Breaking News

कोरिया/सूरजपुर@कोरिया में फरार आरोपियों पर पुलिस की कार्रवाई का अलग-अलग पैमाना?

Share

  • नौगई तिहरे हत्याकांड में 12 गिरफ्तारियों के बाद भी कुछ आरोपी फरार,जांच सीबीआई के हाथ पहुंची
  • बैकुंठपुर नाबालिग छात्रा आत्महत्या मामले में दो फरार आरोपियों पर इनाम 5 हजार से बढ़ाकर 10 हजार और संपत्ति कुर्की की तैयारी… सूरजपुर के जमीन फर्जीवाड़े में तहसीलदार संजय राठौर की अग्रिम जमानत खारिज,अब गिरफ्तारी का इंतजार…
  • सवाल किसी एक मामले की कार्रवाई पर नहीं,बल्कि गंभीर अपराधों में पुलिस द्वारा अपनाए जा रहे समान मानदंड पर है—क्या
  • हर फरार आरोपी के लिए पुलिस के पास एक जैसी रणनीति है?
  • -रवि सिंह-
  • कोरिया/सूरजपुर,09 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून की सबसे बड़ी ताकत उसकी समानता मानी जाती है,अपराध की गंभीरता चाहे जितनी हो,आरोपी कितना प्रभावशाली हो या सामान्य व्यक्ति, कानून की प्रक्रिया सभी के लिए एक समान होनी चाहिए,इसी सिद्धांत के आधार पर पुलिस की कार्रवाई भी देखी जाती है,लेकिन कोरिया जिले में सामने आए तीन अलग-अलग मामलों को यदि क्रमवार देखा जाए तो पुलिस की कार्रवाई के तरीके को लेकर कई सवाल स्वाभाविक रूप से सामने आते हैं।
  • एक तरफ नौगई तिहरे हत्याकांड जैसा जघन्य मामला है,जिसमें पुलिस की जांच के दौरान 12 लोगों की गिरफ्तारी हुई, लेकिन कुछ आरोपी फरार बताए जाते रहे और जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई,दूसरी तरफ बैकुंठपुर में नाबालिग छात्रा की आत्महत्या से जुड़े मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद फरार दो आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने पहले 5 हजार का इनाम घोषित किया और अब इसे बढ़ाकर 10 हजार कर दिया है,साथ ही फरार आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की बात भी सामने आई है,तीसरा मामला तत्कालीन भैयाथान तहसीलदार संजय राठौर से जुड़ा है,सूरजपुर जिले में पदस्थ रहते हुए जीवित महिला को मृत बताकर जमीन के नामांतरण और उसके बाद जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में उनके खिलाफ अपराध दर्ज हुआ,मामले में अग्रिम जमानत की याचिका भी खारिज हो चुकी है, अब सवाल यह है कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए किस स्तर की कार्रवाई करती है,यहां सवाल किसी आरोपी को बचाने या किसी आरोपी को दोषी साबित करने का नहीं है,सवाल केवल इतना है कि यदि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस की प्राथमिकता है,तो क्या यह प्राथमिकता सभी गंभीर मामलों में समान रूप से दिखाई देती है?
  • नौगई तिहरा हत्याकांड…12 गिरफ्तारियां,लेकिन क्या कहानी यहीं खत्म हो गई?
  • कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र का नौगई तिहरा हत्याकांड ऐसा मामला रहा जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया,घटना की भयावहता को देखते हुए पुलिस पर शुरू से ही दबाव था कि सभी आरोपियों तक पहुंचा जाए और मामले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाए,पुलिस की जांच के दौरान 12 लोगों की गिरफ्तारी हुई, यह पुलिस की कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा था,लेकिन इसके बावजूद मामले में कुछ लोगों के फरार होने की बात सामने आती रही, स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर यह भी चर्चा रही कि घटना में शामिल लोगों की संख्या 12 से अधिक हो सकती है, सूत्रों के हवाले से 15 से 16 लोगों तक के शामिल होने की बात कही जाती रही है,हालांकि इस संख्या को आधिकारिक रूप से तभी अंतिम माना जा सकता है जब जांच एजेंसी के रिकॉर्ड में इसकी पुष्टि हो,यही कारण है कि नौगई मामले में सबसे बड़ा सवाल केवल गिरफ्तार आरोपियों की संख्या का नहीं, बल्कि फरार बताए जा रहे आरोपियों की स्थिति का है,जब जांच पुलिस के हाथ में थी,तब स्वाभाविक रूप से यह उम्मीद थी कि पुलिस सभी आरोपियों को पकड़ने के लिए अधिकतम प्रयास करेगी,लेकिन जांच सीबीआई को सौंपे जाने तक भी सभी आरोपियों के पकड़े जाने की बात सामने नहीं आई।
  • 5 हजार का इनाम बढ़ाकर 10 हजार
  • कोरिया पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि बैकुंठपुर थाना अपराध क्रमांक 214/2026 में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पहले 5 हजार का इनाम घोषित किया गया था, अब पुलिस अधीक्षक,जिला कोरिया ने इस इनाम राशि को बढ़ाकर 10 हजार कर दिया, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फरार आरोपियों के बारे में महत्वपूर्ण एवं विश्वसनीय सूचना देने वाले व्यक्ति को 10 हजार की इनाम राशि दी जाएगी और सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी,अर्थात पुलिस ने इस मामले में फरार आरोपियों की तलाश को लेकर सार्वजनिक रूप से दबाव बढ़ाया है, यह कार्रवाई अपने आप में गलत नहीं,बल्कि कानून के तहत आरोपी की गिरफ्तारी के लिए उठाया गया एक कदम है,सवाल केवल यह है कि इसी प्रकार की रणनीति अन्य गंभीर मामलों में क्यों नहीं दिखाई देती?
  • इनाम के साथ संपत्ति कुर्की की कार्रवाई का संकेत
  • बैकुंठपुर मामले में पुलिस ने केवल इनाम राशि बढ़ाने तक बात सीमित नहीं रखी,फरार आरोपियों की अचल संपत्तियों के संबंध में कुर्की की कार्रवाई की बात भी सामने आई है, यदि कोई आरोपी लगातार फरार है और कानून के तहत उसके विरुद्ध संपत्ति संबंधी कार्रवाई की स्थिति बनती है तो यह गिरफ्तारी के लिए दबाव बनाने का प्रभावी माध्यम हो सकता है, लेकिन अब यही बात नौगई मामले से तुलना को जन्म देती है,नौगई में भी कुछ आरोपी फरार बताए जाते रहे, वह मामला तीन लोगों की हत्या से जुड़ा था, पुलिस के हाथ में रहते हुए 12 गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन सभी आरोपियों तक पहुंचने की बात सामने नहीं आई, तो फिर सवाल है—क्या उस मामले में फरार आरोपियों पर इसी प्रकार इनाम बढ़ाने और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दी?
  • तीसरा मामला—तहसीलदार संजय राठौर का जमीन फर्जीवाड़ा
  • अब तीसरा मामला पुलिस के लिए अलग तरह की चुनौती है,सूरजपुर जिले के भैयाथान में तहसीलदार के पद पर रहते हुए संजय कुमार राठौर पर आरोप लगा कि एक जीवित महिला को मृत दर्शाकर उसकी जमीन से संबंधित राजस्व प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा किया गया,आरोप केवल इतना नहीं है कि राजस्व रिकॉर्ड में महिला को मृत बताया गया,बल्कि शिकायत में यह भी आरोप सामने आया कि इसके बाद जमीन के हिस्से का संबंध तहसीलदार की पत्नी के नाम से हुए जमीन लेन-देन से जुड़ता है,इस मामले में लंबे समय तक शिकायत, जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया चली। अंततः सूरजपुर जिले में अपराध दर्ज हुआ, यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मामला सूरजपुर जिले का है, लेकिन संजय राठौर बाद में कोरिया जिले में पदस्थ रहे और वर्तमान प्रकरण को लेकर उनकी गिरफ्तारी का सवाल अब कोरिया और सूरजपुर दोनों जिलों की पुलिस व्यवस्था से जुड़ता दिखाई देता है।
  • एफआईआर के बाद अग्रिम जमानत,लेकिन न्यायालय से राहत नहीं– एफआईआर सामने आने के बाद संजय राठौर ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत का सहारा लिया,लेकिन उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है,इसका अर्थ यह नहीं है कि वे न्यायालय द्वारा दोषी घोषित किए जा चुके हैं,अपराध सिद्ध होना और जमानत का प्रश्न दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं, लेकिन अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब पुलिस के सामने उनकी गिरफ्तारी और जांच को आगे बढ़ाने का प्रश्न जरूर खड़ा है, यहीं इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है—क्या पुलिस उसी तत्परता से तहसीलदार संजय राठौर को गिरफ्तार करेगी, जिस तत्परता से बैकुंठपुर मामले के फरार आरोपियों को पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है?
