आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करना होगा,दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं

बिश्केक,01 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक और एकजुट कार्रवाई का आह्वान करते हुए कहा कि आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने वाले पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करना होगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं हो सकती और जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंकवाद किसी के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता।
प्रधानमंत्री ने एससीओ के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित 26 वें शिखर सम्मेलन में कहा कि पिछले 25 वर्षों में संगठन ने यूरेशिया के विशाल भूभाग में संवाद और सहयोग की मजबूत परंपरा विकसित की है तथा मानवता के विकास और अपने लोगों की भलाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अब अगले 25 वर्षों में इस सहयोग को ठोस परिणामों में बदलना एससीओ का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जब दुनिया अनिश्चितता और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, साझा भूगोल को साझा अवसरों में बदलने और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत है। मोदी ने एससीओ के संदर्भ में भारत की सोच के तीन स्तंभों- सुरक्षा, संपर्क और अवसर का उल्लेख करते हुए कहा कि अब इन तीनों स्तंभों को दृष्टिकोण से आगे बढ़ाकर ठोस परिणामों में बदलने का समय है। प्रधानमंत्री ने कहा कि शांति और सुरक्षा इस दिशा में पहली आवश्यकता है। आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके खिलाफ लड़ाई को केवल कार्रवाई-प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रखा जा सकता। आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों के पूरे तंत्र को खत्म करना होगा। जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं और आतंकियों को पनाह तथा समर्थन देते हैं, उन्हें कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए। मोदी ने कहा कि शांत और सुरक्षित यूरेशिया की साझा आकांक्षा अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जुड़ी है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में योगदान देता रहा है और आगे भी देता रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में सुरक्षा की परिधि और व्यापक हो गई है। पश्चिम एशिया के संकट ने दिखाया है कि किसी एक क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक खामियाजा ग्लोबल साउथ के देशों को भुगतना पड़ता है।
उन्होंने दोहराया कि सभी तनावों और युद्धों का समाधान युद्धक्षेत्र में नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। मोदी ने ड्रग तस्करी को केवल अपराध नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने एससीओ के तहत सुरक्षा खतरों, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और मादक पदार्थों जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए स्थापित किए जा रहे केंद्रों का स्वागत किया और कहा कि इन्हें व्यावहारिक समन्वय तथा समय पर कार्रवाई का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए। एससीओ के दूसरे स्तंभ कनेक्टिविटी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं, व्यापार को सुगम बनाते हैं और विकास के नए रास्ते खोलते हैं।
पीएम मोदी ने एससीओ को लेकर भारत की सोच जाहिर की
प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ को लेकर भारत की सोच जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘आज जब विश्व अनिश्चितता और अस्थिरता से गुजर रहा है, हमें अपने साझा भूगोल को साझा अवसरों में बदलना है और हमारे प्रयासों से हमारे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना हैं। पिछली बैठक में मैंने एससीओ को लेकर भारत की सोच के तीन मुख्य स्तंभों का उल्लेख किया थाः एस से सिक्योरिटी (सुरक्षा), सी से कनेक्टिविटी और ओ से ऑर्प्चुनिटी (अवसर)। अब समय है कि इन तीनों स्तंभों को विजन से आगे बढ़ाकर ठोस आउटकम (उपलब्धि) तक ले जाया जाए। और इसकी पहली आवश्यकता है—शांति और सुरक्षा। आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके विरुद्ध लड़ाई में हम एक्शन-रिएक्शन की सोच तक सीमित नहीं रह सकते। ‘
पीएम मोदी ने एक-दूसरे से जुड़े रहने को दुनिया के लिए जरूरी बताया
प्रधानमंत्री मोदी ने एक-दूसरे से जुड़े रहने को दुनिया के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा,’ आज की इंटरकनेक्टेड दुनिया में सुरक्षा की परिधि और भी व्यापक हो चुकी है। पश्चिम एशिया के संकट ने यह दिखाया है कि किसी एक क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता। उसका प्रभाव पूरे विश्व की एनर्जी सिक्योरिटी,मैरीटाइम ट्रेड और सप्लाई चेन्स पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक खामियाजा ग्लोबल साउथ के देशों को भुगतना पड़ता है। इसलिए भारत का आह्वान रहा है कि सभी तनावों और युद्धों का समाधान बैटलफील्ड पर नहीं, डायलॉग और डिप्लोमेसी से ही संभव है।
पुतिन बोले…शंघाई सहयोग संगठन अब दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन की शुरुआत कुछ देशों के छोटे संगठन के तौर पर हुई थी, लेकिन अब यह दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन बन गया है। पुतिन के मुताबिक, शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है और ये देश दुनिया की कुल जीडीपी के करीब एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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