रेबीज के लक्षण आने के बाद बीमारी लगभग 100 फीसदी घातक,समय पर वैक्सीन से टल सकती है मौत
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,27 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। कुत्ते या किसी संदिग्ध पशु के काटने के बाद कई लोग पहले घरेलू उपचार या झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं। रेबीज के मामले में यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। पशुधन विकास विभाग ने अपील की है कि पशु के काटने या खरोंचने पर घाव को तत्काल साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं और बिना देरी किए अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लें। पशुधन विकास विभाग के अतिरिक्त उप संचालक डॉ. सीके मिश्रा के अनुसार रेबीज संक्रमित पशु की लार से फैलने वाला वायरल एवं जूनोटिक रोग है। इसका सबसे अधिक खतरा संक्रमित कुत्ते के काटने या खरोंचने से रहता है। सियार, लोमड़ी, बिल्ली सहित अन्य संक्रमित स्तनधारी पशुओं के संपर्क से भी संक्रमण हो सकता है। बीमारी के लक्षण शुरू होने के बाद रेबीज लगभग 100 प्रतिशत घातक होती है, लेकिन समय पर उपचार से इसकी रोकथाम संभव है।
मिर्च-चूना या तेल न लगाएं : पशु के काटने के बाद घाव पर मिर्च, चूना, तेल, मिट्टी, पौधों का रस या कोई अन्य घरेलू पदार्थ नहीं लगाना चाहिए। घाव धोने के बाद तत्काल स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। जरूरत के अनुसार चिकित्सक रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन (आरआईजी) देने का निर्णय लेते हैं।
पालतू कुत्तों का टीकाकरण भी जरूरी : विभाग ने पालतू कुत्तों सहित जोखिम वाले पशुओं का नियमित एंटी-रेबीज टीकाकरण कराने पर जोर दिया है। समय पर बूस्टर डोज भी कराया जाना चाहिए। बड़े स्तर पर कुत्तों का टीकाकरण मानव रेबीज की रोकथाम की प्रमुख रणनीतियों में शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में हर वर्ष करीब 59 हजार लोगों की रेबीज से मौत होती है। इनमें लगभग 40 प्रतिशत बच्चे 15 वर्ष से कम उम्र के होते हैं। 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम ‘स्ट्रॉन्गर टुगेदर’ है, जिसमें मानव और पशु स्वास्थ्य से जुड़े विभागों तथा समुदाय के समन्वय पर जोर दिया गया है।
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