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खड़गवां @खड़गवां में प्रधानमंत्री आवास योजना पर सवाल….पक्के मकान वालों को भी लाभ देने का आरोप,पुराने घर की छत पर आवास निर्माण की शिकायत,जांच की मांग

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-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,30 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के क्रियान्वयन को लेकर खड़गवां मुख्यालय में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि योजना के तहत ऐसे लोगों को भी आवास का लाभ दिया गया, जिनके पास पहले से पक्के मकान मौजूद थे।
कुछ मामलों में तो पूर्व से निर्मित पक्के मकानों की छत के ऊपर ही प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कराए जाने की शिकायत सामने आई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला योजना की पात्रता, सर्वे और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पक्के मकान वालों को कैसे मिला लाभ?-प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य ऐसे जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है,जिनके पास रहने के लिए उपयुक्त आवास नहीं है,ऐसे में पहले से पक्के मकान वाले परिवारों को योजना का लाभ मिलने का आरोप सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है,सवाल यह है कि आवास स्वीकृति से पहले हितग्राही का सर्वे और भौतिक सत्यापन किस आधार पर किया गया? यदि संबंधित परिवार के पास पहले से पक्का मकान मौजूद था तो सर्वे के दौरान इसकी जानकारी दर्ज क्यों नहीं हुई? और यदि जानकारी मौजूद थी तो पात्रता किस आधार पर तय की गई? इन सवालों का जवाब केवल दस्तावेजों की जांच से नहीं, बल्कि मौके पर भौतिक सत्यापन से भी सामने आ सकता है।
पुराने मकान की छत पर नया आवास?-मामले का सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि कुछ स्थानों पर पहले से निर्मित पक्के मकानों के ऊपर प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कराया गया,यदि यह तथ्य जांच में सही साबित होता है तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि योजना की स्वीकृति के समय संबंधित स्थान पर पुराना निर्माण मौजूद था या नहीं,पुराने मकान की तस्वीरें, आवास निर्माण की जियो-टैगिंग, निर्माण की तारीख,किस्त जारी होने का रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति का मिलान किया जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है,यानी इस मामले में जांच के लिए किसी जटिल प्रक्रिया की जरूरत नहीं है, मौके पर पहुंचकर पुराने और नए निर्माण का रिकॉर्ड मिलाया जाए तो काफी कुछ साफ हो सकता है।
पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल– मामला केवल हितग्राहियों तक सीमित नहीं है, स्थानीय पंचायत और योजना के सर्वे-सत्यापन से जुड़े जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए, यदि मौके पर पहले से पक्का मकान मौजूद था तो सर्वे करने वाले कर्मचारियों की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी?
क्या स्थल निरीक्षण वास्तव में किया गया था? क्या पात्रता से जुड़े दस्तावेजों की जांच हुई? यदि हुई तो अपात्र व्यक्ति को लाभ कैसे मिला? यदि यह महज मानवीय या प्रक्रियागत गलती थी तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए,वहीं यदि जांच में जानबूझकर नियमों की अनदेखी या किसी को लाभ पहुंचाने की बात सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी आवश्यक होगी।
असली जरूरतमंदों के अधिकार का सवाल-प्रधानमंत्री आवास योजना में अपात्र व्यक्ति को लाभ मिलने का सबसे बड़ा नुकसान उन परिवारों को हो सकता है जो वास्तव में योजना के पात्र हैं, सरकारी संसाधन सीमित होने की स्थिति में यदि लाभ गलत व्यक्ति तक पहुंचता है तो किसी वास्तविक जरूरतमंद परिवार को उसका अधिकार मिलने में देरी हो सकती है,इसीलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि खड़गवां मुख्यालय में योजना के तहत स्वीकृत संदिग्ध आवासों की भौतिक जांच कराई जाए और पुराने मकान, नए निर्माण तथा जारी की गई राशि का रिकॉर्ड मिलाया जाए।


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