  • क्या कानून की धाराएं ही कार्रवाई की गति तय करती हैं या आरोपी की स्थिति भी-पुलिस की कार्रवाई अपराध की प्रकृति, साक्ष्य,आरोपी की भूमिका,न्यायालय के आदेश और जांच की परिस्थितियों के आधार पर अलग हो सकती है,इसलिए केवल अलग-अलग कार्रवाई को देखकर तुरंत दोहरे मापदंड का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन जनता यह जरूर पूछ सकती है कि यदि पुलिस के पास फरार आरोपी को पकड़ने के लिए इनाम, सार्वजनिक अपील और संपत्ति कुर्की जैसे उपाय हैं,तो इन उपायों का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया जाता है? क्या इसके लिए कोई लिखित नीति है? क्या गंभीर अपराधों में फरार आरोपियों की सूची बनाकर उनकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग स्तर की कार्रवाई तय होती है? क्या पुलिस अधीक्षक स्तर पर ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा होती है? और यदि होती है तो नौगई जैसे मामले में फरार आरोपियों की वर्तमान स्थिति क्या है?
  • पीडि़त परिवारों के लिए न्याय का मतलब केवल एफआईआर नहीं-किसी भी गंभीर अपराध में पीडि़त परिवार के लिए एफआईआर दर्ज होना पहला कदम है, इसके बाद आरोपी की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच, साक्ष्य का संरक्षण और न्यायालय में मजबूत अभियोजन—ये सभी चरण महत्वपूर्ण होते हैं, नौगई के पीडि़त परिवार ने न्याय की मांग को लेकर लगातार आवाज उठाई। मामला अंततः सीबीआई जांच तक पहुंचा, बैकुंठपुर मामले में भी परिवार और समाज न्याय की अपेक्षा कर रहा है, ऐसे में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस द्वारा दबाव बढ़ाना जरूरी कदम है, इसी तरह संजय राठौर मामले में जमीन से जुड़े शिकायतकर्ता भी न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं, इसलिए किसी भी मामले में पुलिस की कार्रवाई का अंतिम मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि एफआईआर दर्ज हुई या नहीं, बल्कि यह देखना होगा कि एफआईआर के बाद पुलिस ने कितनी प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई की।
  • पुलिस के लिए चुनौती—समान कार्रवाई का भरोसा कैसे कायम होगा?- कोरिया जिले में अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल फरार आरोपियों को पकड़ना नहीं, बल्कि यह भरोसा कायम करना भी है कि कानून सभी के लिए समान है, यदि बैकुंठपुर मामले में पुलिस फरार आरोपियों पर इनाम बढ़ा सकती है,संपत्ति कुर्की की कार्रवाई कर सकती है और जनता से सूचना मांग सकती है तो जनता यह जानना चाहेगी कि नौगई के फरार आरोपियों के लिए क्या रणनीति है, और यदि अग्रिम जमानत खारिज हो चुके तहसीलदार की गिरफ्तारी में कोई कानूनी बाधा नहीं है तो पुलिस को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि गिरफ्तारी की कार्रवाई किस स्तर पर है।
  • यह सवाल पुलिस के खिलाफ आरोप नहीं,कार्रवाई की पारदर्शिता की मांग है- पूरे मामले को इस रूप में देखना अधिक उचित होगा कि सवाल पुलिस की नीयत पर सीधे आरोप लगाने का नहीं, बल्कि पुलिस की कार्रवाई में दिखाई देने वाली समानता और पारदर्शिता का है, क्योंकि बैकुंठपुर मामले में पुलिस की सक्रियता दिखाई दे रही है और यह स्वागत योग्य है, फरार आरोपियों पर दबाव बनाना और उन्हें गिरफ्तार करना कानून व्यवस्था की दृष्टि से जरूरी है, लेकिन यही सक्रियता यदि नौगई के फरार आरोपियों और संजय राठौर जैसे मामलों में भी समान रूप से दिखाई देती है तो इससे पुलिस की निष्पक्षता पर जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
