नई दिल्ली,10 सितम्बर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने लोगों के स्वास्थ्य,विशेषकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताते हुए अधिक नमक,चीनी और वसा वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट चेतावनी लगाने के मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों से राष्ट्रीय हित में विचार करने को कहा है। शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि इस गंभीर विषय पर विस्तृत आदेश जल्द जारी किया जाएगा। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ सार्वजनिक धर्मार्थ संस्था ‘3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि वह मामले में सभी पक्षों से आवश्यक जानकारी लेने के बाद विस्तृत आदेश पारित करेगी। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, हमें सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य की चिंता है,खासकर बढ़ते बच्चों की। हम चाहते हैं कि सभी संबंधित लोग देश के हित में इस मामले पर विचार करें। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि मामले से संबंधित आदेश एक-दो दिन में उपलब्ध करा दिया जाएगा। पीठ ने सभी पक्षों को आदेश का अध्ययन करने के लिए भी कहा। पीठ ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर दी जाने वाली पोषण संबंधी जानकारी के बारे में भी स्पष्टीकरण मांगा।
अदालत ने कहा कि सामान्यतः पोषण संबंधी विवरण पैकेट के पीछे दिया जाता है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या ऐसी कोई दिशा-निर्देश व्यवस्था है, जिसके आधार पर किसी पोषक तत्व की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होने पर खाद्य पदार्थ को अधिक चीनी, अधिक नमक या अधिक वसा वाला माना जा सके। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैकेट के पीछे पोषण संबंधी दो तरह की जानकारी देना आवश्यक होता है। इसमें पोषक तत्वों की मात्रा सामान्यतः 100 ग्राम खाद्य पदार्थ और प्रति सेवन मात्रा के आधार पर बताई जाती है। मामले में हस्तक्षेप करने वाले एक पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने तर्क दिया कि सरकार कुरकुरे जैसे स्नैक उत्पादों को अंडे और नमकीन काजू जैसे अन्य खाद्य पदार्थों के समान श्रेणी में रख रही है। उन्होंने अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर अधिक स्पष्ट और प्रभावी चेतावनी देने की आवश्यकता पर जोर दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी सुझाव दिया कि चेतावनी के लिए लाल रंग के स्थान पर कोई अन्य विशिष्ट रंग इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लाल रंग का इस्तेमाल मांसाहारी खाद्य पदार्थों की पहचान और हरे रंग का इस्तेमाल शाकाहारी खाद्य पदार्थों के लिए किया जाता है। ऐसे में अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की चेतावनी के लिए अलग रंग अपनाया जा सकता है। इससे पहले भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसने ऐसे खाद्य उत्पादों के लिए पैकेट के सामने चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव रखा है, जिनमें अतिरिक्त संतृप्त वसा, चीनी और नमक की मात्रा अधिक होती है। नियामक संस्था ने अदालत में दाखिल अनुपालन शपथपत्र में कहा था कि इस व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को ऐसे खाद्य उत्पादों के बारे में स्पष्ट, सरल और आसानी से समझ आने वाली चेतावनी उपलब्ध कराना है, जिनमें स्वास्थ्य के लिए चिंता पैदा करने वाले पोषक तत्व अधिक मात्रा में मौजूद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। अब सभी संबंधित पक्षों की दलीलों, खाद्य पदार्थों पर चेतावनी संबंधी व्यवस्था और उपभोक्ताओं, विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को लेकर अदालत के अगले आदेश पर नजर रहेगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और खाद्य सुरक्षा से जुड़े पक्षों के बीच लंबे समय से यह बहस चल रही है कि अधिक नमक, चीनी और वसा वाले अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बारे में उपभोक्ताओं को पैकेट के सामने ही स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि वे खरीदारी और सेवन से पहले बेहतर निर्णय ले सकें।
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