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बैकुंठपुर@ आबकारी विभाग के ‘बड़े बाबू’ का वीडियो वायरल,दुकान बंद होने के बाद शराब मांगने और कर्मचारियों को धमकाने का आरोप

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कथित वीडियो ने विभागीय कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल,हाजिरी के नाम पर दुकान-दुकान कथित वसूली के आरोप ने बढ़ाई चिंता
-संवाददाता-
बैकुंठपुर,25 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
कोरिया जिला आबकारी विभाग एक कथित वायरल वीडियो को लेकर सवालों के घेरे में है, सोशल मीडिया और विभिन्न व्हाट्सएप समूहों में प्रसारित वीडियो में विभाग से जुड़े एक व्यक्ति को शराब दुकान के कर्मचारियों के साथ बहस और दबाव की स्थिति में देखा जा रहा है, वीडियो में शराब की बोतल भी दिखाई देती है और इसे लेकर दावा किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति दुकान बंद होने के बाद भी कर्मचारियों से शराब मांग रहा था। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है,इसलिए इसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान,वीडियो की तारीख, स्थान और पूरी घटना की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। लेकिन वीडियो के साथ प्रसारित संदेशों में लगाए गए आरोपों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं,दावा किया जा रहा है कि विभाग का यह ‘बड़ा बाबू’ शराब दुकान बंद होने के बाद कर्मचारियों को कथित रूप से धमकाते हुए शराब मांगता है और शराब नहीं देने पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता है,यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि विभागीय अनुशासन,पद के प्रभाव और शराब दुकानों की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े होंगे।
दुकान बंद होने के बादशराब मांगने का दावा,आखिर किसके दबाव में कर्मचारी?
वायरल वीडियो को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि दुकान का निर्धारित समय समाप्त हो चुका था,तो उसके बाद शराब उपलब्ध कराने के लिए कर्मचारियों पर कथित दबाव क्यों बनाया गया? शराब दुकानों के संचालन और बिक्री की निगरानी आबकारी व्यवस्था के अंतर्गत आती है,ऐसे में विभाग से जुड़े व्यक्ति पर ही यदि दुकान बंद होने के बाद शराब मांगने का आरोप लग रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है, वीडियो में मौजूद दृश्य और उसे लेकर प्रसारित संदेश यह दावा करते हैं कि संबंधित व्यक्ति पहले से नशे की हालत में दिखाई दे रहा था और कर्मचारियों से शराब लेने को लेकर विवाद कर रहा था, हालांकि केवल वीडियो के दृश्य के आधार पर किसी व्यक्ति के नशे में होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, इसके लिए चिकित्सकीय या अन्य स्वतंत्र प्रमाण आवश्यक होंगे, यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम को जांच के दायरे में लाना जरूरी है, सवाल यह भी है कि क्या यह घटना केवल एक दिन की है या फिर कर्मचारियों के अनुसार इस तरह की मांग पहले भी होती रही है? यदि यह नियमित व्यवहार था तो दुकान संचालकों और कर्मचारियों ने पहले शिकायत क्यों नहीं की? क्या उन्हें विभागीय कार्रवाई का डर था? इन सवालों के जवाब कर्मचारियों के स्वतंत्र बयान से सामने आ सकते हैं।
कर्मचारियों पर दबाव की शिकायत सही है तो मामला गंभीर- शराब दुकानों में कार्यरत कर्मचारी विभागीय निगरानी और संचालन व्यवस्था के अधीन काम करते हैं, यदि किसी वरिष्ठ या प्रभावशाली कर्मचारी द्वारा शराब उपलब्ध कराने अथवा हाजिरी के नाम पर कथित रूप से दबाव बनाया जाता है, तो अधीनस्थ कर्मचारियों के लिए खुलकर शिकायत करना कठिन हो सकता है, यही वजह है कि जांच की स्थिति में कर्मचारियों के बयान स्वतंत्र और बिना दबाव के दर्ज किए जाना जरूरी है, जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि जिले की कितनी शराब दुकानों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, यदि आरोप केवल एक दुकान तक सीमित हैं तो घटना की प्रकृति अलग होगी, लेकिन यदि कई दुकानों के कर्मचारी एक जैसी शिकायत करते हैं तो यह विभागीय स्तर पर व्यापक जांच का आधार बन सकता है।
