

- दीपक अग्रवाल से सवाल….यदि नियम है तो दिखाइए और नमूना सहायक से FSO पदोन्नति का वैधानिक आधार क्या,Rule 2.1.3 की कसौटी पर हुई थी जांच?
- दीपक अग्रवाल से सवाल-पदोन्नति आदेश के साथ पात्रता,अनिवार्य प्रशिक्षण और नियमों के अनुपालन का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक हो…
- 6 मई को बदला नियम,11 अगस्त को 13 पदोन्नतियां—खाद्य विभाग में इत्तिफाक या पहले से तैयार था रास्ता?
- खाद्य विभाग में पदोन्नति का खेल? 6 मई की अधिसूचना और 11 अगस्त के आदेश ने बढ़ाई हलचल…
- 10 से 25 प्रतिशत पदोन्नति कोटा, फिर 13 नमूना सहायक बने खाद्य सुरक्षा अधिकारी—नियमों पर सवाल…
- पदोन्नति से पहले बदला नियम या नियम के बाद मिली राह? 6 मई और 11 अगस्त के आदेश आमने-सामने…
- 13 पदोन्नतियों ने खोली खाद्य विभाग की फाइल : नियम,योग्यता और डीपीसी पर उठे सवाल…
-न्यूज डेस्क-
रायपुर,29 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। दैनिक घटती-घटना की मुहिम के तहत छत्तीसगढ़ खाद्य एवं औषधि प्रशासन से जुड़े कई मामले की पड़ताल सामने आई है, जिसमें सरकारी सेवा की सामान्य पदोन्नति प्रक्रिया से कहीं अधिक बड़े सवाल छिपे दिखाई दे रहे हैं,मामला 11 अगस्त 2026 को जारी उस आदेश का है,जिसके माध्यम से विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा के आधार पर 13 नमूना सहायकों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया,उपलब्ध दस्तावेज में इन कर्मचारियों को अलग-अलग जिलों में पदस्थ करने का उल्लेख है और पदोन्नति के साथ वेतन स्तर में भी बदलाव दर्ज है।
पहली नजर में यह विभागीय कर्मचारियों की नियमित पदोन्नति का मामला लग सकता है, लेकिन जब इसके साथ 6 मई को पदोन्नति व्यवस्था में बदलाव की चर्चा,14 मई को 30 नमूना सहायकों की सीधी भर्ती का विज्ञापन और 11 अगस्त को उन्हीं संवर्ग के 13 कर्मचारियों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनाए जाने की घटनाओं को एक साथ रखकर देखा जाता है,तब कई सवाल स्वतः सामने आते हैं,सबसे अहम सवाल है की क्या नमूना सहायक संवर्ग को खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नति का स्पष्ट वैधानिक रास्ता पहले से उपलब्ध था? यदि था तो उसकी मूल नियमावली कहां है? और यदि पदोन्नति कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया गया था,तो उस बदलाव की अधिसूचना,राजपत्र और प्रभावी तिथि क्या है? इन सवालों का जवाब आरोपों से नहीं,बल्कि नियमों,अधिसूचनाओं, नोटशीट और विभागीय पदोन्नति समिति की कार्यवाही से ही मिल सकता है, मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि Food Safety Officer (FSO) सामान्य प्रशासनिक पद नहीं है, यहFood Safety and Standards Act, , 2006 के तहत कार्य करने वाला नियामकीय पद है, अधिनियम की धारा 37 के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति निर्धारित योग्यता रखने वाले व्यक्ति की अधिसूचना के माध्यम से की जाती है,FSSAI के नियमों में भी इस पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और प्रशिक्षण को अनिवार्य बताया गया है,यहीं से विवाद का मूल सवाल सामने आता है—क्या विभागीय पदोन्नति के लिए राज्य के सेवा नियमों का पालन भर पर्याप्त है या पदोन्नत व्यक्ति को केंद्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और उसके अधीन बने नियमों की प्रत्येक अनिवार्य शर्त भी पूरी करनी होगी?
