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सोनहत/कोरिया@ सोनहत में आफत की बारिश : वनांचल जलमग्न,जर्जर सड़कों और टूटी पुलियों ने काटा मुख्यालय से संपर्क

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  • सोनहत में बारिश की मारः पंडोपारा दलदल,कुरथी जलमग्न,गिधेर की टूटी पुलिया 12 साल से इंतजार में…
  • 12 साल से पुल का इंतजार,हर बरसात में संपर्क संकट…सोनहत के वनांचल की यही कहानी…
  • सोनहत में आफत की बारिश : वनांचल जलमग्न,जर्जर सड़कों और टूटी पुलियों ने तोड़ा मुख्यालय से संपर्क…
  • बारिश बनी आफत,सोनहत के वनांचल बेहाल,सड़कें दलदल,पुल-पुलियां बनीं मुसीबत…
  • हर बारिश में टूटता सोनहत का संपर्क,गिधेर में 12 साल से पुल अधूरा,गांवों की राह बनी आफत…
  • सोनहत के वनांचल में बारिश ने खोली बदहाल सड़कों की पोल,कई गांवों का मुख्यालय से संपर्क प्रभावित
  • पानी,कीचड़ और टूटे रास्ते…सोनहत में बारिश ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुसीबत…
  • बारिश आई तो सामने आई वर्षों की बदहाली,सोनहत में सड़क-पुलिया ने रोका ग्रामीणों का रास्ता
  • वनांचल में आफत की बारिश,सोनहत की सड़कें बनीं दलदल,गिधेर से लेकर कर्री पटेलपारा तक संकट
  • सोनहत में सड़क-पुलिया की बदहाली पर बारिश का प्रहार,गांवों की जिंदगी हुई दुश्वार


-राजन पाण्डेय-
सोनहत/कोरिया,26 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने सोनहत विकासखंड के ग्रामीण और वनांचल इलाकों में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है,बारिश का पानी जहां कई बस्तियों और रास्तों में जमा हो गया है,वहीं वर्षों से जर्जर सड़कों और क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों ने ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं,सामान्य दिनों में जैसे-तैसे चलने वाले रास्ते बारिश के बाद कीचड़, दलदल,गड्ढों और फिसलन में बदल गए हैं, कई स्थानों पर दोपहिया वाहन चलाना मुश्किल है तो कुछ इलाकों में चारपहिया वाहनों की पहुंच भी प्रभावित हो गई है,सबसे गंभीर स्थिति उन वनांचल क्षेत्रों में है,जहां सड़क और पुल-पुलिया ही मुख्यालय तथा स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का एकमात्र साधन हैं,गिधेर में करीब 12 साल से पुल का इंतजार अब बारिश के मौसम में ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बनकर सामने आया है,वहीं कुरथी,सेमरिया,पंडोपारा,खुटारा पारा,डोकाबूढ़ा बांध मार्ग और उरांवपारा-धुम्माडांड़ सहित कई इलाकों में आवागमन बुरी तरह प्रभावित है।
पंडोपारा में सड़क नहीं,दलदल से गुजर रहे ग्रामीण-सोनहत विकासखंड मुख्यालय के आसपास की स्थिति भी बेहतर नहीं है,पंडोपारा की सड़क बारिश के बाद दलदल में तब्दील हो गई है,सड़क पर जगह-जगह कीचड़ और पानी जमा होने से फिसलन बढ़ गई है,स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश के दौरान रास्ते की हालत इतनी खराब हो जाती है कि कई बार वाहन बस्ती तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है,इसका सबसे अधिक असर बुजुर्गों,बच्चों और बीमार लोगों पर पड़ता है,बारिश के दिनों में यदि किसी परिवार को मरीज को अस्पताल ले जाना पड़े या जरूरी सामान लाना हो तो खराब सड़क परेशानी को और बढ़ा देती है।
खुटारापारा और डोकाबूढ़ा बांध मार्ग पर कीचड़ और गड्ढों का कब्जा– खुटारापारा और डोकाबूढ़ा बांध के दोनों तरफ के रास्ते भी लगातार बारिश के कारण बदहाल हो गए हैं,सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और कीचड़ जमा है,ग्रामीणों के लिए पैदल निकलना तक कठिन हो गया है,बारिश के दौरान फिसलन बढ़ने से दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है,ग्रामीणों का कहना है कि इन मार्गों की समस्या नई नहीं है,सामान्य दिनों में किसी तरह आवागमन हो जाता है,लेकिन बरसात आते ही सड़क की वास्तविक स्थिति सामने आ जाती है।