अब हाजिरी के नाम पर कथित वसूली का आरोप भी सामने आया- मामले को और गंभीर बनाते हुए शराब दुकान से जुड़े कर्मचारियों की ओर से एक अन्य आरोप भी सामने आने की बात कही जा रही है, आरोप है कि कुछ कर्मचारी यदि छुट्टी पर रहते हैं या किसी कारण से ऑनलाइन हाजिरी दर्ज नहीं कर पाते, तो उनकी हाजिरी बनाने के नाम पर संबंधित बड़े बाबू द्वारा कथित रूप से दुकान-दुकान जाकर पैसे की मांग की जाती है, हालांकि इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, यदि ऐसा हो रहा है तो यह केवल कर्मचारियों के शोषण का मामला नहीं होगा, बल्कि हाजिरी जैसी आधिकारिक व्यवस्था के दुरुपयोग का भी गंभीर प्रश्न बनेगा, इस आरोप की सच्चाई जानने के लिए विभाग को संबंधित कर्मचारियों के बयान, ऑनलाइन उपस्थिति का रिकॉर्ड, कथित भुगतान की जानकारी और संबंधित अधिकारी की भूमिका की जांच करनी चाहिए।
क्या कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है?– शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारी विभागीय अधिकारियों और पर्यवेक्षण व्यवस्था के अधीन रहते हैं, ऐसे में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का प्रभाव इस्तेमाल कर शराब मांगता है या हाजिरी के नाम पर कथित रूप से पैसे की मांग करता है, तो कर्मचारियों के लिए विरोध करना मुश्किल हो सकता है, यही वजह है कि सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। कर्मचारियों के बयान गुप्त रूप से दर्ज किए जाएं तो यह भी सामने आ सकता है कि कथित वसूली एक-दो मामलों तक सीमित थी या फिर कई दुकानों में ऐसी शिकायतें हैं।
विभाग के सामने खड़े हैं कई सवाल
पहला सवाल—वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति कौन है और क्या वह कोरिया आबकारी विभाग का कर्मचारी है?
दूसरा सवाल—वीडियो कहां और कब बनाया गया तथा क्या उस समय संबंधित शराब दुकान निर्धारित समय के बाद बंद हो चुकी थी?
तीसरा सवाल—क्या दुकान बंद होने के बाद शराब मांगने का आरोप सही है?
चौथा सवाल—क्या कर्मचारियों पर शराब देने के लिए दबाव या अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया?
पांचवां सवाल—क्या ऑनलाइन हाजिरी नहीं लग पाने या छुट्टी के मामलों में हाजिरी बनाने के नाम पर कर्मचारियों से पैसे मांगे जाते हैं?
छठा सवाल—क्या कथित वसूली एक दुकान तक सीमित है या कई दुकानों के कर्मचारी इससे प्रभावित हैं?
सातवां सवाल—यदि पैसे की मांग की गई तो उसका कोई रिकॉर्ड, लेन-देन या कर्मचारी का बयान उपलब्ध है?
आठवां सवाल—विभाग ने वायरल वीडियो और आरोपों का संज्ञान लिया है या नहीं?

अब नजर विभाग की अगली कार्रवाई पर
फिलहाल इस पूरे मामले में वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और आरोपों की आधिकारिक जांच बाकी है,इसलिए किसी व्यक्ति को केवल वायरल सामग्री के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं होगा,लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि वायरल वीडियो और उसके साथ सामने आए आरोपों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता,कोरिया के आबकारी विभाग को अब यह स्पष्ट करना होगा कि वायरल वीडियो को लेकर उसकी जानकारी क्या है,संबंधित व्यक्ति विभाग से जुड़ा है या नहीं और कर्मचारियों द्वारा लगाए जा रहे कथित वसूली के आरोपों की जांच कौन करेगा? सवाल अब केवल एक वायरल वीडियो का नहीं है,सवाल यह है कि यदि विभाग की निगरानी व्यवस्था के भीतर ही शराब मांगने,कर्मचारियों को कथित रूप से धमकाने और ऑनलाइन हाजिरी के नाम पर दुकान-दुकान पैसे मांगने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं, तो इनकी निष्पक्ष जांच कब होगी? कर्मचारियों और विभाग दोनों के हित में यही बेहतर होगा कि आरोपों को सोशल मीडिया की बहस तक सीमित रखने के बजाय दस्तावेज,सीसीटीवी, डिजिटल हाजिरी और स्वतंत्र बयानों के आधार पर पूरा सच सामने लाया जाए।
