छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बहू और मायके पक्ष की याचिका खारिज की
बिलासपुर,26 सितम्बर 2026। घरेलू हिंसा के मामलों में आरोपी सिर्फ पति ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। परिवार के बाकी सदस्य और रिश्तेदार भी शिकायत में आरोपी बनाए जा सकते हैं।’ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बहू और उसके मायके पक्ष के रिश्तेदारों की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने कहा कि,किसी व्यक्ति को घरेलू हिंसा के मामले से शुरुआती स्तर पर केवल इस आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता कि,वह शिकायतकर्ता के साथ एक ही घर में नहीं रहता है। साझा घर में रहने और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े विवादों में आरोपों की वास्तविकता साक्ष्यों और गवाहों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए इस स्तर पर कार्यवाही खत्म करना उचित नहीं है। दरअसल,रायपुर निवासी निर्मला अग्निवंशी और उनकी बेटी श्रुति अग्निवंशी ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 12 के तहत निचली अदालत में शिकायत की थी। शिकायत में उनकी बहू अनीशा अग्निवंशी के साथ उसके मायके पक्ष के सुषमा सिंह,अभिषेक सिंह, अविनाश सिंह, अंजू सिंह और अलका सिंह को भी पक्षकार बनाया गया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि,बहू और उसके मायके पक्ष के लोग उनके साथ दुवर््यवहार कर रहे हैं। उन्होंने मानसिक प्रताड़ना देने और उन्हें परिवार से अलग करने के लिए दबाव बनाने के आरोप भी लगाए। बहू और उसके परिजनों की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि वे शिकायतकर्ताओं के साथ साझा घर में नहीं रहते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कार्यवाही नहीं की जा सकती। निचली अदालत ने यह तर्क स्वीकार नहीं किया। इसके बाद सत्र न्यायालय में भी उन्हें राहत नहीं मिली।
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