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डॉ. नीलम मिश्रा और डॉ. महेश मिश्रा को मिली पीएचडी की उपाधि
एक ने भारत की विदेश नीति पर किया शोध,दूसरे ने यातायात जागरूकता पर,संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय ने प्रदान की डॉक्टरेट की उपाधि
-संवाददाता-
पटना/कोरिया,07 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के लिए गौरव का क्षण उस समय बना जब एक ही परिवार के दो शोधार्थियों ने अलग-अलग विषयों पर उत्कृष्ट शोध कार्य कर संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा (अंबिकापुर) से डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि प्राप्त की, ग्राम खैरी (पटना) निवासी डॉ. नीलम मिश्रा और राष्ट्रपति पदक प्राप्त ट्रैफिक मैन डॉ. महेश मिश्रा की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है, शिक्षा जगत,प्रशासन,पुलिस विभाग एवं सामाजिक संगठनों ने दोनों को बधाई देते हुए इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।
भारत की विदेश नीति पर शोध कर डॉ. नीलम मिश्रा बनीं डॉक्टर-ग्राम खैरी पटना निवासी डॉ. नीलम मिश्रा ने ‘बदलते परिदृश्य में भारत की विदेश नीति का अध्ययन’ विषय पर शोध कार्य पूर्ण कर पीएचडी की उपाधि अर्जित की, उनका शोध केंद्र शासकीय राजमोहिनी देवी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय,अंबिकापुर रहा, यह शोध डॉ. अखिलेश कुमार द्विवेदी, विभागाध्यक्ष,राजनीति विज्ञान विभाग, शासकीय रेवती रमण मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सूरजपुर एवं अध्ययन बोर्ड अध्यक्ष (राजनीति विज्ञान),संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के निर्देशन में संपन्न हुआ,डॉ. नीलम मिश्रा विगत 10 वर्षों से अतिथि व्याख्याता के रूप में शिक्षा क्षेत्र में सेवाएं दे रही हैं,उन्होंने शासकीय हाई स्कूल झरनापारा,कुंडेली,सावांरावां सहित विभिन्न विद्यालयों में अध्यापन किया है तथा वर्तमान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टेंगनी में कार्यरत हैं, उन्होंने वर्ष 2019 में प्री-पीएचडी प्रवेश परीक्षा, वर्ष 2021-22 में कोर्स वर्क, वर्ष 2023 में शोध शीर्षक का पंजीयन तथा वर्ष 2026 में अंतिम मौखिक परीक्षा (वाइवा) सफलतापूर्वक पूर्ण की,बाह्य परीक्षक के रूप में प्रो. डॉ. अनुपम शर्मा (डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय,सागर) ने शोध को समकालीन एवं अत्यंत उपयोगी बताया।
वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका का किया विश्लेषण- अपने शोध में डॉ. नीलम मिश्रा ने वर्ष 2014 के बाद भारत की विदेश नीति में आए बदलाव,वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका,पड़ोसी देशों से संबंध,रणनीतिक साझेदारी,आर्थिक एवं सुरक्षा नीति तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
यातायात जागरूकता पर शोध कर ट्रैफिक मैन डॉ. महेश मिश्रा ने भी हासिल की पीएचडी-राष्ट्रपति पदक प्राप्त एवं ‘ट्रैफिक मैन’ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. महेश मिश्रा को ‘यातायात नियमों के परिपालन संबंधी जागरूकता का अध्ययन : छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले के विशेष संदर्भ में’ विषय पर शोध कार्य पूर्ण करने के बाद पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई, डॉ. महेश मिश्रा ने अपने शोध में कोरिया जिले के नागरिकों के बीच यातायात नियमों के प्रति जागरूकता, नियमों के पालन की स्थिति, सड़क दुर्घटनाओं के कारण तथा सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के उपायों का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से अध्ययन किया है, उनका शोध डॉ. रवीन्द्र नाथ शर्मा, विभागाध्यक्ष समाजशास्त्र, श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय,अंबिकापुर के निर्देशन में पूरा हुआ। अंतिम वाइवा में बाह्य परीक्षक प्रो. महेश शुक्ला ने शोध को समाजोपयोगी बताते हुए कहा कि यह अध्ययन सड़क सुरक्षा एवं जनजागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
शिक्षा और समाज सेवा दोनों क्षेत्रों में सक्रिय- डॉ. महेश मिश्रा केवल शोधार्थी ही नहीं बल्कि समाजसेवी के रूप में भी जाने जाते हैं, पिछले दो दशकों से वे यातायात जागरूकता अभियान चला रहे हैं, उन्होंने अपने निजी व्यय से 500 से अधिक यातायात जागरूकता शिविर आयोजित कर 5 लाख से अधिक लोगों को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की जानकारी दी है, उनके इस अभियान का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।
दोनों ने व्यक्त किया आभार- डॉ. नीलम मिश्रा एवं डॉ. महेश मिश्रा ने अपने शोध कार्य की सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों, परिवार,विश्वविद्यालय प्रशासन,शोध मार्गदर्शकों, सहकर्मियों तथा प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों को दिया। दोनों ने शोध यात्रा के दौरान मिले सहयोग के लिए विश्वविद्यालय, शोध केंद्र, प्रशासन, शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग तथा शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
क्षेत्र में खुशी का माहौल
एक ही परिवार के दो सदस्यों द्वारा अलग-अलग विषयों पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने को लेकर क्षेत्र में हर्ष का वातावरण है, शिक्षाविदों,प्रशासनिक अधिकारियों,पुलिस विभाग, जनप्रतिनिधियों, मित्रों और शुभचिंतकों ने दोनों शोधार्थियों को बधाई देते हुए इसे कोरिया जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है,दोनों के शोध को शिक्षा,नीति निर्माण और समाज के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
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