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सूरजपुर@ 100 एकड़ से अधिक भूमि पर अब भी अतिक्रमण

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छह मकान और 20 एकड़ में खेती, 11 मामलों में न्यायालय में सुनवाई,विभाग की कार्रवाई पर उठा सवाल

  • वन भूमि बचाने का अभियान या औपचारिकता? 300 एकड़ में अतिक्रमण,कार्रवाई सिर्फ टटिया तक सीमित
  • आरक्षित वन में खेती, मकान और कब्जा…वन विभाग की कार्रवाई से नहीं टूटा अतिक्रमण का जाल
  • वन विभाग पहुंचा,15 टटिया हटाकर लौटा… 100 एकड़ से अधिक वन भूमि पर कब्जा जस का तस
  • 40 हजार पौधों का जंगल उजड़ा,
  • वन विभाग ने दी चेतावनी… अतिक्रमणकारियों पर नहीं दिखा असर
  • आरक्षित वन भूमि पर बढ़ता कब्जा, विभाग की कार्रवाई बनी खानापूर्ति?
  • 300 एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमण का साम्राज्य, विभाग ने दिखाई सख्ती, कब्जे अब भी कायम

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,07 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
जिले के ग्राम पंचायत बड़सरा के पतेरापारा स्थित आरक्षित वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण के खिलाफ सोमवार को वन विभाग ने अभियान चलाया, करीब 30 सदस्यीय टीम ने मौके पर पहुंचकर टटिया (बाड़) से घिरे क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए लगभग 15 टटिया हटाई तथा ग्रामीणों को स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने की समझाइश दी,विभाग ने चेतावनी दी कि यदि कब्जाधारी स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी, अभियान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ,लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी वन भूमि पर केवल सीमित कार्रवाई से अतिक्रमण की समस्या का समाधान संभव नहीं है।
100 एकड़ से अधिक भूमि पर कब्जा, छह मकान और 20 एकड़ में खेती-वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में 100 एकड़ से अधिक आरक्षित वन भूमि पर कब्जा है,इस क्षेत्र में करीब छह मकान बनाए जा चुके हैं,जबकि लगभग 20 एकड़ भूमि पर धान की खेती की जा रही है,विभाग का कहना है कि आरक्षित वन भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण और कृषि कार्य कानूनन प्रतिबंधित है, फिर भी लगातार अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है।
15 टटिया हटाई,लेकिन कब्जा जस का तस-सोमवार को चलाए गए अभियान में वन विभाग ने लगभग 15 टटिया हटाई और लोगों को दोबारा बाड़ नहीं लगाने की चेतावनी दी,हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर बड़ी संख्या में बने अन्य कब्जों,खेतों और निर्माणों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई,उनका आरोप है कि इस प्रकार की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है,जिससे अतिक्रमणकारियों में कोई भय नहीं दिखाई देता।
11 लोगों पर पहले से दर्ज है प्रकरण- वन विभाग ने बताया कि मार्च 2026 में भाजपा मंडल अध्यक्ष सुनील साहू की शिकायत के बाद वन भूमि पर अतिक्रमण के आरोप में 11 ग्रामीणों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया जा चुका है,मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है,विभाग का कहना है कि न्यायालय के निर्णय के आधार पर आगे बेदखली और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
300 एकड़ आरक्षित वन भूमि पर वर्षों से बढ़ रहा अतिक्रमण-
जानकारी के अनुसार पतेरापारा स्थित लगभग 300 एकड़ आरक्षित वन भूमि लंबे समय से अतिक्रमण की चपेट में है,वन विभाग समय-समय पर कार्रवाई करता रहा है,लेकिन इसके बावजूद वन भूमि पर कब्जे का दायरा लगातार बढ़ता गया,स्थानीय लोगों का कहना है कि कई लोगों ने स्थायी रूप से भूमि पर कब्जा कर लिया है,जबकि कुछ लोगों ने खेती भी शुरू कर दी है।
40 हजार पौधे हुए बर्बाद,वृक्ष बनने से पहले ही काट डाले गए…
वन विभाग के अनुसार जिस भूमि पर आज अतिक्रमण है,वहां पूर्व में लगभग 40 हजार पौधों का रोपण कराया गया था, इनमें बड़ी संख्या में पौधे अब वृक्ष बनने की अवस्था में पहुंच चुके थे, लेकिन कथित रूप से अतिक्रमण के दौरान उन्हें काट दिया गया, पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि वर्षों की मेहनत और लाखों रुपये की लागत से तैयार किए गए पौधों का इस तरह नष्ट होना न केवल सरकारी संपत्ति की क्षति है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी बड़ा झटका है।
वन विभाग ने दी अंतिम चेतावनी
वन परिक्षेत्र अधिकारी उमेश वस्त्रकार ने बताया कि वन मंडलाधिकारी के मार्गदर्शन में अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने एवं लोगों को समझाइश देने की कार्रवाई की गई है,उन्होंने कहा कि संबंधित लोगों से स्वेच्छा से कब्जा हटाने को कहा गया है,यदि ऐसा नहीं किया गया तो वन अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी,उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में दर्ज प्रकरणों में न्यायालय के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बड़े अभियान की मांग…नहीं तो बढ़ता रहेगा अतिक्रमण
वन भूमि पर लगातार बढ़ते कब्जे को लेकर पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग वास्तव में आरक्षित वन क्षेत्र को बचाना चाहता है तो केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई से काम नहीं चलेगा,पूरे क्षेत्र का सीमांकन कर व्यापक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाना होगा, अवैध निर्माण हटाने होंगे और नष्ट किए गए वन क्षेत्र में दोबारा बड़े पैमाने पर पौधरोपण कर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी,स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में आरक्षित वन भूमि का बड़ा हिस्सा पूरी तरह अतिक्रमण की भेंट चढ़ सकता है,जिससे पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।


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