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नई दिल्ली@सीजेपी प्रदर्शन में बच्चे पर हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त

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कहा…तुरंत कार्रवाई करें,कोई उसे डरा नहीं सकता
नई दिल्ली,10 सितम्बर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने विरोध-प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को कथित तौर पर धमकाने,परेशान करने और उसके घर पर पत्थर फेंके जाने के आरोपों को गंभीरता से लिया है। शीर्ष अदालत ने मामले में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी पीडि़त या उसके परिवार को आपराधिक मामले की कार्रवाई से पीछे हटने के लिए डराने-धमकाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह निर्देश दिया। मामला राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा से जुड़े छात्र विरोध-प्रदर्शन की कार्यवाही के दौरान अदालत के सामने उठाया गया। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह सुनिश्चित करें कि नाबालिग की ओर से दर्ज प्राथमिकी पर उचित और तत्काल कार्रवाई हो। साथ ही अदालत ने परिवार को पूरी पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि संसद मार्ग पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में बदमाशों द्वारा धमकी देने,परेशान करने और डराने-धमकाने के गंभीर आरोप हैं। पीठ ने संबंधित प्राथमिकी पर तत्काल कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा। सुनवाई के दौरान नाबालिग की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि हाल ही में एक व्यक्ति ने वीडियो में कथित तौर पर यह दावा किया था कि उसने विरोध-प्रदर्शन के दौरान लड़की के पिता पर हमला किया था। वकील के अनुसार, इस व्यक्ति की पहचान स्वतंत्र भारद्वाज के रूप में हुई और बाद में उसे गिरफ्तार कर हिरासत में भेज दिया गया। वकील ने अदालत को यह भी बताया कि लड़की के घर पर पथराव किए जाने के वीडियो साक्ष्य उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच में समय लग सकता है, लेकिन यदि इस दौरान बच्ची के साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो हुए नुकसान की भरपाई संभव नहीं होगी। वकील ने आरोप लगाया कि कथित रूप से उपद्रव करने वाले लोगों में से एक ने वीडियो में अपने कृत्य की बात स्वीकार की और उसका बखान भी किया। इसके बावजूद बच्ची के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने का दावा किया गया। वकील ने कहा कि यह शीर्ष अदालत के एक सितंबर के आदेश के भी विपरीत है। उन्होंने अदालत से नाबालिग और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यदि कुछ असामाजिक तत्व बच्चे के खिलाफ हिंसा करते हैं और खुलेआम घूमते हुए दोबारा बच्चे या उसके परिवार को डराने-धमकाने का प्रयास करते हैं, ताकि वे कथित उत्पीडऩ के मामले को आगे न बढ़ाएं, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। पीठ ने कहा कि नाबालिग ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है और उसकी चिंता उचित है। अदालत ने इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के संकेत दिए। पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच संसद मार्ग पुलिस थाने में की जाएगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि वह मामले के तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की स्थिति की जांच करेंगे। अदालत ने नाबालिग के वकील से भी कहा कि वह मामले से संबंधित आवश्यक जानकारी सॉलिसिटर जनरल को उपलब्ध कराएं, ताकि प्राथमिकी पर तत्काल उचित कार्रवाई सुनिश्चित की ज सके। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब पुलिस की कार्रवाई, नाबालिग और उसके परिवार की सुरक्षा तथा प्राथमिकी की जांच की प्रगति पर अदालत की नजर रहेगी।


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