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खड़गवां @ बिहान योजना में ‘लोन बड़ा खेल’ का आरोप

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बरदर क्लस्टर में स्व-सहायता समूहों के नाम पर ऋण निकासी,चुनिंदा सदस्यों के इस्तेमाल की चर्चा,लंबे समय से पदस्थ पीआरपी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,14 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
ग्रामीण गरीब महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की जमीनी कार्यप्रणाली को लेकर जनपद पंचायत खड़गवां के बरदर क्लस्टर में गंभीर सवाल उठ रहे हैं, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्र के कुछ स्व-सहायता समूहों के नाम पर ऋण राशि निकाले जाने के बावजूद सभी पात्र सदस्यों तक उसका वास्तविक लाभ नहीं पहुंचने के आरोप सामने आ रहे हैं,कथित तौर पर कुछ मामलों में समूह के नाम पर निकाली गई राशि का इस्तेमाल चुनिंदा सदस्यों द्वारा किए जाने की चर्चा है, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति विस्तृत दस्तावेजी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है,बिहान योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को समूह के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें स्वरोजगार और आजीविका गतिविधियों से जोड़ना है,ऐसे में यदि समूह के नाम पर ऋण स्वीकृत या निकाला गया हो और उसका लाभ सभी पात्र सदस्यों तक नहीं पहुंचा हो तो यह योजना की मूल भावना के विपरीत माना जाएगा।
समूह के नाम पर लोन, इस्तेमाल चुनिंदा सदस्यों का?
स्व-सहायता समूहों में ऋण वितरण की प्रक्रिया में बैठक,प्रस्ताव,सदस्यों की सहमति और राशि के उपयोग से संबंधित रिकॉर्ड का संधारण महत्वपूर्ण माना जाता है, बरदर क्लस्टर को लेकर सामने आ रही जानकारी में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन समूहों के नाम पर ऋण राशि निकाली गई, क्या वह राशि वास्तव में संबंधित महिला सदस्यों तक पहुंची? यदि समूह के खाते से राशि निकाली गई और उसका लाभ कुछ चुनिंदा सदस्यों तक सीमित रहा,तो इसकी पुष्टि समूह की बैठक पुस्तिका, प्रस्ताव रजिस्टर,बैंक स्टेटमेंट और सदस्यों के व्यक्तिगत खातों की जांच से की जा सकती है, यही दस्तावेज यह भी स्पष्ट कर सकते हैं कि ऋण वितरण के समय समूह के सभी सदस्यों की सहमति ली गई थी या नहीं।
दस साल से एक ही स्थान पर पदस्थ पीआरपी पर सवाल– बरदर क्लस्टर में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ पीआरपी की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं,सूत्रों के अनुसार लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहने के कारण उनकी कार्यप्रणाली की प्रभावी निगरानी नहीं होने की चर्चा है,इतना ही नहीं,सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि उनके अधीन काम करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा विरोध या सवाल उठाए जाने पर काम से हटाने की धमकी दिए जाने की बात सामने आई है, हालांकि इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए किसी व्यक्ति को आरोपों के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं होगा,लेकिन यदि विभाग के सामने इस प्रकार की शिकायतें या सूचनाएं पहुंच रही हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराना जरूरी है।
दस साल का रिकॉर्ड खुल सकता है कई सवालों का जवाब-बरदर क्लस्टर के पिछले दस वर्षों के रिकॉर्ड की जांच की जाए तो ऋण वितरण और समूहों की वास्तविक वित्तीय स्थिति को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है। समूहवार बैंक स्टेटमेंट, ऋण स्वीकृति दस्तावेज,बैठक पुस्तिका,ऋण वितरण रजिस्टर,सदस्यों की उपस्थिति,बैंक खाते से निकासी,ऋण वापसी तथा पीआरपी द्वारा किए गए सत्यापन रिकॉर्ड का मिलान किया जाना चाहिए,सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि कागजों में जिस महिला के नाम पर ऋण दर्ज है,उससे सीधे जानकारी ली जाए कि उसे वास्तव में कितनी राशि मिली और उस राशि का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया,इससे रिकॉर्ड और वास्तविकता के बीच अंतर होने की स्थिति भी सामने आ सकती है।
विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल- मामले में सबसे बड़ा सवाल संबंधित विभागीय अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर है। यदि पीआरपी द्वारा नियमित रूप से समूहों की निगरानी और सत्यापन किया जाता है तो कथित रूप से ऋण वितरण में गड़बड़ी की स्थिति कैसे बनी? क्या अधिकारियों ने समूह की बैठकों में जाकर महिला सदस्यों से सीधे जानकारी ली? क्या बैंक रिकॉर्ड और समूह रजिस्टर का क्रॉस वेरिफिकेशन किया गया? क्या पिछले वर्षों के निरीक्षण की रिपोर्ट तैयार की गई? यदि जांच हुई तो उसके निष्कर्ष क्या रहे? इन सवालों के जवाब मिलने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि निगरानी व्यवस्था वास्तव में जमीनी स्तर पर सक्रिय थी या केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित रही।
पीआरपी की जिम्मेदारी पर भी उठ रहे सवाल
बरदर क्लस्टर में समूहों की गतिविधियों की निगरानी और मैदानी स्तर पर सत्यापन से जुड़ी पीआरपी की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है,यदि ऋण वितरण में कथित अनियमितता हुई है तो यह जानना जरूरी होगा कि उसका भौतिक सत्यापन किस आधार पर किया गया, क्या पीआरपी ने समूह की बैठकों में पहुंचकर महिला सदस्यों से सीधे ऋण वितरण की जानकारी ली? क्या ऋण लेने वाली प्रत्येक महिला से व्यक्तिगत रूप से पूछा गया कि उसे कितनी राशि मिली? क्या बैंक खाते में पहुंची राशि का समूह के रिकॉर्ड में दर्ज राशि से मिलान किया गया? या फिर सत्यापन केवल कार्यालयीन दस्तावेजों तक सीमित रहा? इन सवालों का जवाब दस्तावेजों और मैदानी जांच से ही सामने आ सकता है।
गरीब महिलाओं की योजना में विशेष जांच की मांग
बिहान योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। ऐसे में यदि किसी महिला के नाम पर ऋण निकाला गया हो और उसका वास्तविक लाभ किसी अन्य व्यक्ति को मिला हो तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का विषय हो सकता है,इसीलिए बरदर क्लस्टर के सभी स्व-सहायता समूहों की पिछले दस वर्षों की गतिविधियों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। जांच ऐसे अधिकारी या टीम से कराई जाना अधिक उचित होगा जो स्थानीय व्यवस्था से सीधे जुड़ी न हो, ताकि रिकॉर्ड के साथ-साथ महिला सदस्यों के बयान भी निष्पक्ष रूप से दर्ज किए जा सकें।
जांच में इन रिकॉर्ड की होनी चाहिए पड़ताल
विशेष जांच में पिछले दस वर्षों के समूहवार बैंक स्टेटमेंट,ऋण स्वीकृति एवं वितरण रिकॉर्ड,समूह की बैठक पुस्तिका,प्रस्ताव रजिस्टर,प्रत्येक सदस्य को वितरित ऋण की जानकारी,ऋण वापसी एवं बकाया राशि का विवरण,पीआरपी के निरीक्षण एवं सत्यापन रिकॉर्ड, ग्राम संगठन तथा क्लस्टर स्तर के वित्तीय दस्तावेज और अधिकारियों द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट शामिल की जानी चाहिए, इसके साथ यह भी सामने आना चाहिए कि बरदर क्लस्टर के कितने समूहों ने पिछले दस वर्षों में ऋण लिया और कुल कितनी राशि वितरित हुई।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
बरदर क्लस्टर से सामने आ रहे आरोपों ने बिहान योजना की पारदर्शिता और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है,इसलिए किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराने के बजाय निष्पक्ष जांच जरूरी है,यदि प्रशासन समूहों के बैंक रिकॉर्ड,बैठक पुस्तिका और महिला सदस्यों के बयानों का मिलान कराता है तो वास्तविक स्थिति सामने आने में देर नहीं लगेगी, अब सवाल यही है कि प्रशासन इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए दस वर्षों के रिकॉर्ड की विशेष जांच कराता है या मामला भी अन्य शिकायतों की तरह कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।


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