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एमसीबी@ सदस्यता गई,विचारधारा नहीं…40 साल पुराने भाजपाई दुर्गाशंकर मिश्रा का 6 साल के निष्कासन के बाद ऐलान

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अस्पताल में भर्ती दुर्गाशंकर मिश्रा पर संगठन की कार्रवाई, बोले-पार्टी से निकाला जा
सकता है,विचारधारा से नहीं

-रवि सिंह-
एमसीबी,30 अगस्त 2026(घटती-घटना)।
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले की भाजपा राजनीति में प्रदेश संगठन की एक कार्रवाई ने अंदरूनी सियासी समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है,करीब चार दशक से भाजपा की राजनीति से जुड़े वरिष्ठ नेता और भरतपुर ब्लॉक के विधायक प्रतिनिधि दुर्गाशंकर मिश्रा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया है,प्रदेश संगठन ने यह कार्रवाई पार्टी विरोधी गतिविधियों और संगठनात्मक अनुशासन प्रभावित करने संबंधी शिकायतों के आधार पर की है,भाजपा छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री नवीन मार्कंडेय ने 25 अगस्त 2026 को निष्कासन आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया है कि कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू होगी। लेकिन इस कार्रवाई ने एक दूसरा सवाल भी खड़ा कर दिया है की क्या चार दशक से पार्टी के साथ जुड़े एक वरिष्ठ नेता के खिलाफ कार्रवाई केवल अनुशासन का मामला है या इसके पीछे स्थानीय संगठन की अंदरूनी खींचतान भी बड़ी वजह है? मिश्रा ने संगठन के फैसले को स्वीकार करने की बात कही है, लेकिन कार्रवाई के समय और अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाए हैं,उनका कहना है कि जिस समय वे गंभीर बीमारी के कारण रायपुर के अस्पताल में भर्ती थे, उसी दौरान उन्हें छह वर्ष के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया,उन्होंने स्पष्ट कहा कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भले ही चली गई हो, लेकिन भाजपा की विचारधारा से उनका जुड़ाव खत्म नहीं हुआ है।
शिकायतों से शुरू हुआ विवाद
पार्टी सूत्रों के अनुसार भरतपुर-सोनहत क्षेत्र के कुछ कार्यकर्ताओं ने दुर्गाशंकर मिश्रा की गतिविधियों और संगठन में उनके हस्तक्षेप को लेकर प्रदेश संगठन के समक्ष शिकायतें की थीं, शिकायतों में कथित तौर पर संगठन के भीतर गुटबाजी को बढ़ावा देने,कार्यकर्ताओं को परेशान करने और पार्टी की बैठकों एवं कार्यक्रमों को प्रभावित करने जैसे आरोप लगाए गए,इन शिकायतों को प्रदेश संगठन ने गंभीरता से लिया और 20 जुलाई 2026 को मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया,मिश्रा ने 25 जुलाई 2026 को अपना लिखित जवाब प्रदेश संगठन को दिया, अपने जवाब में उन्होंने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों को खारिज किया और अपने लंबे संगठनात्मक जीवन का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने लगातार भाजपा के विस्तार और संगठन को मजबूत करने के लिए काम किया है,हालांकि प्रदेश संगठन उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुआ और इसके बाद निष्कासन की कार्रवाई कर दी गई।
अस्पताल में भर्ती थे, तभी आया निष्कासन आदेश
निष्कासन के बाद मिश्रा का बयान इस पूरे घटनाक्रम को और भावनात्मक बना देता है, मिश्रा के अनुसार जब संगठन ने उनके खिलाफ कार्रवाई की,उस समय वे गंभीर बीमारी के चलते रायपुर के नारायणा/एमएमआई अस्पताल में भर्ती थे,उनका कहना है कि बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति के खिलाफ उसी दौरान पार्टी से निष्कासन की कार्रवाई होना उनके लिए बेहद पीड़ादायक रहा, उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक रेणुका सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंती सिंह सहित कई नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल जाना था,मिश्रा के लिए यही घटनाक्रम अब भावनात्मक सवाल बन गया है—एक तरफ अस्पताल में पार्टी से जुड़े नेता उनका हाल जान रहे थे और दूसरी तरफ संगठनात्मक स्तर पर उन्हें छह वर्ष के लिए निष्कासित करने का आदेश जारी हो गया।
पार्टी से निकाल सकते हैं,विचारधारा से नहीं…
निष्कासन के बाद भी मिश्रा ने भाजपा की विचारधारा से दूरी बनाने से साफ इनकार किया है, उनका कहना है कि संगठन की प्राथमिक सदस्यता खत्म होने से उनकी राजनीतिक सोच खत्म नहीं हो सकती,उन्होंने खुद को सनातनी बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा द्वारा किए जा रहे कार्यों के प्रति अपनी निष्ठा कायम रहने की बात कही है,उनके बयान का सार यही है कि संगठनात्मक सदस्यता समाप्त हो सकती है, लेकिन विचारधारा से रिश्ता समाप्त नहीं होता।
