स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी का जताया आभार,दबुछोला-भुकभुकी से चिरमिरी मार्ग के चौड़ीकरण को भी मिली शासकीय स्वीकृति
-रवि सिंह-
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी,12 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के विकास से जुड़े दो महत्वपूर्ण निर्णय सामने आए हैं, एक ओर क्षेत्र में नवीन उप-पंजीयक कार्यालय की स्थापना की सौगात मिलने से स्थानीय स्तर पर दस्तावेजों के पंजीयन की सुविधा बढ़ने की उम्मीद है,वहीं दूसरी ओर राज्य शासन ने दबुछोला के भुकभुकी से चिरमिरी तक 3.90 किलोमीटर मार्ग के 2-लेन चौड़ीकरण, पुल-पुलिया सहित निर्माण कार्य के लिए 11 करोड़ 84 लाख 86 हजार रुपये की शासकीय स्वीकृति प्रदान की है। यह कार्य वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल है और इसे मद क्रमांक 4126 के तहत स्वीकृति दी गई है।
नवीन उप-पंजीयक कार्यालय की स्थापना को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसे क्षेत्रवासियों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा बताया है,उन्होंने कहा कि नवीन कार्यालय स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर लोगों को दस्तावेजों के पंजीयन कराने में आसानी होगी, उन्होंने इसे भाजपा सरकार के संकल्प और जनता के भरोसे का प्रतीक बताते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तथा वित्त मंत्री ओपी चौधरी के प्रति आभार जताया है। उनके सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा गया है कि यह सौगात स्थानीय लोगों को पंजीयन संबंधी कार्यों के लिए सुविधा प्रदान करेगी। इस पोस्ट को 6 मार्च 2026 को साझा किया गया था।
सड़क के लिए 11.84 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति– इसी बीच लोक निर्माण विभाग से जारी 10 अगस्त 2026 के शासकीय आदेश ने एमसीबी जिले के सड़क अधोसंरचना से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है, शासन ने दबुछोला के भुकभुकी से चिरमिरी तक 3.90 किलोमीटर लंबाई के मार्ग को 2-लेन में चौड़ीकरण तथा पुल-पुलिया सहित निर्माण के लिए 1184.86 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है, दस्तावेज में इसे वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल कार्य और मद क्रमांक 4126 के रूप में दर्ज किया गया है,स्वीकृति आदेश के अनुसार यह राशि वित्त विभाग की सहमति के आधार पर मंजूर की गई है,वित्त विभाग की सहमति से संबंधित ई-फाइल का क्रमांक भी आदेश में दर्ज है और इसी सहमति के आधार पर लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई है,स्वीकृति के साथ शासन ने निर्माण एजेंसी के सामने कई महत्वपूर्ण शर्तें भी रखी हैं,इनमें सबसे पहले सक्षम अधिकारी से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करने के बाद ही निविदा आमंत्रित करने और निर्माण कार्य शुरू करने की बात कही गई है, साथ ही ड्राइंग एवं डिजाइन का सक्षम अधिकारी से अनुमोदन अनिवार्य किया गया है।
गुणवत्ता में कमी मिली तो जिम्मेदारी तय होगी- सड़क और पुल-पुलिया निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी आदेश में सरकार ने जिम्मेदारी तय करने का संकेत दिया है, निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री और पूरे कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, किसी भी स्तर पर गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही गई है,निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करना भी अनिवार्य किया गया है,समय-सीमा में वृद्धि होने की स्थिति में नियमानुसार अर्थदंड लगाने तथा अनावश्यक समय-वृद्धि नहीं करने के निर्देश हैं, केवल अपरिहार्य और नियंत्रण से बाहर के कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी समय-सीमा बढ़ा सकेगा।