  • सीबीआई को जांच सौंपे जाने के बाद बदला जांच का स्वरूप
  • नौगई मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई,इसका अर्थ यह हुआ कि मामले की जांच की मुख्य जिम्मेदारी केंद्रीय जांच एजेंसी के पास चली गई,लेकिन इससे एक पुराना सवाल खत्म नहीं होता,जब तक जांच पुलिस के पास थी,तब तक फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने क्या-क्या किया? क्या उनके संभावित ठिकानों पर विशेष दबिश दी गई? क्या उनके विरुद्ध इनाम घोषित करने पर विचार हुआ? क्या उनकी संपत्तियों के संबंध में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई? क्या फरार आरोपियों को सार्वजनिक रूप से तलाशने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया? इन सवालों के जवाब जनता के सामने स्पष्ट रूप से आने चाहिए, क्योंकि यही तुलना अब बैकुंठपुर मामले के साथ की जा रही है।
  • बैकुंठपुर नाबालिग छात्रा आत्महत्या मामला
  • फरार आरोपियों पर बढ़ता पुलिस दबाव-जुलाई 2026 में बैकुंठपुर में एक नाबालिग छात्रा से जुड़ी घटना सामने आई, जानकारी के अनुसार छात्रा एक दुकान पर कुछ सामान लेने गई थी,वहां चोरी की घटना हुई,इसके बाद वह घर लौटी और करीब 18 घंटे बाद आत्महत्या कर ली, घटना के बाद मामला गंभीर रूप ले गया,पुलिस ने दुकान संचालक सहित आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया। मामले में मुख्य आरोपी गिरफ्तार हो चुका है,जबकि जगत कुमार वेद और दीपक वेद फरार बताए जा रहे हैं,यहीं पुलिस की कार्रवाई का वह स्वरूप सामने आया है जिसने पूरे मामले को दूसरी दिशा में चर्चा का विषय बना दिया।
  • तहसीलदार कोई सामान्य आरोपी नहीं-इसीलिए सवाल और गंभीर
  • संजय राठौर का मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वे प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं, यदि किसी सामान्य नागरिक के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज हो और उसकी अग्रिम जमानत खारिज हो जाए तो पुलिस से उसकी गिरफ्तारी की अपेक्षा स्वाभाविक है,फिर यदि आरोपी प्रशासनिक पद पर रहा हो तो कानून के सामने उसकी स्थिति अलग नहीं होनी चाहिए,बल्कि प्रशासनिक पद पर रहे व्यक्ति के मामले में तो जांच और भी अधिक पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि जनता के बीच यह संदेश जाए कि पद और प्रभाव कानून से ऊपर नहीं हैं।
  • तीनों मामलों को एक साथ देखने पर उठता
  • है बड़ा सवाल,अब इन तीनों घटनाओं को क्रमवार रखिए
  • नौगई तिहरा हत्याकांड-12 गिरफ्तारियां हुईं, कुछ आरोपी फरार बताए गए। पुलिस के हाथ में जांच रहने के दौरान सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी, बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
  • बैकुंठपुर नाबालिग छात्रा आत्महत्या मामला-मुख्य आरोपी गिरफ्तार, दो आरोपी फरार, पहले 5 हजार इनाम, बाद में बढ़ाकर 10 हजार,संपत्ति कुर्की की कार्रवाई की बात।
  • संजय राठौर जमीन फर्जीवाड़ा-सूरजपुर में एफआईआर, आरोपी प्रशासनिक अधिकारी रह चुके,अग्रिम जमानत की याचिका खारिज। अब गिरफ्तारी की प्रतीक्षा, तीनों मामलों की परिस्थितियां निश्चित रूप से अलग हैं, लेकिन फरार आरोपी की गिरफ्तारी तीनों में एक साझा बिंदु है, और इसी साझा बिंदु पर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
  • अब तीनों मामलों में पुलिस से अपेक्षित जवाब
  • पहला-नौगई तिहरा हत्याकांड में अब तक कितने आरोपी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए क्या कार्रवाई हुई?
