- पत्रकारिता से संगठन की राजनीति तक पहुंचे कमलेश शर्मा,अब बैकुण्ठपुर पालिका अध्यक्ष की रेस में नाम क्यों?
- अध्यक्ष पद की रेस में कमलेश शर्मा की चर्चा तेज, पत्रकारिता से राजनीति तक के सफर पर टिकी नजर
- पत्रकारिता,छात्र राजनीति और सामाजिक सक्रियता के बाद अब पालिका अध्यक्ष की दावेदारी?
- कमलेश शर्मा पर नजर बैकुण्ठपुर पालिका अध्यक्ष कौन? कमलेश शर्मा के नाम की चर्चा ने सियासी समीकरणों को दी नई हवा
- छात्रसंघ अध्यक्ष से प्रदेश कार्यसमिति तक,अब नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर कमलेश शर्मा की नजर?
- कमलेश शर्मा की संभावित दावेदारी से बैकुण्ठपुर की राजनीति गरम,दोनों दलों में चर्चाओं का दौर
- अनारक्षित मुक्त सीट ने खोला रास्ता, बैकुण्ठपुर में कमलेश शर्मा का नाम बना सियासी चर्चा का केंद्र
- दावेदारी की चर्चा से बढ़ी हलचल : क्या बैकुण्ठपुर को कमलेश शर्मा के रूप में मिलेगा नया राजनीतिक चेहरा?
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,23 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। बैकुण्ठपुर नगर पालिका के आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां अब धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं,अध्यक्ष पद के लिए इस बार अनारक्षित मुक्त सीट होने के बाद राजनीतिक दलों के भीतर संभावित चेहरों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, दिसंबर में चुनाव होने की संभावित चर्चा के बीच जहां कई पुराने और नए चेहरे अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं, वहीं बैकुण्ठपुर के वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रेस क्लब कोरिया के अध्यक्ष कमलेश शर्मा का नाम भी अध्यक्ष पद के संभावित दावेदार के रूप में तेजी से चर्चा में आने लगा है।
हालांकि अभी तक किसी भी राजनीतिक दल की ओर से कमलेश शर्मा को अध्यक्ष पद का अधिकृत प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है और न ही उनकी ओर से औपचारिक रूप से चुनाव लड़ने की घोषणा सामने आई है, इसके बावजूद राजनीतिक,सामाजिक और संगठनात्मक हलकों में उनके नाम को लेकर चर्चा लगातार बढ़ रही है, कमलेश शर्मा की संभावित दावेदारी को इसलिए भी अलग नजर से देखा जा रहा है क्योंकि उनका सार्वजनिक जीवन केवल एक राजनीतिक संगठन तक सीमित नहीं रहा है, छात्र राजनीति से शुरुआत, लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रियता, सामाजिक संस्थाओं से जुड़ाव,विधिक सेवा के क्षेत्र में जिम्मेदारी और अब भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में संगठनात्मक भूमिका—इन तमाम पहलुओं को उनके समर्थक अध्यक्ष पद की संभावित दावेदारी की ताकत के रूप में देख रहे हैं।
छात्र राजनीति से मिली नेतृत्व की पहली सीढ़ी- कमलेश शर्मा का सार्वजनिक जीवन केवल पत्रकारिता से शुरू नहीं हुआ, वे पीजी कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष भी रह चुके हैं, छात्र राजनीति में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालना उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है,छात्र राजनीति में संगठन चलाने, विद्यार्थियों की समस्याओं को उठाने, प्रशासन के सामने अपनी बात रखने और विभिन्न समूहों के बीच समन्वय बनाने का अनुभव मिलता है,इसके बाद पत्रकारिता में लंबे समय तक सक्रिय रहने से उनके सार्वजनिक जीवन का दायरा और बढ़ा,समर्थकों का मानना है कि छात्र राजनीति और पत्रकारिता दोनों ने उन्हें अलग-अलग प्रकार का अनुभव दिया, एक ओर युवाओं और संगठन से जुड़ाव रहा, वहीं दूसरी ओर पत्रकारिता के कारण समाज के विभिन्न वर्गों और प्रशासनिक तंत्र से संवाद बना रहा, यदि वे भविष्य में चुनावी राजनीति में उतरते हैं तो यही अनुभव उनके लिए राजनीतिक पूंजी के रूप में काम कर सकता है।
भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य की जिम्मेदारी- कमलेश शर्मा को भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ का प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बनाए जाने के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता को लेकर भी चर्चाएं बढ़ी हैं,प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलना उनके समर्थकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है,हालांकि किसी संगठनात्मक पद पर नियुक्ति को सीधे नगर पालिका अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी से जोड़ना उचित नहीं होगा,प्रत्याशी चयन राजनीतिक दल की अपनी प्रक्रिया,संगठन की राय,स्थानीय समीकरण और चुनावी रणनीति के आधार पर होता है,फिर भी स्थानीय राजनीति में यह चर्चा जरूर है कि प्रदेश संगठन से जुड़ाव ने कमलेश शर्मा की राजनीतिक पहचान को एक नया आयाम दिया है, अब सवाल यही है कि यदि पार्टी नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए ऐसे चेहरे पर विचार करती है,जिसका सामाजिक और सार्वजनिक क्षेत्र में संपर्क हो, तो क्या शर्मा का नाम संभावित सूची में ऊपर तक पहुंच पाएगा?
