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अम्बिकापुर@ सरगुजा में तीन शिक्षक-कर्मियों पर कार्रवाई,कोई जेल में रहा तो कोई गंभीर अपराध में दोषी

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उदयपुर ब्लॉक के दो शिक्षक ठगी के मामले में निलंबित,प्रधान पाठक को हत्या के प्रयास के मामले में सजा के बाद मिली जमानत
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,22 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार और जिम्मेदार नागरिक बनने की सीख देने वाले शिक्षक ही जब गंभीर आपराधिक मामलों में घिर जाएं,तो शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सरगुजा जिले में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी तीन अलग-अलग आदेशों में उदयपुर विकासखंड के तीन शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई सामने आई है। इनमें दो शिक्षक क्रिप्टोकरेंसी और शेयर मार्केट ट्रेडिंग से जुड़े कथित वित्तीय अपराध के मामले में गिरफ्तार होकर जेल में रह चुके हैं,जबकि एक प्रधान पाठक को गंभीर आपराधिक मामले में सत्र न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष तक के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में उच्च न्यायालय से उनकी सजा स्थगित होने और सशर्त जमानत मिलने के बाद वे जेल से रिहा हुए। तीनों मामलों में कार्रवाई के आधार और कानूनी स्थिति अलग-अलग हैं। फिर भी इन घटनाओं ने शिक्षा विभाग में कर्मचारियों के आचरण,विभागीय निगरानी और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ठगी के मामले में दो शिक्षक निलंबित : जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आदेश के अनुसार,प्राथमिक शाला कटघोरियापारा के प्रधान पाठक राजकुमार पैकरा के विरुद्ध मणिपुर थाने में अपराध क्रमांक 132/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 317(4) और 61(2) में मामला दर्ज किया गया है। आदेश में उल्लेख है कि उन्हें 20 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था और वे एक अक्टूबर तक कुल 73 दिन न्यायिक अभिरक्षा में रहे। इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तारी की तारीख से प्रभावी मानते हुए निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बतौली निर्धारित किया गया है। इसी अपराध क्रमांक से जुड़े मामले में शासकीय प्राथमिक शाला जरहाडीह के सहायक शिक्षक (एलबी) त्रिपाल टोप्पो को भी निलंबित किया गया है। विभागीय आदेश के अनुसार, उन्हें 31 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था और छह अक्टूबर को न्यायालय से सशर्त जमानत मिली। आदेश में क्रिप्टोकरेंसी और शेयर मार्केट ट्रेडिंग से जुड़े कथित वित्तीय अपराध का उल्लेख है। उनका निलंबन करते हुए मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय,मैनपाट निर्धारित किया गया है। एक ही अपराध प्रकरण में दो शिक्षकों के नाम सामने आने से मामले की गंभीरता बढ़ जाती है। हालांकि,दोनों के विरुद्ध दर्ज आरोपों और उनकी व्यक्तिगत भूमिका का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
प्रधान पाठक को पांच साल तक की सजा,अपील पर राहत : तीसरे मामले में शासकीय प्राथमिक शाला पेण्डरखी के प्रधान पाठक विजय कुमार यादव का नाम है। जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश के अनुसार, उनके विरुद्ध वर्ष 2019 में भारतीय दंड विधान की धाराओं 147,148,149,294,323 और 307 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। सत्र प्रकरण क्रमांक 97/2019 में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश,अंबिकापुर ने तीन जनवरी 2026 को उन्हें दोषी ठहराते हुए अधिकतम पांच वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया था। आदेश में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आठ अक्टूबर 2026 को दांडिक अपील क्रमांक 155/2026 में सजा स्थगित करते हुए सशर्त जमानत दी। इसके बाद वे नौ अक्टूबर को केंद्रीय जेल अंबिकापुर से रिहा हुए। विभागीय आदेश में उनकी न्यायिक अभिरक्षा और दोषसिद्धि का उल्लेख करते हुए कार्रवाई का आधार बताया गया है। सजा स्थगित होने और जमानत मिलने का अर्थ दोषसिद्धि स्वतः समाप्त होना नहीं है,मामले का अंतिम परिणाम अपील में होने वाले निर्णय पर निर्भर करेगा। तीनों मामलों में कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा विभाग में कर्मचारियों के आचरण और सेवा संबंधी मामलों की निगरानी किस स्तर पर और कितनी प्रभावी ढंग से की जा रही है।
गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी, लंबी न्यायिक अभिरक्षा और दोषसिद्धि जैसी स्थितियां सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इसके साथ यह भी देखना होगा कि संबंधित मामलों की जानकारी विभाग तक कब पहुंची और नियमानुसार आगे की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी की गई।
निलंबन प्रशासनिक कार्रवाई है, अपने आप में आपराधिक आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं। जिन मामलों में आरोप लंबित हैं, उनमें न्यायालय का अंतिम निर्णय महत्वपूर्ण होगा। वहीं दोषसिद्धि वाले मामले में अपील की वर्तमान स्थिति और न्यायालय के आदेशों के अनुरूप विभागीय कार्रवाई की समीक्षा आवश्यक है। शिक्षा विभाग के सामने चुनौती केवल संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न होने देने की भी है। इन विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था की निरंतरता सुनिश्चित करना और संबंधित मामलों की विभागीय स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अब देखना यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय इन मामलों में नियमानुसार आगे की कार्रवाई के साथ-साथ विद्यालयों की व्यवस्था और विभागीय जवाबदेही को लेकर क्या कदम उठाता है।


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