  • दूसरा-क्या फरार आरोपियों के खिलाफ इनाम या संपत्ति कुर्की जैसी कार्रवाई प्रस्तावित की गई थी? यदि नहीं, तो क्यों?
  • तीसरा-बैकुंठपुर मामले में ?10 हजार इनाम बढ़ाने के बाद फरार दोनों आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की अगली कार्रवाई क्या है?
  • चौथा-संजय राठौर की अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद उनकी गिरफ्तारी के लिए सूरजपुर पुलिस और कोरिया पुलिस के बीच क्या समन्वय है?
  • पांचवां-क्या प्रशासनिक पद पर रहे आरोपी के मामले में भी वही प्रक्रिया अपनाई जाएगी जो किसी अन्य फरार आरोपी के लिए अपनाई जाती है?
  • अंतिम सवाल—क्या कानून सचमुच सबके लिए बराबर है?
  • कोरिया जिले के इन तीन मामलों की तुलना किसी निष्कर्ष को पहले से तय करने के लिए नहीं,बल्कि एक जरूरी सवाल उठाने के लिए है,यदि कानून सबके लिए बराबर है तो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की रणनीति भी पारदर्शी और तर्कसंगत होनी चाहिए,नौगई तिहरा हत्याकांड में जिन आरोपियों के फरार होने की बात सामने आती रही, उनके खिलाफ कार्रवाई का विवरण जनता को मिलना चाहिए,बैकुंठपुर मामले में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए बढ़ाया गया इनाम और प्रस्तावित कानूनी कार्रवाई अपने परिणाम तक पहुंचनी चाहिए,वहीं संजय राठौर मामले में अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद पुलिस की अगली कार्रवाई अब पूरे मामले की दिशा तय करेगी, कहीं ऐसा तो नहीं कि पुलिस की कार्रवाई अपराध की गंभीरता से अधिक मामले की परिस्थितियों के अनुसार बदलती दिखाई दे रही है? या फिर हर मामले में अलग-अलग कानूनी और जांच संबंधी परिस्थितियां हैं, जिन्हें पुलिस के पास मौजूद रिकॉर्ड ही स्पष्ट कर सकता है? इसका जवाब पुलिस को देना चाहिए,क्योंकि अंततः सवाल जगत वेद, दीपक वेद,नौगई के फरार आरोपियों या संजय राठौर में से किसी एक व्यक्ति का नहीं है,सवाल यह है कि जिस कानून के भरोसे पीडि़त परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं,उस कानून को लागू करने वाली पुलिस की कार्रवाई क्या सभी मामलों में समान दिखाई देती है? और यदि पुलिस का जवाब है कि कानून सभी के लिए बराबर है, तो अब जरूरत केवल बयान की नहीं, बल्कि कार्रवाई में उस समानता को दिखाने की है।

Share

Check Also

GHATATI-GHATANA PAPER PDF 10 AUGUST 2026

Share 10 AUGUST 2026 AMBIKAPUR GG NEWS PAPER1 11Download Share

Leave a Reply