सामाजिक क्षेत्र में भी रही सक्रियता- कमलेश शर्मा की गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सामाजिक क्षेत्र से भी जुड़ा रहा है, उन्हें छत्तीसगढ़ प्रदेश रेडक्रॉस समिति, रायपुर के वाइस चेयरमैन तथा राज्य प्रबंध समिति छत्तीसगढ़ के सदस्य के रूप में जिम्मेदारी मिलने की बात सामने आती है, कोरिया जैसे क्षेत्र से प्रदेश स्तर की संस्था में जिम्मेदारी तक पहुंचना उनके सार्वजनिक जीवन की एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में देखा जाता है,रेडक्रॉस जैसी संस्था से जुड़ाव ने उन्हें सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों के साथ काम करने का अवसर दिया है,इसके अतिरिक्त जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरिया और लोक अदालत में सदस्य के रूप में कार्य करने का अनुभव भी उनके सार्वजनिक जीवन का हिस्सा रहा है, इन जिम्मेदारियों के कारण प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और आम लोगों से जुड़े विभिन्न स्तरों पर संवाद का अवसर उन्हें मिला।
मृदुभाषी छवि और व्यापक संपर्क को माना जा रहा मजबूत पक्ष- राजनीतिक चुनाव में संगठन के साथ-साथ व्यक्ति की व्यक्तिगत छवि भी महत्वपूर्ण होती है, कमलेश शर्मा को उनके समर्थक मृदुभाषी, व्यवहार कुशल और सहज व्यक्तित्व वाला चेहरा बताते हैं, स्थानीय राजनीति में यह गुण कई बार महत्वपूर्ण साबित होते हैं, अलग-अलग विचारधारा वाले लोगों के साथ संवाद बनाए रखना और व्यक्तिगत संबंधों को राजनीतिक मतभेद से अलग रखना किसी भी स्थानीय जनप्रतिनिधि के लिए उपयोगी माना जाता है, बैकुण्ठपुर जैसे नगर में व्यापारी, कर्मचारी, युवा, महिलाएं, सामाजिक संगठन, अधिवक्ता, पत्रकार, श्रमिक और ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों सहित विभिन्न वर्गों का अपना महत्व है, ऐसे में किसी भी संभावित दावेदार के लिए व्यापक सामाजिक संपर्क एक महत्वपूर्ण चुनावी पूंजी हो सकता है।
दोनों प्रमुख दलों में चर्चा का दावा- स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में कमलेश शर्मा के नाम को लेकर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के बीच भी चर्चा होने की बात कही जा रही है, हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी दल की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, चुनाव से पहले संभावित प्रत्याशियों के नामों को लेकर इस तरह की चर्चाएं आम हैं, कई बार जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा होती है, वे अंतिम सूची में नहीं होते और कई बार संगठन अचानक ऐसे चेहरे को सामने लाता है जिसकी चर्चा पहले कम होती है, इसलिए वर्तमान स्थिति में कमलेश शर्मा को संभावित दावेदार के रूप में देखना ही उचित होगा, अंतिम फैसला पार्टी की चुनावी रणनीति और अधिकृत घोषणा के बाद ही सामने आएगा।
क्या पत्रकारिता का अनुभव नगर पालिका में काम आएगा?- यदि कमलेश शर्मा चुनावी मैदान में उतरते हैं तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पत्रकारिता से जनप्रतिनिधि की भूमिका में बदलाव की होगी, पत्रकारिता में व्यवस्था से सवाल पूछना एक भूमिका है, जबकि नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में उन्हीं व्यवस्थाओं के भीतर रहकर समस्याओं का समाधान कराना दूसरी जिम्मेदारी होगी, बैकुण्ठपुर नगर पालिका के सामने कई बुनियादी चुनौतियां हैं, सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन, यातायात, पार्किंग, नगर की साफ-सफाई, सार्वजनिक स्थानों का विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे चुनाव में महत्वपूर्ण हो सकते हैं, ऐसे में यदि शर्मा की दावेदारी आगे बढ़ती है तो मतदाता यह भी जानना चाहेंगे कि शहर के विकास को लेकर उनका दृष्टिकोण क्या है।
