नई दिल्ली,31 जुलाई 2026। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान नौकरी का झांसा देकर रूस भेजे गए और बाद में युद्ध क्षेत्र में पहुंचा दिए गए भारतीय नागरिकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अहम निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा…‘विदेश मंत्रालय में एक समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो पीडि़त परिवारों से सीधे संपर्क में रहेगा।’ अदालत ने कहा कि युद्ध में मारे गए,घायल या लापता भारतीयों के परिजन पहले से ही मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं, इसलिए सरकार उनकी हरसंभव सहायता सुनिश्चित करे। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत,न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने निर्देश दिया कि‘युद्ध में मारे गए भारतीयों की पहचान के लिए डीएनए सैंपल का मिलान कराया जाएगा।’ साथ ही‘नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास के समक्ष मुआवजा क्लेम दाखिल कराने में विदेश मंत्रालय परिवारों की मदद करेगा।’ अदालत ने यह भी कहा कि ‘पीडि़त परिवारों को सभी जरूरी जानकारी और प्रक्रियाएं उनकी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराई जाएंगी। ‘
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