1986 से भाजपा से जुड़ाव,अब संगठन से बाहर…
दुर्गाशंकर मिश्रा का दावा है कि उनका भाजपा से जुड़ाव वर्ष 1986 से है, यानी लगभग 40 वर्षों तक वे भाजपा की राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे,उनके राजनीतिक सफर में 1993 से 1997 तक जनकपुर के सरपंच रहने का कार्यकाल भी शामिल है,इसके अलावा वे दो बार जनपद उपाध्यक्ष,तीन बार जनपद सदस्य और भाजपा जिला उपाध्यक्ष जैसे दायित्व संभाल चुके हैं,भरतपुर-सोनहत विधायक रेणुका सिंह के करीबी नेताओं में भी उनकी गिनती होती रही है,वर्तमान में वे भरतपुर ब्लॉक में विधायक प्रतिनिधि की जिम्मेदारी संभाल रहे थे,ऐसे में चार दशक लंबे राजनीतिक जुड़ाव के बाद छह वर्ष का निष्कासन केवल एक संगठनात्मक आदेश नहीं माना जा रहा है। इसके राजनीतिक मायने भी तलाशे जा रहे हैं।
अपने ही जवाब में संगठन पर उठाए थे सवाल
कार्रवाई से पहले मिश्रा द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण में सिर्फ आरोपों का खंडन ही नहीं किया गया था, बल्कि क्षेत्र की संगठनात्मक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए थे,मिश्रा ने आरोप लगाया था कि कुछ पदाधिकारियों के कांग्रेस नेताओं के साथ आंतरिक संबंध हैं और इसके कारण लंबे समय से भाजपा के लिए काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है,यही वजह है कि अब उनके निष्कासन को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर यह चर्चा तेज है कि क्या यह मामला केवल अनुशासन का था या संगठन के भीतर चल रही पुरानी खींचतान भी इस विवाद की पृष्ठभूमि में थी? हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और भाजपा की ओर से मिश्रा के इन आरोपों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वापसी के लिए गुहार नहीं लगाएंगे
मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे पार्टी में वापसी के लिए किसी के सामने गुहार नहीं लगाएंगे, उनका कहना है कि भाजपा की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए किसी पद या संगठनात्मक जिम्मेदारी की आवश्यकता नहीं है, उनका आरोप है कि कुछ मौकापरस्त कार्यकर्ताओं ने प्रदेश संगठन को भ्रमित कर उनके खिलाफ कार्रवाई का माहौल बनाया, यह आरोप भी फिलहाल मिश्रा के पक्ष का दावा है और इस पर प्रदेश भाजपा की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
चुनाव को लेकर भी दिए संकेत
निष्कासन के बावजूद मिश्रा ने राजनीतिक गतिविधियों से पूरी तरह अलग होने के संकेत नहीं दिए हैं,उन्होंने कहा है कि स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद वे अपने समर्थकों से चर्चा करेंगे और पूरे घटनाक्रम को लेकर विस्तृत वीडियो बयान जारी करेंगे,उन्होंने आगामी चुनाव को लेकर भी संकेत दिया है कि एक विशेष प्रत्याशी को छोड़कर अन्य प्रत्याशियों के लिए वे अपने स्तर पर सहयोग करेंगे,यानी पार्टी से छह वर्ष का निष्कासन भले ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गया हो,लेकिन मिश्रा के राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने की संभावना खत्म नहीं हुई है।
कार्रवाई से किसका समीकरण बदलेगा?
एमसीबी जिले की राजनीति में इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि दुर्गाशंकर मिश्रा कोई नए या हाल में सक्रिय हुए कार्यकर्ता नहीं हैं,करीब चार दशक से भाजपा से जुड़े नेता के खिलाफ छह वर्ष की कार्रवाई स्थानीय संगठन के भीतर भी संदेश देने वाली मानी जा रही है,दूसरी तरफ मिश्रा का बयान बताता है कि वे संगठन के फैसले को स्वीकार करते हुए भी अपने राजनीतिक संबंधों और विचारधारा से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं,अब असली परीक्षा भरतपुर-सोनहत क्षेत्र के भाजपा संगठन की होगी,देखना यह होगा कि इस निष्कासन के बाद स्थानीय कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया क्या रहती है,मिश्रा के समर्थक किस तरह की भूमिका अपनाते हैं और आने वाले चुनाव में यह घटनाक्रम भाजपा के स्थानीय समीकरणों को किस हद तक प्रभावित करता है,एक तरफ प्रदेश संगठन का संदेश है-अनुशासन सर्वोपरि। दूसरी तरफ चार दशक पुराने नेता का जवाब है-सदस्यता जा सकती है,विचारधारा नहीं,एमसीबी भाजपा में अब यह विवाद सिर्फ निष्कासन आदेश तक सीमित नहीं दिख रहा,आने वाले दिनों में मिश्रा के प्रस्तावित वीडियो बयान और उनके समर्थकों की अगली रणनीति इस पूरे प्रकरण की दिशा तय कर सकती है।


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