11 अगस्त का आदेश बना विवाद की नई वजह
उपलब्ध पदोन्नति आदेश के अनुसार विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा के आधार पर 13 नमूना सहायकों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया,आदेश में पदोन्नति के साथ नई पदस्थापना और वेतनमान का भी उल्लेख है,सार्वजनिक रिपोर्टों में इन 13 कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं और पदोन्नति के बाद उन्हें अलग-अलग जिलों में पदस्थ किए जाने की जानकारी दी गई है,पदोन्नति के बाद वेतन संरचना में भी परिवर्तन बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार नमूना सहायक के पद पर ग्रेड पे 1900 रुपये था,जबकि खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद पर ग्रेड पे 2800 रुपये बताया गया है,इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि 13 कर्मचारियों को पदोन्नति क्यों दी गई, असली सवाल यह है कि डीपीसी ने किस नियम, किस पात्रता,किस सेवा अवधि और किस शैक्षणिक योग्यता के आधार पर प्रत्येक कर्मचारी को पात्र माना?
6 मई से 11 अगस्त तक का घटनाक्रम क्यों बना चर्चा का विषय?
इस पूरे प्रकरण को समझने के लिए घटनाक्रम की तारीखों को अलग-अलग देखना जरूरी है, उपलब्ध दस्तावेजी सामग्री में पदोन्नति कोटे को लेकर यह सवाल सामने आया है कि क्या पहले निर्धारित 10 प्रतिशत पदोन्नति हिस्से को बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया गया,इस बदलाव की प्रमाणित प्रति, राजपत्र अथवा मूल आदेश को लेकर सूचना मांगी गई है,उपलब्ध 11 अगस्त के आदेश में इस कथित संशोधन की मूल अधिसूचना संलग्न नहीं है,इसलिए इसकी पुष्टि मूल शासन आदेश से ही हो सकती है, इसके बाद मई 2026 में नमूना सहायक के 30 पदों पर सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी होने की जानकारी सामने आती है,उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार इस पद के लिए विज्ञान संकाय से हायर सेकेंडरी उत्तीर्ण होने की योग्यता तथा चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और मेरिट का प्रावधान था,फिर 11 अगस्त को विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा के आधार पर 13 नमूना सहायकों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनाया गया,यह क्रम अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है,लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि विभाग की मानव संसाधन नीति आखिर क्या है?
मई में 30 नमूना सहायकों की भर्ती,अगस्त में पदोन्नतियां…नीति क्या कहती है?
विवाद को और दिलचस्प बनाता है विभाग का मानव संसाधन पैटर्न,उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इसी वर्ष विभाग ने 30 नमूना सहायक पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की, इस भर्ती में नमूना सहायक पद के लिए विज्ञान संकाय से 12वीं उत्तीर्ण जैसी योग्यता का उल्लेख बताया गया है, दूसरी ओर अगस्त में 13 पुराने नमूना सहायकों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनाया गया, यह दोनों प्रक्रियाएं अपने आप में विरोधाभासी होना जरूरी नहीं हैं,विभाग को एक साथ नए नमूना सहायकों की जरूरत भी हो सकती है और पात्र पुराने कर्मचारियों को पदोन्नति भी दी जा सकती है, लेकिन प्रशासनिक सवाल जरूर उठता है यदि विभाग को नमूना सहायकों की इतनी आवश्यकता है कि 30 पदों पर सीधी भर्ती करनी पड़ रही है, तो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की रिक्तियों को भरने की दीर्घकालिक रणनीति क्या है? क्या स्नस्ह्र पदों पर सीधी भर्ती होगी? कितने पद रिक्त हैं? पदोन्नति से कितने पद भरे गए? और क्या पदोन्नति के बाद भी सीधी भर्ती का निर्धारित हिस्सा सुरक्षित रहेगा?
2011 के नियम खोलते हैं
विवाद की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी…
इस मामले में उपलब्ध छत्तीसगढ़ खाद्य एवं औषधि प्रशासन (अराजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 2011 को देखा जाए तो तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है, इन नियमों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद के लिए मूल व्यवस्था में 90 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और 10 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरने का प्रावधान दर्ज है,वहीं Sampling Assistant यानी नमूना सहायक के पद के लिए 75 प्रतिशत सीधी भर्ती और 25 प्रतिशत पदोन्नति का प्रावधान दिया गया है, इससे यह दावा पूरी तरह सही नहीं होगा कि नमूना सहायक से खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनने का रास्ता नियमों में था ही नहीं,उपलब्ध 2011 नियमों में ऐसा पदोन्नति चैनल दर्ज है, नियमों के अनुसार Sampling Assistant âð Food Safety Officer पद पर पदोन्नति के लिए 10 वर्ष की सेवा और B.Sc. Chemistry जैसी पात्रता का उल्लेख है,इसी तरह नमूना सहायक के लिए 12वीं स्तर की शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान भी नियमों में दिखाई देता है,यानी विवाद का सही सवाल यह नहीं है कि ‘नमूना सहायक कभी FSO बन ही नहीं सकता था?’ बल्कि असली सवाल यह है क्या 11 अगस्त 2026 की 13 पदोन्नतियों में प्रत्येक कर्मचारी ने उस समय लागू सभी शर्तें पूरी की थीं? और दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न यदि 10 प्रतिशत पदोन्नति कोटा बदलकर 25 प्रतिशत किया गया था, तो यह संशोधन किस अधिसूचना से, किस तारीख से और किन परिस्थितियों में प्रभावी हुआ?
