की मांग की गई थी,लेकिन इस दिशा में अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने आजीविका संवर्धन के उद्देश्य से बकरी शेड निर्माण का प्रस्ताव भी पिछली दो बैठकों में उठाए जाने की बात कही है। उनका आरोप है कि सुरक्षा और आजीविका से जुड़े इन मुद्दों पर पंचायत स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। यदि ग्रामसभा में उठाए गए प्रस्तावों पर समय रहते पहल नहीं होती,तो पंचायती राज व्यवस्था में ग्रामीणों की भागीदारी का उद्देश्य ही प्रभावित होता है।
पहले भी शिकायतें,कार्रवाई पर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार,पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व वार्ड पंच और पूर्व जनपद सदस्य द्वारा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से लेकर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तक लिखित शिकायतें की जा चुकी हैं। इसके बावजूद किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आने से ग्रामीणों में नाराजगी है। हालांकि,इन शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
सरपंच पति ने भी बताई परेशानी
इस मामले में सरपंच पति से बातचीत किए जाने पर उन्होंने भी सचिव की नियमित उपस्थिति को लेकर परेशानी की बात स्वीकार की। उनके अनुसार,सचिव के केवल ग्रामसभा के दिनों में पंचायत आने से ग्रामीणों को छोटे-मोटे कामों और शासकीय योजनाओं के लाभ के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जवाबदेही तय करेगा
प्रशासन या जारी रहेगी अनदेखी?
ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने राजनीतिक संरक्षण की आशंका भी जताई है,हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जिला और जनपद प्रशासन की जिम्मेदारी है कि पंचायत सचिव की उपस्थिति, ग्रामसभा के प्रस्तावों पर हुई कार्रवाई और पूर्व शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई और पंचायत के कामकाज में सुधार नहीं आया,तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन शिकायतों को गंभीरता से लेकर जांच और जवाबदेही तय करता है या चंद्रगढ़ के ग्रामीण अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए आगे भी इंतजार करते रहेंगे।
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