उरांवपारा-धुम्माडांड़ में रास्ते पर पानी और कीचड़-उरांवपारा धुम्माडांड़ क्षेत्र में भी बारिश ने ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित कर दी है,रास्ते पर पानी और कीचड़ जमा होने से मुख्य मार्ग तक पहुंचना कठिन हो गया है, यह समस्या सिर्फ आने-जाने तक सीमित नहीं है,ग्रामीणों के दैनिक जीवन से जुड़ी जरूरतें—राशन,बाजार,स्वास्थ्य सेवा और अन्य जरूरी काम—मुख्यालय और मुख्य मार्ग से जुड़े हैं,ऐसे में संपर्क मार्ग खराब होने का सीधा असर ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है।
गिधेर में 12 साल से पुल का इंतजार, हर बारिश में फिर वही संकट-सोनहत के वनांचल ग्राम गिधेर की समस्या सबसे गंभीर बताई जा रही है, ग्रामीणों के अनुसार नदी पर बना पुल करीब 12 वर्ष पहले टूट गया था, लेकिन आज तक उसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है,बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ आवागमन और भी कठिन हो जाता है,ग्रामीणों के सामने मुख्यालय तक पहुंचने की चुनौती खड़ी हो जाती है,सबसे बड़ी चिंता आपातकालीन परिस्थितियों को लेकर है, यदि किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ जाए, दुर्घटना हो जाए या गर्भवती महिला को तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने की जरूरत पड़े,तो खराब संपर्क मार्ग बड़ी बाधा बन सकता है,12 साल का इंतजार अब सिर्फ एक पुल का इंतजार नहीं रह गया है,बल्कि यह वनांचल क्षेत्र में बुनियादी संपर्क व्यवस्था की लंबी अनदेखी का सवाल बन चुका है।
कुरथी में एक पारा जलमग्न,घरों से निकलना मुश्किल-ग्राम कुरथी के वनांचल क्षेत्र के एक पारे में बारिश के बाद रास्ता जलमग्न हो गया है,लगातार पानी जमा होने से ग्रामीणों की आवाजाही लगभग ठप्प जैसी स्थिति में पहुंच गई है, स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश जारी रहने पर समस्या और गंभीर हो सकती है,रास्ते पर पानी का स्तर बढ़ने से लोगों के लिए मुख्य मार्ग तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है,वनांचल क्षेत्र में ऐसी स्थिति का असर सबसे पहले दैनिक जरूरतों और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है।
सेमरिया की टूटी पुलिया बरसात में बनी मुसीबत-ग्राम सेमरिया में लंबे समय से खराब पड़ी पुलिया भी बारिश के दौरान बड़ी समस्या बन गई है,बारिश बढ़ने के साथ पानी का बहाव बढ़ रहा है और पुलिया की खराब स्थिति के कारण आवागमन प्रभावित हो रहा है, ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया की मरम्मत या पुनर्निर्माण का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण हर बरसात में उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है।
सोनहत से कर्री पटेलपारा मार्ग भी बदहाल-बारिश ने सोनहत से कर्री पटेलपारा को जोड़ने वाले मार्ग की हालत भी बिगाड़ दी है,सड़क पर जगह-जगह कीचड़, गड्ढे और फिसलन के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है,दोपहिया वाहन चालकों के लिए सड़क पर फिसलने का खतरा बना हुआ है,जबकि चारपहिया वाहनों को भी खराब हिस्सों से गुजरने में परेशानी हो रही है,ग्रामीणों के अनुसार बारिश के मौसम में यह समस्या हर वर्ष बढ़ जाती है। सोनहत मुख्यालय तक पहुंचना स्वास्थ्य सेवाओं,बाजार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आवश्यक है,लेकिन सड़क की खराब स्थिति लोगों की परेशानी बढ़ा रही है,ग्रामीणों ने तत्काल मार्ग की मरम्मत कराने और बारिश के दौरान आवागमन सुचारु रखने की मांग की है।