क्या Food Safety Officer वास्तव में ‘वैधानिक पद’ है?
यहां शब्दों की शुद्धता भी महत्वपूर्ण है,Food Safety Officer की भूमिका Food Safety and Standards Act,,2006 के अंतर्गत निर्धारित है, अधिनियम की धारा 37 के तहत Commissioner of Food Safety निर्धारित योग्यता रखने वाले व्यक्तियों को Food Safety Officer नियुक्त करता है और उन्हें संबंधित क्षेत्र सौंपा जाता है। अधिनियम की धारा 38 में FSO की शक्तियां निर्धारित हैं,जबकि धारा 41 में तलाशी, जब्ती और जांच से संबंधित शक्तियों का प्रावधान है,इसलिए FSO केवल विभागीय पदनाम नहीं है। इस पद पर आने वाला अधिकारी खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने की जिम्मेदारी निभाता है,लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर भी है,नमूना सहायक का पद यदि राज्य सेवा नियमों में विभागीय पद है,तो इसका यह अर्थ नहीं कि उस पद से FSO की पदोन्नति स्वतः अवैध हो जाएगी,उपलब्ध छत्तीसगढ़ के 2011 सेवा नियम स्वयं Sampling Assistant से Food Safety Officer तक पदोन्नति का चैनल दिखाते हैं,इसलिए विवाद को सही तरीके से देखने के लिए पद की प्रकृति से ज्यादा जरूरी है—पदोन्नति के समय लागू नियम और केंद्रीय कानून की पात्रता का अनुपालन।
केवल डिग्री हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं- Food Safety and Standards Rules, w®vv ·Ô¤ Rule w.v.x ×ð΄ Food Safety Officer के लिए निर्धारित योग्यता दी गई है,इसमें Food Technology,Dairy Technology,Biotechnology, Oil Technology,Agricultural Science,Veterinary Sciences, Biochemistry, Microbiology में डिग्रीChemistry मेंMaster`s Degree या Medicine की डिग्री जैसी योग्यताएं शामिल हैं,इसके साथ निर्धारित प्रशिक्षण भी आवश्यक है,FSSAI ने राज्यों को स्पष्ट किया है कि Rule 2.1.3 में दी गई शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य है और Food Safety Officer को अधिसूचित किए जाने से पहले निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करना भी जरूरी है, सुप्रीम कोर्ट ने भी 2025 के Chandra Shekhar Singh v. State of Jharkhand मामले में FSO की योग्यता के संदर्भ में यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार केंद्रीय नियमों द्वारा निर्धारित योग्यता के क्षेत्र को अपने स्तर पर बदल नहीं सकती,यानी यदि किसी कर्मचारी ने बाद में कोई डिग्री हासिल कर ली है तो केवल डिग्री होना ही पूरी प्रक्रिया को वैध नहीं बना देता, देखना होगा कि क्या कर्मचारी उस डिग्री के आधार पर Rule 2.1.3 की पात्रता पूरी करता था? क्या आवश्यक प्रशिक्षण पूरा था? क्या पदोन्नति की तारीख पर पात्रता मौजूद थी? और सबसे महत्वपूर्ण क्या धारा 37 के तहत आवश्यक नियुक्ति/अधिसूचना की प्रक्रिया पूरी की गई?