हाजिरी के नाम पर दुकान-दुकान कथित वसूली का आरोप
वायरल वीडियो के साथ सामने आए आरोपों का दूसरा पहलू और भी गंभीर है,शराब दुकान से जुड़े कर्मचारियों की ओर से कथित रूप से यह शिकायत सामने आई है कि यदि कोई कर्मचारी छुट्टी पर रहता है या किसी कारण से ऑनलाइन हाजिरी दर्ज नहीं कर पाता,तो हाजिरी बनाने के नाम पर कथित रूप से पैसे की मांग की जाती है,आरोप यह भी है कि इस तरह की कथित वसूली के लिए दुकान-दुकान जाकर कर्मचारियों से राशि मांगी जाती है,इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि ऐसा कोई तंत्र वास्तव में चल रहा है तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय होगा,ऑनलाइन हाजिरी एक आधिकारिक व्यवस्था है और उसमें किसी कर्मचारी की उपस्थिति दर्ज करने या अनुपस्थिति को ठीक करने के नाम पर निजी रूप से पैसे लेना कथित रूप से अधिकार के दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है। इसकी सच्चाई जानने के लिए विभाग को डिजिटल हाजिरी का रिकॉर्ड, अवकाश आवेदन, संबंधित दुकानों की उपस्थिति रिपोर्ट और कर्मचारियों के स्वतंत्र बयान की जांच करनी चाहिए।
‘बड़े बाबू’ के नाम से चल रही चर्चा की भी हो जांच
विभिन्न व्हाट्सऐप समूहों में प्रसारित संदेशों में संबंधित व्यक्ति को ‘बड़ा बाबू’ बताया जा रहा है, इससे विभागीय स्तर पर यह स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति कौन है और उसकी विभाग में वास्तविक पदस्थापना क्या है, यदि वह विभागीय कर्मचारी नहीं है तो विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, यदि वह विभागीय कर्मचारी है तो उसके पद, दायित्व और संबंधित शराब दुकानों पर उसकी निगरानी भूमिका की भी जानकारी सामने आनी चाहिए, किसी वायरल वीडियो में किसी व्यक्ति की पहचान केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर तय करना उचित नहीं है, इसलिए विभागीय जांच में वीडियो का मूल स्रोत, रिकॉर्डिंग की तारीख और स्थान, वीडियो की निरंतरता तथा उसमें मौजूद व्यक्तियों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।
फ्री की शराब’ मांगने के आरोप की भी जांच जरूरी
प्रसारित संदेशों में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति कर्मचारियों से ‘फ्री में शराब’ मांगता है और नहीं देने पर कथित रूप से गाली-गलौज या दबाव का प्रयोग करता है, इस आरोप की पुष्टि भी उपलब्ध सामग्री से स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है,फिर भी यदि जांच में यह साबित होता है कि कोई विभागीय कर्मचारी अपने पद का प्रभाव इस्तेमाल कर शराब की मांग करता था, तो यह गंभीर आचरण का मामला होगा,यहां विभाग के सामने दोहरी जिम्मेदारी है—पहली,वीडियो की सत्यता और घटना की वास्तविकता की जांच, दूसरी, कर्मचारियों द्वारा लगाए जा रहे वसूली और दबाव के आरोपों की स्वतंत्र जांच। दोनों को अलग-अलग बिंदुओं पर जांचना जरूरी होगा,ताकि किसी एक आरोप की आड़ में दूसरे आरोप को नजरअंदाज न किया जाए।
वायरल वीडियो ने विभाग की छवि पर भी खड़े किए सवाल
आबकारी विभाग का काम शराब की बिक्री और उससे जुड़े नियमों की निगरानी करना है,ऐसे में विभाग से जुड़े किसी कर्मचारी का शराब दुकान के संदर्भ में विवादित वीडियो सामने आना विभाग की छवि के लिए भी नुकसानदेह है,खासकर तब,जब उसी वीडियो के साथ कर्मचारियों से कथित रूप से पैसे लेने और शराब मांगने जैसे आरोप भी प्रसारित हो रहे हों,हालांकि किसी वायरल वीडियो को अंतिम प्रमाण मानना उचित नहीं है, वीडियो के साथ छेड़छाड़,अधूरा वीडियो,संदर्भ से अलग दृश्य या पुरानी घटना को नए दावे के साथ प्रसारित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए आधिकारिक जांच ही यह तय कर सकती है कि वीडियो वास्तविक घटना का है या नहीं और उसमें दिखाई दे रही घटना की वास्तविक पृष्ठभूमि क्या है।


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