लोकहित और वित्तीय अनुशासन की भी शर्त– आदेश में राज्य शासन द्वारा समय-समय पर जारी नियमों एवं निर्देशों के अंतर्गत परियोजना की उपयोगिता का आकलन सुनिश्चित करने तथा प्रस्ताव को लोकहित की मूल भावना के अनुरूप रखने की बात कही गई है, तकनीकी पहलुओं,निर्माण स्थल की उपयुक्तता,गुणवत्ता, अनुमान की सटीकता,समय-सीमा,वित्तीय अनुशासन और लागू नियमों के पालन की जिम्मेदारी संबंधित शासकीय विभाग की होगी, परियोजना का खर्च मांग संख्या/शीर्ष 24/5054-(04)-(337)-0101-(2457) के अंतर्गत न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम क्रमांक 97 के निर्माण कार्य से वहन किया जाना है, आदेश में यह भी निर्देश दिया गया है कि उक्त कार्य की निविदा संबंधी कार्रवाई मुख्य अभियंता कार्यालय में गठित निविदा प्रकोष्ठ के माध्यम से कराई जाए।
90 प्रतिशत बाधारहित भूमि के बाद ही निविदा– सरकारी आदेश में परियोजना के लिए भूमि की उपलब्धता को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है, प्रस्तावित निर्माण कार्य की निविदा तभी की जानी है, जब कम से कम 90 प्रतिशत बाधारहित भूमि उपलब्ध हो,यदि परियोजना में भू-अर्जन प्रस्तावित है तो स्वीकृत राशि की सीमा के भीतर ही नियमानुसार भू-अर्जन पर खर्च किया जा सकेगा, वहीं यदि भू-अर्जन प्रस्तावित नहीं है तो शासकीय भूमि पर ही निर्माण सुनिश्चित करने और सक्षम अधिकारी से भूमि का आवंटन कराने की शर्त रखी गई है,इसका मतलब साफ है कि सड़क निर्माण की प्रक्रिया केवल बजट स्वीकृति तक सीमित नहीं है,बल्कि निर्माण शुरू करने से पहले भूमि संबंधी बाधाओं को दूर करना भी जरूरी होगा।
निविदा में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा पर जोर…– शासन ने निविदा प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं, आदेश में कहा गया है कि निविदा समय-सीमा में की जाए तथा पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो, निविदा में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं,साथ ही उपलब्ध बजट आवंटन की सीमा के भीतर ही खर्च करने और स्वीकृत सीमा से अधिक व्यय नहीं करने को कहा गया है, सरकार ने निर्माण कार्य के अनुमान और कार्य संपादन में मितव्ययिता बरतने की बात भी कही है,यदि निविदा दर 10 प्रतिशत से अधिक प्राप्त होती है अथवा मूल प्रस्ताव में स्वीकृत मात्रा में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होती है,या कोई नया कार्य जोड़ा जाता है, तो उसके कारण अतिरिक्त वित्तीय दायित्व बनने की स्थिति में पुनरीक्षित शासकीय स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा।
मुख्य अभियंता से लेकर कार्यपालन अभियंता तक भेजा गया आदेश– 10 अगस्त 2026 को जारी इस आदेश की प्रतिलिपि संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है,इनमें लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता, सरगुजा परिक्षेत्र अंबिकापुर, अधीक्षण अभियंता अंबिकापुर मंडल तथा कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग, मनेन्द्रगढ़ संभाग शामिल हैं। और गुणवत्ता के साथ होता है।
पंजीयन सुविधा से लेकर सड़क कनेक्टिविटी तक…– एमसीबी जिले के लिए इन दोनों घोषणाओं को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है,नवीन उप-पंजीयक कार्यालय से जहां लोगों को दस्तावेजों के पंजीयन संबंधी कार्यों के लिए सुविधा मिलने की उम्मीद है,वहीं दबुछोला-भुकभुकी से चिरमिरी मार्ग का चौड़ीकरण क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली परियोजना के रूप में सामने आया है,स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने सोशल मीडिया संदेश में उप-पंजीयक कार्यालय की स्थापना को स्थानीय लोगों के लिए सुविधा बढ़ाने वाला कदम बताया है,दूसरी ओर,10 अगस्त को जारी लोक निर्माण विभाग के आदेश ने सड़क परियोजना के लिए वित्तीय स्वीकृति को आधिकारिक रूप दे दिया है, सड़क परियोजना के संबंध में सरकारी दस्तावेज में स्वीकृत राशि 11.8486 करोड़ है और आगे की प्रक्रिया तकनीकी स्वीकृति,भूमि उपलब्धता और निर्धारित निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे बढ़ेगी, यानी एमसीबी में एक तरफ प्रशासनिक सुविधा के विस्तार का दावा है तो दूसरी तरफ सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए बजट का रास्ता खुला है,अब निगाह इस बात पर रहेगी कि कागज पर मिली इन स्वीकृतियों का जमीनी क्रियान्वयन कितनी तेजी,पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ होता है।
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