क्या क्लर्क या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी डिग्री लेकर FSO बन सकता है?-यही सवाल इस विवाद का सबसे धारदार हिस्सा है, मान लीजिए किसी कर्मचारी का मूल पद क्लर्क है और वह बाद में M.Sc. Chemistry कर लेता है। क्या केवल इस डिग्री के आधार पर उसे Food Safety Officer बनाया जा सकता है? नहीं—सिर्फ डिग्री पर्याप्त नहीं होगी, उसे लागू सेवा नियमों में उस पद से स्नस्ह्र पद पर नियुक्ति/पदोन्नति का वैध मार्ग, निर्धारित सेवा-अवधि,अन्य पात्रता और केंद्रीय कानून के तहत आवश्यक शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण शर्तें पूरी करनी होंगी,इसी तरह किसी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी द्वारा डिग्री प्राप्त कर लेने से वह स्वतः FSO पद का अधिकारी नहीं बन जाएगा, यही कारण है कि 13 पदोन्नत कर्मचारियों की फाइल में मूल पद,नियुक्ति आदेश, सेवा अवधि, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, वरिष्ठता,अनुभव, प्रशिक्षण और डीपीसी की अनुशंसा की जांच सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है।
डीपीसी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण-11 अगस्त का आदेश यदि डीपीसी की अनुशंसा पर आधारित है,तो डीपीसी की बैठक की कार्यवाही और नोटशीट सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बन जाती है, डीपीसी ने प्रत्येक कर्मचारी के मामले में क्या देखा? सेवा अवधि वरिष्ठता, मूल नियुक्ति, शैक्षणिक योग्यता, B.Sc. Chemistry या संबंधित पात्रता, प्रशिक्षण, गोपनीय चरित्रावली/सेवा अभिलेख, पदोन्नति कोटे की उपलब्धता, रिक्त पदों की स्थिति, लागू संशोधित नियम,तकनीकी पात्रता का परीक्षण किस अधिकारी या शाखा ने किया?,कितने पद उपलब्ध थे?,क्या कोई आपत्ति या शिकायत प्राप्त हुई? यदि शिकायत थी तो उसका परीक्षण कैसे हुआ? धारा 37 के तहत आवश्यक प्रक्रिया इन सभी बिंदुओं का परीक्षण हुआ या नहीं—यही अब जांच का केंद्र होना चाहिए।
अब विवाद का केंद्र ‘पदोन्नति हुई या नहीं’ नहीं,‘कैसे हुई’ है- खाद्य एवं औषधि प्रशासन का मूल उद्देश्य जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उपलब्ध कराना है। जिले में Food Safety Officer की भूमिका होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, खाद्य प्रतिष्ठानों, बाजार और खाद्य कारोबारियों की जांच से सीधे जुड़ी है,इसलिए अधिकारी की नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी,विभाग की विश्वसनीयता उतनी ही मजबूत होगी, विभाग के पास यह कहने का अधिकार है कि 13 कर्मचारियों की पदोन्नति नियमों के अनुसार हुई है, लेकिन यदि ऐसा है तो उसे नियम,संशोधन अधिसूचना, डीपीसी की कार्यवाही, पात्रता परीक्षण और प्रशिक्षण संबंधी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर देना चाहिए,क्योंकि दस्तावेज सामने आते ही कई सवालों का जवाब अपने आप मिल जाएगा, दूसरी ओर यदि किसी कर्मचारी की पात्रता, सेवा अवधि या प्रशिक्षण में कमी है, तो वह भी जांच में सामने आना चाहिए।
दैनिक घटती-घटना की मुहिम : सवाल व्यवस्था से है, कर्मचारियों से नहीं-13 नमूना सहायकों की पदोन्नति अपने आप में विवाद का प्रमाण नहीं है, विवाद का आधार वह प्रक्रिया है जिसके तहत यह पदोन्नति हुई, 6 मई की अधिसूचना से लेकर 11 अगस्त के आदेश तक की पूरी फाइल सामने आनी चाहिए, 2011 के भर्ती नियम बताते हैं कि Sampling Assistant âð Food Safety Officer तक पदोन्नति का रास्ता मौजूद था,अब यह जांचना जरूरी है कि 2026 में उस रास्ते पर चलने वालों ने सभी अनिवार्य शर्तें पूरी कीं या नहीं,केंद्रीय कानून की धारा 37 और Rule 2.1.3 के तहत निर्धारित योग्यता एवं प्रशिक्षण को दरकिनार कर केवल विभागीय