रांची,09 अगस्त 2026 । झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) में कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच रविवार को बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया। आयोग के तीन मौजूदा सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनिमा हांसदा ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने तीनों के त्यागपत्र तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिए हैं। तीनों सदस्यों का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है, जब राज्य की अपराध अनुसंधान शाखा (सीआईडी) कथित परीक्षा अनियमितताओं के मामले में उनसे पूछताछ करने वाली थी। सीआईडी ने तीनों सदस्यों को सोमवार को पूछताछ के लिए तलब किया था। पूछताछ से ठीक एक दिन पहले तीनों ने राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। इन इस्तीफों को जेपीएससी की परीक्षाओं में कथित लापरवाही और अनियमितताओं को लेकर चल रही जांच के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, सदस्यों के इस्तीफे के पीछे उनके व्यक्तिगत कारणों अथवा जांच से संबंधित कोई प्रत्यक्ष कारण है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। छात्र प्रतिनिधियों के साथ तीसरे दौर की वार्ता के बाद झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सरकार के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर 14वीं जेपीएससी और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आपराधिक पहलुओं की जांच सीआईडी से कराने का निर्णय लिया गया है। मंत्री के अनुसार, इन मामलों से जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा। सरकार ने यह भी तय किया है कि आरोपियों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर त्वरित न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था में आवश्यक सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का भी निर्णय लिया है। इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-भारतीय खनन विद्यालय, धनबाद (आईआईटी-आईएसएम), भारतीय प्रबंधन संस्थान रांची और जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, जमशेदपुर (एक्सएलआरआई) के विशेषज्ञों को शामिल किए जाने की बात कही गई है। सरकार का कहना है कि विशेषज्ञों की मदद से परीक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार किए जाएंगे और भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी तथा विश्वसनीय बनाने का प्रयास किया जाएगा। वार्ता के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने संयुक्त स्नातक स्तर (सीजीएल) परीक्षा को रद्द करने की मांग भी रखी। हालांकि, सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। सरकार की ओर से कहा गया कि यह परीक्षा उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आयोजित की गई है, इसलिए इसे रद्द करने का निर्णय नहीं लिया जा सकता। इस मुद्दे पर सरकार और छात्रों के बीच मतभेद बना हुआ है। सरकार ने कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच की निगरानी के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा था। हालांकि, छात्र प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
छात्र लगातार मांग कर रहे हैं कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
जेपीएससी के तीन सदस्यों का एक साथ इस्तीफा ऐसे समय हुआ है, जब भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। सरकार और छात्रों के बीच लगातार बातचीत के बावजूद कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी सहमति नहीं बन पाई है।
एक ओर सरकार जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के कदम उठाने की बात कह रही है, वहीं छात्र जांच की स्वतंत्रता और कुछ परीक्षाओं को रद्द करने सहित अपनी प्रमुख मांगों पर कायम हैं। तीन सदस्यों के इस्तीफे और आगामी जांच के बीच अब जेपीएससी की कार्यप्रणाली और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर चल रहा विवाद और महत्वपूर्ण हो गया है।
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