पूर्व विधायक बोले…महंगाई और बढ़े बिजली बिल के बीच ग्रामीणों पर एक और आर्थिक बोझ क्यों पंचायत सचिवों पर कार्रवाई की चेतावनी को लेकर भी उठाए सवाल
-रवि सिंह-
एमसीबी,08 अगस्त 2026(घटती-घटना)। जिले की ग्राम पंचायतों में भवन/मकान कर की प्रस्तावित वसूली को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है,जिला पंचायत के निर्देशों के अनुसार जिले की तीनों जनपद पंचायतों के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में भवन/मकान कर की वसूली किए जाने की बात सामने आने के बाद पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। बताया जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 1200 वार्षिक यानी 100 प्रतिमाह भवन/मकान कर की वसूली की बात सामने आई है,इसी मुद्दे को लेकर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सवाल उठाया है कि जब ग्रामीण जनता पहले से महंगाई, बिजली बिल और रोजगार से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रही है,तब उसके ऊपर अतिरिक्त कर का बोझ क्यों डाला जा रहा है, हालांकि,कर की वास्तविक दर,लागू होने का दायरा,किन भवनों पर यह कर देय होगा और किस-किस श्रेणी को इससे छूट मिलेगी, इन बिंदुओं पर संबंधित पंचायत एवं प्रशासनिक स्तर से स्पष्ट जानकारी सामने आना अभी बाकी है। इसलिए राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ इस कर की वैधानिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाना भी महत्वपूर्ण हो गया है।
डबल इंजन सरकार ग्रामीणों की जेब पर भी डालेगी अतिरिक्त बोझ-पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ग्रामीण जनता पहले ही महंगाई और बढ़े हुए बिजली बिलों से परेशान है, ऐसे समय में मकान कर के रूप में नया आर्थिक बोझ डालने की तैयारी की जा रही है,उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या डबल इंजन सरकार अब महंगाई और बढ़े हुए बिजली बिल के बाद ग्रामीणों से संपत्ति कर वसूलकर उनकी जेब पर एक और हमला करने जा रही है? कमरो का कहना है कि गांवों में रहने वाला गरीब,किसान,मजदूर और राशन कार्डधारी परिवार सीमित आय में अपने दैनिक खर्च पूरे करता है,ऐसे परिवारों पर अतिरिक्त कर लगाया जाता है तो उनके घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ सकता है।
किस कानूनी प्रावधान के तहत लगेगा 1200 सालाना कर- पूर्व विधायक ने सबसे महत्वपूर्ण सवाल कर की वैधानिकता और उसके दायरे को लेकर उठाया है, उनका कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि 1200 वार्षिक भवन/मकान कर किस कानूनी प्रावधान के तहत वसूला जाएगा, इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किन भवनों पर यह कर लागू होगा? क्या सभी ग्रामीण परिवारों से समान दर से वसूली होगी? गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए कोई छूट होगी या नहीं? कच्चे और पक्के मकानों के लिए अलग-अलग व्यवस्था होगी या नहीं? कर निर्धारण का आधार क्या होगा? पंचायतों को प्राप्त राशि का उपयोग किन कार्यों में किया जाएगा? वसूली की प्रक्रिया और शिकायत निवारण की व्यवस्था क्या होगी? इन सवालों पर स्पष्ट जानकारी मिलने के बाद ही ग्रामीणों को कर व्यवस्था की वास्तविक स्थिति समझ में आ सकेगी।
महंगाई के बीच नए कर को लेकर विरोध– पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियां जनहित के बजाय जनविरोधी साबित हो रही हैं,उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार पहले से ही बढ़ती महंगाई और बिजली खर्च से प्रभावित हैं,उनका कहना है कि सरकार को ग्रामीण परिवारों पर नया आर्थिक भार डालने के बजाय उन्हें राहत देने की दिशा में कदम उठाना चाहिए,खासकर गरीब और निम्न आय वाले परिवारों के लिए किसी भी नए कर की व्यवस्था लागू करने से पहले उसके सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव का आकलन किया जाना चाहिए।
पंचायत सचिवों पर दबाव का भी आरोप- भवन/मकान कर की वसूली को लेकर ग्राम पंचायत सचिवों पर कथित रूप से बनाए जा रहे दबाव को लेकर भी गुलाब कमरो ने सवाल उठाया है,उन्होंने कहा कि यदि कर वसूली निर्धारित स्तर तक नहीं होने पर सचिवों का वेतन रोकने अथवा उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है,तो इससे पंचायत स्तर पर कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बनेगा,कमरो ने सरकार से सवाल किया कि यदि कर वसूली अनिवार्य है तो सबसे पहले ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों को इसके संबंध में स्पष्ट नियम एवं प्रक्रिया की जानकारी क्यों नहीं दी जाती।
पंचायतों की आय बढ़ाने और ग्रामीणों पर बोझ के बीच संतुलन जरूरी– ग्राम पंचायतों के लिए स्थानीय स्तर पर राजस्व प्राप्त करना विकास कार्यों और स्थानीय प्रशासन के संचालन के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है,लेकिन राजनीतिक विवाद इस बात को लेकर है कि राजस्व जुटाने की व्यवस्था का आर्थिक भार ग्रामीण परिवारों पर कितना पड़ेगा, ऐसे में सरकार और पंचायत प्रशासन के सामने चुनौती यह होगी कि स्थानीय निकायों की आय बढ़ाने के साथ-साथ गरीब एवं कमजोर परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव न पड़े,यदि मकान कर लागू किया जाना है तो उसकी दर,नियम,छूट,वसूली प्रक्रिया और प्राप्त राशि के उपयोग की जानकारी सार्वजनिक किए जाने से विवाद को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
महंगाई की मार…ऊपर से नया करः कमरो– गुलाब कमरो ने सरकार से मांग की कि ग्रामीण जनता पर प्रस्तावित अतिरिक्त आर्थिक बोझ पर पुनर्विचार किया जाए,उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की कर वसूली शुरू करने से पहले ग्राम पंचायत स्तर पर लोगों को इसकी पूरी जानकारी दी जानी चाहिए और व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए,उन्होंने कहा कि‘महंगाई की मार,ऊपर से नया कर—ग्रामीण जनता पर आर्थिक प्रहार बंद करो,अब इस मुद्दे पर प्रशासन की ओर से कर की वास्तविक व्यवस्था,कानूनी आधार,लागू होने की तिथि,दर,छूट तथा पंचायतों को मिलने वाले राजस्व के उपयोग को लेकर क्या स्पष्टीकरण आता है, इस पर ग्रामीणों के साथ-साथ राजनीतिक दलों की भी नजर बनी हुई है।
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