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अम्बिकापुर@ कलेक्टर निवास के पीछे 12 साल से खड़ा ‘खतरा’, बांस की झुकी डालियां दे रहीं हादसे को न्योता

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बिजली तार से टकराकर सड़क पर गिर चुका है बांस,निगम और बिजली विभाग को कई बार दी गई सूचना,स्थायी समाधान के बजाय हर साल आवेदन का इंतजार
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,09 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
शहर में प्रशासनिक अधिकारियों के आवास के आसपास भी यदि किसी संभावित हादसे को रोकने के लिए वर्षों तक स्थायी कार्रवाई न हो तो आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। कलेक्टर निवास के पीछे स्थित शासकीय आवास परिसर में लगा बांस का पेड़ पिछले करीब 12 वर्षों से परेशानी और संभावित दुर्घटना का कारण बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बांस की डालियां लगातार सड़क और बिजली के तारों की ओर झुकती जा रही हैं, बावजूद इसके अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। सामाजिक कार्यकर्ता वंदना दत्ता निवासी कनकरानी दत्ता मार्ग,(जनपद ऑफिस रोड) अम्बिकापुर ने इस संबंध में चिंता जताते हुए बताया कि बांस की डालियों से दुर्घटना की आशंका लंबे समय से बनी हुई है। उनका कहना है कि पिछले वर्ष बांस की डंगाल बिजली के तार से टकराकर सड़क पर गिर गई थी। उस समय तत्कालीन जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी से संपर्क करने के बाद तत्काल कार्रवाई हुई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
हर साल आवेदन,फिर कार्रवाई-स्थायी समाधान कब? वंदना दत्ता का कहना है कि पिछले कई वर्षों से समस्या सामने आने के बावजूद हर बार आवेदन देकर संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित करना पड़ता है। सवाल यह है कि जब विभागों को समस्या की जानकारी लगातार दी जा रही है तो फिर स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा? उनका आरोप है कि बिजली विभाग बरसात के मौसम में घरों एवं अन्य स्थानों पर पेड़ों की छंटाई करता है, लेकिन बिजली लाइन के बेहद करीब स्थित इस बांस के पेड़ की डालियों को उसी गंभीरता से नहीं हटाया जा रहा है। नगर निगम कार्यालय में भी कई बार सूचना दिए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
व्यस्त मार्ग और स्कूली बच्चों की आवाजाही : सबसे गंभीर चिंता इस बात को लेकर है कि उक्त स्थान के आसपास जरूरतमंद बच्चों का स्कूल संचालित होता है और मार्ग पर लगातार लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में यदि बांस की भारी डालियां दोबारा बिजली तारों से टकराती हैं अथवा सड़क पर गिरती हैं तो बड़ा हादसा हो सकता है। बिजली तार टूटने से करंट फैलने की स्थिति में राहगीरों और स्कूली बच्चों की जान पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर संभावित दुर्घटनाओं को रोकना प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसी हादसे के बाद राहत, जांच और कार्रवाई करने से बेहतर है कि हादसा होने से पहले ही खतरे को खत्म किया जाए।
बड़ा सवाल-जिम्मेदारी किसकी?
मामला केवल एक बांस के पेड़ की छंटाई का नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा है। जब संबंधित विभागों को वर्षों से इसकी जानकारी है और पूर्व में बांस की डंगाल बिजली तार से टकराकर सड़क पर गिर भी चुकी है, तो इसके बावजूद स्थायी व्यवस्था नहीं होना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब जरूरत इस बात की है कि नगर निगम और बिजली विभाग संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कर बांस के पेड़ एवं बिजली लाइन की स्थिति का तकनीकी आकलन करें और आवश्यकतानुसार छंटाई अथवा सुरक्षित तरीके से पेड़ हटाने की कार्रवाई करें। सामाजिक कार्यकर्ता वंदना दत्ता ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए अतिशीघ्र स्थायी समाधान किया जाए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने की नौबत न आए।


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