बारिश ने नई समस्या नहीं बनाई, पुरानी बदहाली को उजागर किया-सोनहत के इन इलाकों में सामने आई समस्या को सिर्फ बारिश का परिणाम मानना पूरी तस्वीर नहीं होगी, बारिश ने वर्षों से मौजूद जर्जर सड़कों, टूटी पुलियों और लंबित निर्माण कार्यों की स्थिति को सामने ला दिया है,सामान्य मौसम में ग्रामीण इन रास्तों से किसी तरह गुजर जाते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही वही सड़कें कीचड़ और दलदल में बदल जाती हैं और क्षतिग्रस्त पुल-पुलियां जोखिम बन जाती हैं,यही वजह है कि ग्रामीणों की मांग केवल बारिश के दौरान मुरुम डालने या अस्थायी मरम्मत तक सीमित नहीं है,वे स्थायी सड़क और पुल-पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं।
सड़क खराब तो स्कूल,स्वास्थ्य और राशन…सब प्रभावित-वनांचल क्षेत्रों में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं होती, यही सड़क ग्रामीणों को स्कूल,अस्पताल, बाजार,राशन दुकान और रोजगार के अवसरों से जोड़ती है,जब बारिश के कारण रास्ता बंद होता है या आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है,तो इसका असर पूरे ग्रामीण जीवन पर पड़ता है,विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता ज्यादा है,सामान्य बीमारी से लेकर दुर्घटना और प्रसव जैसी आपात परिस्थितियों में समय पर अस्पताल पहुंचना जरूरी होता है,ऐसे में खराब सड़क और टूटी पुलिया किसी भी आपात स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
हर बरसात में सामने आता है सवाल…स्थायी समाधान कब?-ग्रामीणों की शिकायतों में एक बात बार-बार सामने आती है कि बारिश हर साल आती है,समस्या भी हर साल सामने आती है,लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाता,कहीं वर्षों से पुल अधूरा या टूटा पड़ा है तो कहीं सड़क की हालत लगातार खराब है,बारिश में अस्थायी राहत के लिए मुरुम या मिट्टी डालने से कुछ समय के लिए आवागमन संभव हो सकता है,लेकिन अगली बारिश में समस्या फिर लौट आती है, गिधेर का मामला तो विशेष रूप से गंभीर है, जहां ग्रामीण करीब 12 वर्षों से पुल की समस्या झेलने की बात कह रहे हैं।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती- मौजूदा बारिश के बीच प्रशासन के सामने तत्काल और स्थायी—दोनों स्तरों पर चुनौती है, तत्काल तौर पर उन रास्तों को चिन्हित करना जरूरी है जहां जलभराव या कीचड़ के कारण आवागमन बाधित है,संवेदनशील पुल-पुलियों और नदी-नालों पर निगरानी,जलनिकासी, मलबा हटाने और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था जरूरी है,दूसरी ओर गिधेर जैसे क्षेत्रों में वर्षों से लंबित पुल निर्माण और सेमरिया सहित अन्य स्थानों की क्षतिग्रस्त पुलियों का स्थायी समाधान जरूरी है।
ग्रामीणों की मांग…बारिश खत्म होने का इंतजार नहीं,अभी शुरू हो काम- प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत की मांग की है,उनका कहना है कि जहां सड़क पर अत्यधिक कीचड़ और गड्ढे हैं,वहां तत्काल सुधार कराया जाए,जलभराव वाले हिस्सों में पानी निकासी की व्यवस्था की जाए और ऐसे मार्गों को चिह्नित किया जाए जहां आपात स्थिति में वैकल्पिक आवागमन उपलब्ध कराया जा सके,इसके साथ ही गिधेर के पुल सहित वर्षों से लंबित पुल-पुलियों और सड़कों के स्थायी निर्माण एवं मरम्मत को प्राथमिकता देने की मांग की गई है,ग्रामीणों का कहना है कि समस्या का समाधान सिर्फ एक बारिश निकालने तक नहीं होना चाहिए,सड़क और पुल-पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाओं का स्थायी निर्माण ही वह रास्ता है,जिससे हर बरसात में वनांचल के गांवों का संपर्क टूटने की समस्या खत्म हो सकती है, सोनहत के वनांचल में इस समय बारिश सिर्फ पानी नहीं बरसा रही,बल्कि वर्षों से लंबित बुनियादी सुविधाओं की हकीकत भी सामने ला रही है।


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