अध्यक्ष पद केवल राजनीतिक प्रतिष्ठा नहीं, बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी भी- नगर पालिका अध्यक्ष का पद स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है, अध्यक्ष के सामने राजनीतिक अपेक्षाओं के साथ-साथ प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियां भी होती हैं,नगर विकास के लिए आने वाली राशि का उपयोग, विकास कार्यों की प्राथमिकता,परिषद के सदस्यों के साथ समन्वय और नागरिकों की शिकायतों का निराकरण अध्यक्ष की कार्यशैली पर निर्भर करता है,इसलिए चुनावी चर्चा में किसी भी दावेदार की व्यक्तिगत लोकप्रियता के साथ उसकी प्रशासनिक समझ और विकास की स्पष्ट सोच भी महत्वपूर्ण होगी,यदि कमलेश शर्मा वास्तव में मैदान में उतरते हैं तो उनके सामने यही चुनौती होगी कि वे अपने लंबे सार्वजनिक अनुभव को नगर विकास के स्पष्ट एजेंडे में कैसे बदलते हैं।
बैकुण्ठपुर को किस तरह का नेतृत्व चाहिए?- नगर पालिका चुनाव में एक बड़ा सवाल यह भी रहेगा कि शहर के मतदाता किस तरह का नेतृत्व चाहते हैं, क्या मतदाता अनुभवी चेहरे को प्राथमिकता देंगे? क्या संगठन के पुराने कार्यकर्ताओं को मौका मिलेगा? क्या नया चेहरा सामने आएगा? क्या सामाजिक संपर्क वाला व्यक्ति पार्टी के पारंपरिक समीकरणों को बदल पाएगा? इन सवालों के जवाब चुनावी माहौल आगे बढ़ने के साथ सामने आएंगे, कमलेश शर्मा का नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि उनकी पृष्ठभूमि पारंपरिक राजनीतिक कार्यकर्ता से कुछ अलग है, छात्र राजनीति, पत्रकारिता, सामाजिक संस्थाओं और संगठनात्मक जिम्मेदारियों का मिश्रण उन्हें अलग पहचान देता है।
टिकट तक पहुंचना पहली और चुनाव जीतना दूसरी चुनौती- राजनीतिक गलियारों में किसी नाम की चर्चा होना और पार्टी का टिकट मिलना दो अलग-अलग बातें हैं, टिकट के बाद भी चुनाव जीतना अलग चुनौती है, यदि किसी दल से कई दावेदार सामने आते हैं तो पार्टी के सामने स्थानीय गुटीय समीकरण, वार्डों की स्थिति, सामाजिक संतुलन, संगठन की राय और उम्मीदवार की जीत की संभावना जैसे कई पहलू होंगे, कमलेश शर्मा की संभावित दावेदारी में भी यही कसौटियां लागू होंगी, उनके समर्थक जहां जनसंपर्क और सार्वजनिक जीवन के अनुभव को ताकत मान रहे हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषण की नजर से यह देखना होगा कि संगठनात्मक स्तर पर उनकी स्वीकार्यता कितनी है और चुनावी मैदान में उनका प्रभाव किस हद तक दिखाई देता है।
शहर की समस्याएं बनेंगी असली चुनावी मुद्दा-बैकुण्ठपुर के नगर पालिका चुनाव में व्यक्तिगत दावेदारी से ज्यादा महत्वपूर्ण अंततः शहर के मुद्दे होंगे,शहर में नागरिक सुविधाओं की स्थिति, सड़क और नाली व्यवस्था, पेयजल, सफाई, कचरा निपटान, प्रकाश व्यवस्था और विकास कार्यों की गुणवत्ता जैसे विषय चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं, जो भी उम्मीदवार इन मुद्दों पर स्पष्ट और व्यावहारिक रोडमैप जनता के सामने रख पाएगा,उसकी दावेदारी को मजबूती मिल सकती है,यदि कमलेश शर्मा चुनाव लड़ते हैं तो उनके लिए भी केवल अपनी पहचान और अनुभव बताना पर्याप्त नहीं होगा, उन्हें यह बताना होगा कि अध्यक्ष बनने के बाद बैकुण्ठपुर के लिए उनकी प्राथमिकताएं क्या होंगी।
