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अम्बिकापुर@जनता ने फिर संभाली सड़क की जिम्मेदारी..गड्ढे में राहत की पैबंदकारी

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गौरी पेट्रोल पंप-रावत रेजिडेंसी के पास एनएच-43 की बदहाली से परेशान थे राहगीर, नागरिकों की पहल पर हुई मरम्मत
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,18 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
इसे व्यवस्था की विडंबना कहें या जनता की मजबूरी—जब राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करना किसी चुनौती से कम न रह जाए तो आखिरकार नागरिकों को ही सड़क की सुध लेनी पड़ती है। अंबिकापुर-मनेन्द्रगढ़ मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 पर गौरी पेट्रोल पंप से रावत रेजिडेंसी के पास लंबे समय से सड़क का एक हिस्सा इतना खराब हो गया था कि वह सड़क कम और टापू अधिक नजर आने लगा था। बारिश के दौरान स्थिति और भी खतरनाक हो गई थी। स्थानीय जागरूक नागरिक एवं रहवासी मुन्ना पांडेय ने इस समस्या को गंभीरता से उठाया। उनका कहना है कि खराब सड़क के कारण कारों के बंपर टूटने की नौबत आ रही थी, महिलाएं एक्टिवा से गिर रही थीं और ऑटो तक पलटने की स्थिति बन रही थी। ऐसे में उन्होंने जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के नेताओं से संपर्क कर तत्काल राहत की मांग रखी।
बारिश में सड़क नहीं,‘रोमांचक सफर’ : सड़क की स्थिति ऐसी थी कि वाहन चालक को गड्ढे से बचने के लिए सड़क पर नहीं, बल्कि मानो गड्ढों के बीच सड़क तलाशनी पड़ रही थी। बारिश का पानी भरने के बाद गड्ढे की गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता था। दोपहिया वाहन चालकों और महिलाओं के लिए यह स्थिति विशेष रूप से जोखिम भरी बनी हुई थी। एनएच-43 की बदहाली कोई नई समस्या नहीं है। पूर्व में भी अंबिकापुर-मनेन्द्रगढ़ मार्ग की जर्जर स्थिति को लेकर शिकायतें और जनप्रतिनिधियों के निरीक्षण सामने आ चुके हैं। अगस्त 2024 में पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने भी इसी मार्ग की खराब स्थिति का मौके पर निरीक्षण कर जनसहयोग से गड्ढे भरने की पहल की थी।
नेताओं से चर्चा,फिर शुरू हुआ काम : मुन्ना पांडेय के अनुसार उन्होंने समस्या को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव,सरगुजा भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया एवं वींकी बाबा से चर्चा की। सभी ने जनहित में सहयोग का आश्वासन दिया। इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया की तत्परता से स्थानीय पार्षद कमलेश तिवारी एवं विनीत शुक्ला के साथ मिलकर उक्त स्थान पर सड़क की मरम्मत कराई गई। मरम्मत से फिलहाल राहगीरों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि खुद स्थानीय नागरिक भी मान रहे हैं कि बारिश के बीच यह स्थायी समाधान नहीं,बल्कि तत्काल राहत का प्रयास है। सड़क का व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण निर्माण बारिश के बाद ही संभव होगा।
सवाल यह कि हर गड्ढे के लिए नागरिक ही क्यों? सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस सड़क की जिम्मेदारी संबंधित सरकारी एजेंसियों की है,उसकी मरम्मत के लिए स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को आगे क्यों आना पड़ रहा है? अंबिकापुर की सड़कों की बदहाली को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। वर्ष 2024 में एनएच-43 की खराब हालत के कारण दुर्घटनाओं और आवागमन में परेशानी की खबरें सामने आई थीं। इतना ही नहीं, वर्ष 2025 में एनएच-43 के पैचवर्क की गुणवत्ता को लेकर भी विवाद सामने आया और कार्रवाई की खबरें प्रकाशित हुईं। अब वर्ष 2026 में भी बारिश से पहले सड़क मरम्मत को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए थे। जून 2026 में लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बारिश को देखते हुए सड़क रखरखाव और गड्ढों की मरम्मत को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे।
विकास की सड़क पर जनता की पैबंदकारी : अंबिकापुर से जुड़े एनएच-43 के उन्नयन और सुदृढ़ीकरण की योजनाएं कागजों पर मौजूद हैं। 2026 में सूरजपुर-शिलफिली से अंबिकापुर के बीच एनएच-43 के 10.50 किमी हिस्से के सुदृढ़ीकरण के लिए निविदा प्रक्रिया भी हुई है। लेकिन योजनाओं और निविदाओं के बीच जब तक जमीन पर सड़क पूरी तरह दुरुस्त नहीं होती, तब तक सवाल राहगीरों की सुरक्षा का है। फिलहाल मुन्ना पांडेय और स्थानीय सहयोगियों की पहल से एक खराब हिस्से में राहत जरूर मिली है, लेकिन यह पहल व्यवस्था के लिए आईना भी है। क्योंकि सवाल सिर्फ एक गड्ढे का नहीं है—सवाल यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षित सफर की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?


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