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अम्बिकापुर@ पुलिस वाहन चालक और उसकी पत्नी पर धोखाधड़ी का केस…

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डीजीपी के आदेश के बाद दर्ज हुई एफआईआर,पीडि़ता का दावा- कई अन्य लोग भी बने शिकार
-संवाददाता-
अम्बिकापुर 07 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
सरगुजा पुलिस में पदस्थ एक आरक्षक और उसकी पत्नी पर 30 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि पुलिस विभाग में वाहन चालक के रूप में पदस्थ आरक्षक ने अपनी सरकारी पहचान और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए एक महिला से जमीन खरीदने और पीडब्ल्यूडी के लंबित भुगतान का झांसा देकर 30 लाख रुपये उधार लिए। रकम लौटाने के नाम पर दिए गए दो चेक भी बैंक से बाउंस हो गए। शिकायत के बाद डीजीपी के निर्देश पर मामला दर्ज किया गया है। मामले के अनुसार पटपरिया (गांधीनगर) निवासी अनुपमा सिंह, जो ‘अनुपमा मेक ओवर’ नाम से ब्यूटी पार्लर संचालित करती हैं, ने शिकायत में बताया कि वर्ष 2023 में उनकी पहचान आरक्षक प्रवीण प्रताप सिंह और उसकी पत्नी अलका प्रताप सिंह से थी। दोनों ने विश्वास में लेकर कहा कि जमीन खरीदने के लिए तत्काल पैसों की जरूरत है। साथ ही यह भी दावा किया कि पीडब्ल्यूडी मुख्यालय रायपुर से 75 लाख रुपये का भुगतान जल्द मिलने वाला है, जिसके बाद पूरी राशि लौटा दी जाएगी। इसी भरोसे में आकर पीडि़ता ने 11 जुलाई से 30 जुलाई 2023 के बीच अलग-अलग किश्तों में कुल 30 लाख रुपये आरोपियों को दे दिए।
10 लाख लौटाए,20 लाख के बदले दिए दो चेक… दोनों हुए बाउंस…
शिकायत के अनुसार लंबे समय तक टालमटोल के बाद आरोपियों ने मार्च 2025 तक केवल 10 लाख रुपये लौटाए। शेष 20 लाख रुपये के एवज में 10-10 लाख रुपये के दो चेक दिए गए, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर दोनों चेक अनादृत (डिशऑनर) हो गए। पीडि़ता का आरोप है कि कानूनी नोटिस भेजने के बाद आरोपियों ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया और पुलिस विभाग में अपनी पकड़ का हवाला देते हुए झूठे मामलों में फंसाने तथा जान से मारने की धमकी भी दी।
अन्य लोगों से भी करोड़ों नहीं, लाखों की ठगी के आरोप : शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपियों ने कथित रूप से शहर के अन्य लोगों से भी इसी तरह रकम ली। पीडि़ता ने दावा किया है कि मृत्युंजय गुप्ता से 10 लाख रुपये, विवेक तिवारी से 4.30 लाख रुपये तथा जनजीत सिंह से 4.50 लाख रुपये भी इसी प्रकार लिए गए। हालांकि इन मामलों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
डीजीपी के निर्देश के बाद दर्ज हुई एफआईआर : पीडि़ता की शिकायत पर डीजीपी के निर्देश के बाद थाना अंबिकापुर देहात (गांधीनगर) में एफआईआर क्रमांक 0424/2026 दर्ज की गई है। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। मामले की विवेचना सहायक उपनिरीक्षक बीरेंद्र कुजुर कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल
यह मामला केवल आर्थिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि यदि शिकायत के अनुसार एक पुलिसकर्मी अपनी सरकारी पहचान और प्रभाव का उपयोग कर लोगों का विश्वास जीतकर रकम लेता है, तो ऐसी गतिविधियां लंबे समय तक विभाग की नजर से कैसे बचीं? यदि अन्य लोगों से भी इसी प्रकार रकम लेने के आरोप सही पाए जाते हैं,तो यह एक संगठित आर्थिक अपराध का रूप ले सकता है। अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि आरोपियों ने कितने लोगों से इस तरह रकम ली और क्या विभागीय स्तर पर भी उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


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