अनारक्षित सीट ने बढ़ाया मुकाबले का दायरा– नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए सीट अनारक्षित मुक्त होने के बाद अब चुनावी मैदान में संभावित दावेदारों की संख्या बढ़ने की संभावना है, आरक्षण की स्थिति किसी विशेष वर्ग तक सीमित नहीं होने से राजनीतिक दलों के पास कई विकल्प खुले हैं,स्थानीय निकाय चुनाव में केवल पार्टी संगठन की पकड़ ही निर्णायक नहीं होती,वार्ड स्तर का जनसंपर्क,सामाजिक समीकरण,व्यक्तिगत पहचान,विभिन्न वर्गों के बीच स्वीकार्यता और स्थानीय मुद्दों की समझ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है,यही कारण है कि राजनीतिक दल चुनाव से काफी पहले संभावित चेहरों को लेकर आंतरिक स्तर पर चर्चा शुरू कर देते हैं,बैकुण्ठपुर में भी इसी तरह का माहौल बनता दिखाई दे रहा है,इस राजनीतिक चर्चा में कमलेश शर्मा का नाम सामने आना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे लंबे समय से शहर की गतिविधियों और स्थानीय मुद्दों के बीच सक्रिय रहे हैं।
पत्रकारिता से बना शहर के मुद्दों से सीधा जुड़ाव– कमलेश शर्मा की सार्वजनिक पहचान का सबसे बड़ा हिस्सा उनकी पत्रकारिता से जुड़ा हुआ है, लंबे समय तक पत्रकारिता में सक्रिय रहने के कारण उन्होंने बैकुण्ठपुर सहित कोरिया जिले के सामाजिक,प्रशासनिक और जनहित से जुड़े मुद्दों को करीब से देखा है,पत्रकारिता के दौरान शहर की समस्याओं को उठाने और विभिन्न वर्गों के लोगों से संपर्क रखने के कारण उनका जनसंपर्क लगातार बना रहा,यही जनसंपर्क अब उनके संभावित राजनीतिक सफर को लेकर चर्चा का आधार बन रहा है,राजनीति और पत्रकारिता की भूमिकाएं भले अलग हों,लेकिन स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में रहने से व्यक्ति को शहर की समस्याओं,प्रशासनिक व्यवस्था और जनता की अपेक्षाओं की समझ विकसित होती है,कमलेश शर्मा के समर्थक इसी अनुभव को उनकी संभावित दावेदारी का मजबूत पक्ष मानते हैं।
दिसंबर तक बढ़ सकती है राजनीतिक सरगर्मी– जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आएगा,राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है,संभावित दावेदारों के समर्थक सक्रिय होंगे,वार्ड स्तर पर संपर्क बढ़ेगा और राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर समीकरणों का आकलन करेंगे,ऐसे में कमलेश शर्मा के नाम की चर्चा आने वाले दिनों में और तेज होती है या किसी अन्य चेहरे का नाम आगे निकलता है,यह देखना दिलचस्प होगा,फिलहाल उनके नाम को लेकर राजनीतिक चर्चा जरूर शुरू हो चुकी है,लेकिन अंतिम तस्वीर अभी बाकी है।
‘चर्चा’ से ‘दावेदारी’ तक का सफर बाकी- कमलेश शर्मा के मामले में फिलहाल स्थिति स्पष्ट है…– नाम चर्चा में है,लेकिन उम्मीदवारी घोषित नहीं हुई है, उनका पत्रकारिता का अनुभव, छात्र राजनीति की पृष्ठभूमि,सामाजिक क्षेत्र में सक्रियता,विधिक सेवा से जुड़ा अनुभव और भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य की जिम्मेदारी उन्हें संभावित दावेदारों के बीच अलग पहचान जरूर देती है,लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव अंततः राजनीतिक संगठन, स्थानीय समीकरण और जनता के समर्थन से तय होगा,अब असली सवाल—क्या कमलेश शर्मा सिर्फ राजनीतिक चर्चा का चेहरा रहेंगे या चुनावी मैदान में उतरकर दावेदारी को हकीकत में बदलेंगे? बैकुण्ठपुर की राजनीति में आने वाले महीनों में इस सवाल का जवाब तलाशा जाएगा। अनारक्षित अध्यक्ष पद ने राजनीतिक मैदान खोल दिया है,कई चेहरे अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं,ऐसे में कमलेश शर्मा का नाम भी फिलहाल उन चेहरों में शामिल है,जिस पर राजनीतिक नजरें टिक गई हैं,टिकट किसे मिलेगा, यह पार्टी तय करेगी,लेकिन जनता के बीच कौन स्वीकार्य है, इसका फैसला अंततः चुनावी मैदान ही करेगा।
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