पदोन्नति नियम के आधार पर FSO बनाया जा सकता है या नहीं? यह भी रिकॉर्ड से स्पष्ट होना चाहिए, FSSAI की आधिकारिक व्याख्या शैक्षणिक योग्यता और प्रशिक्षण को अनिवार्य बताती है, इसलिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या 13 पदोन्नतियां नियमों के अनुसार हुई हैं, या नियमों के साथ-साथ प्रत्येक कर्मचारी की वैधानिक पात्रता की भी पूरी जांच हुई है? इस सवाल का जवाब आरोपों से नहीं,6 मई की अधिसूचना,11 अगस्त के पदोन्नति आदेश,मूल भर्ती नियम,संशोधित नियम, डीपीसी की नोटशीट और 13 कर्मचारियों के पात्रता दस्तावेजों से मिलेगा,दैनिक घटती घटना की मुहिम यहीं से आगे बढ़ती है—पदोन्नति पर फैसला नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया की दस्तावेजी पड़ताल जारी है,बहुत जल्द और खुलासे होगे।
16 जनवरी 2023 की अधिसूचना से उठता वैधानिक सवाल-16 जनवरी 2023 को भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में Rule 2.1.2 के तहत Designated Officer के पद के लिए Food Safety Officer के रूप में कम से कम पांच वर्ष के अनुभव को पात्रता में महत्व दिया गया,इससे यह स्पष्ट होता है कि उच्च वैधानिक पद पर पदोन्नति के लिए संबंधित वैधानिक पद का व्यावहारिक अनुभव महत्वपूर्ण माना गया है,वहीं Rule 2.1.3 में Food Safety Officer के लिए शैक्षणिक योग्यताओं का उल्लेख है, लेकिन सवाल यह है कि क्या नमूना सहायक जैसे किसी अन्य संवर्ग के पद पर कार्य करने का अनुभव FSO पद पर पदोन्नति के लिए स्वतः मान्य है? यदि नमूना सहायक को FSO का फीडर कैडर मानने का स्पष्ट प्रावधान है,तो संबंधित नियम,अधिसूचना और पदोन्नति प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए, मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्रीय अधिनियम की धारा 91 के तहत नियम बनाने और उनमें संशोधन का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, ऐसे में राज्य स्तर पर किसी संवर्ग को स्नस्ह्र पद पर पदोन्नति के लिए पात्र बनाने से पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि उसका आधार किस केंद्रीय नियम या विधिवत संशोधन में मौजूद है,सिर्फ शैक्षणिक योग्यता पूरी होना और वैधानिक रूप से निर्धारित फीडर कैडर का कर्मचारी होना एक ही बात नहीं है, इसलिए नमूना सहायक से FSO पद पर हुई पदोन्नति की वैधानिकता, अनुभव, पात्रता और प्रशिक्षण—इन सभी बिंदुओं की नियमों के आधार पर जांच जरूरी है।
अब सरकार और विभाग से सीधे 12 सवाल
पहला-6 मई 2026 की अधिसूचना में वास्तव में क्या संशोधन किया गया?
दूसरा-क्या Food Safety Officer पद पर पदोन्नति का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया गया?
तीसरा-यदि हां,तो संशोधन किस तारीख से प्रभावी हुआ?
चौथा-क्या 11 अगस्त की पदोन्नति सूची पूरी तरह संशोधित नियम के आधार पर तैयार हुई?
पांचवां-13 कर्मचारियों में से प्रत्येक ने 10 वर्ष की आवश्यक सेवा पूरी की थी?
छठा-प्रत्येक कर्मचारी की शैक्षणिक योग्यता Rule 2.1.3 से मेल खाती है?
सातवां-क्या सभी पदोन्नत कर्मचारियों ने अनिवार्य प्रशिक्षण पूरा किया था?
आठवां-क्या धारा 37 के तहत उनकी नियुक्ति/अधिसूचना की प्रक्रिया पूरी हुई?
नौवां-डीपीसी की नोटशीट और अनुशंसा में इन बिंदुओं का परीक्षण दर्ज है?
दसवां-विभाग मेंFood Safety Officerके कितने पद स्वीकृत और कितने रिक्त हैं?
ग्यारहवां-मई 2026 में 30 नमूना सहायकों की भर्ती और अगस्त में 13 नमूना सहायकों की पदोन्नति—दोनों प्रक्रियाओं के पीछे मानव संसाधन योजना क्या है?
बारहवां- क्या 13 पदोन्नतियों के बाद भी स्नस्ह्र के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती होगी?
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