बारिश से खेती को मिली रफ्तार…लेकिन डीएपी की कमी,आवारा मवेशी और झुरा धान की समस्या बनी चुनौती,मक्का और मूंगफली की बुवाई भी शुरू

-राजन पाण्डेय-
कोरिया,07 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। जिले में मानसून की सक्रियता के साथ खरीफ सीजन की शुरुआत हो चुकी है, 20 जून के बाद हुई अच्छी बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और अब जिले के सोनहत, बैकुंठपुर, पटना सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में धान की खेती युद्ध स्तर पर शुरू हो गई है, खेतों में ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगी है,वहीं किसान और महिलाएं धान की रोपाई एवं खेत तैयार करने में दिन-रात जुटे हुए हैं, हालांकि खेती की शुरुआत के साथ ही किसानों के सामने डीएपी खाद की कमी, आवारा मवेशियों का आतंक और झुरा धान की समस्या बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई है।
खेतों में बढ़ी रौनक,
रोपाई ने पकड़ी रफ्तार
अच्छी बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी आने से किसानों ने जुताई,पलेवा और रोपाई का कार्य शुरू कर दिया है, जिन किसानों ने पहले ही धान की नर्सरी (थरहा) तैयार कर ली थी,वे अब रोपाई में जुट गए हैं,अभी जिले के कुछ हिस्सों में रोपाई प्रारंभ हुई है,लेकिन अगले एक सप्ताह में यह कार्य पूरी गति पकड़ने की संभावना है, ग्रामीण इलाकों में सुबह से देर शाम तक खेतों में किसानों की चहल-पहल दिखाई दे रही है, ट्रैक्टरों से खेत तैयार किए जा रहे हैं और पारंपरिक तरीके से रोपाई का कार्य भी शुरू हो चुका है।
महिलाओं ने संभाली रोपाई की कमान
धान रोपाई के मौसम में इस बार बड़ी संख्या में महिलाएं भी खेतों में सक्रिय नजर आ रही हैं, महिलाएं सुबह घर का कामकाज निपटाने के बाद खेतों में पहुंचकर रोपाई का कार्य कर रही हैं,महिलाओं का कहना है कि खेती में हाथ बंटाने से परिवार की आय बढ़ती है और मजदूरी का खर्च भी बचता है,खेतों में महिलाओं की मेहनत खरीफ सीजन की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है।
झुरा धान बोने वाले किसानों की बढ़ी मुश्किलें
इस वर्ष मौसम के उतार-चढ़ाव ने कई किसानों की योजना बिगाड़ दी,जिन किसानों ने बारिश का इंतजार करते हुए समय पर थरहा तैयार नहीं किया,उन्हें अब ‘चोपी’ विधि से बीज तैयार कर बुवाई करनी पड़ रही है,दूसरी ओर जिन किसानों ने बारिश से ठीक पहले नर्सरी तैयार की थी,वहां लगातार हुई बारिश से कई स्थानों पर बीज खराब हो गए,इससे किसानों को दोबारा बीज की व्यवस्था करनी पड़ रही है,विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में किसान वैकल्पिक तकनीकों का उपयोग कर समय पर बुवाई पूरी करें।
सीधी बुवाई से लागत कम करने की सलाह-कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान मौसम धान की सीधी बुवाई के लिए भी अनुकूल है,इससे किसानों की लागत कम होगी और पानी की बचत भी होगी,किसानों जितेंद्र लठवाल,राजेश कंबोज और जितेंद्र शर्मा ने बताया कि लगातार हुई बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनी हुई है,यदि आगामी दिनों में भी सामान्य वर्षा होती रही तो सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा और धान की फसल को प्राकृतिक नमी मिलती रहेगी।
धान के साथ मक्का और मूंगफली की बुवाई भी शुरू-केवल धान ही नहीं, जिले के कई क्षेत्रों में किसानों ने मक्का और मूंगफली की खेती भी शुरू कर दी है। कृषि विभाग किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रहा है,ताकि एक ही फसल पर निर्भरता कम हो और किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
डीएपी खाद की कमी बनी सबसे बड़ी चिंता-खेती के सबसे महत्वपूर्ण समय पर जिले में डीएपी खाद की कमी किसानों की परेशानी बढ़ा रही है,सोनहत,रामगढ़,रजौली, सुंदरपुर,बैकुंठपुर,पटना,सलका सहित कई सहकारी समितियों में डीएपी सीमित मात्रा में उपलब्ध है, धान की रोपाई से पहले डीएपी डालना आवश्यक माना जाता है, लेकिन निर्धारित सीमा के कारण कई किसानों को जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल पा रही है, मजबूरी में किसान निजी दुकानों से अधिक कीमत पर खाद खरीद रहे हैं,किसानों ने मांग की है कि सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में डीएपी उपलब्ध कराया जाए तथा निजी दुकानदारों द्वारा अधिक कीमत वसूले जाने पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
आवारा मवेशियों ने बढ़ाई किसानों की चिंता- खेती के बीच जिले में आवारा मवेशियों की समस्या भी गंभीर होती जा रही है, सोनहत और पटना क्षेत्र के किसानों का कहना है कि दिन-रात आवारा पशु धान की नर्सरी और नई रोपाई को नुकसान पहुंचा रहे हैं, कई किसानों का कहना है कि रातभर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है,फिर भी कुछ ही घंटों में पूरी नर्सरी बर्बाद हो जाती है,किसानों ने प्रशासन से आवारा मवेशियों की रोकथाम के लिए ठोस व्यवस्था करने की मांग की है।
कृषि विभाग किसानों
को कर रहा जागरूक
जिला प्रशासन के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम लगातार गांवों का भ्रमण कर किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों,गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा शासन की योजनाओं की जानकारी दे रही है, बीज एवं अन्य कृषि सामग्री प्राप्त करने वाले किसानों ने बताया कि शासन की योजनाओं से खेती की लागत कम करने में मदद मिल रही है और समय पर मार्गदर्शन मिलने से खेती आसान हो रही है।
किसानों की उम्मीद अच्छी बारिश और समय पर खाद पर टिकी
किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में नियमित बारिश होती रही, डीएपी खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई और आवारा मवेशियों पर नियंत्रण हुआ,तो इस वर्ष जिले में धान का उत्पादन बेहतर रहने की पूरी संभावना है, फिलहाल खेतों में किसान पूरे उत्साह के साथ खरीफ सीजन की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन उनकी निगाहें अब मौसम और खाद की उपलब्धता पर टिकी हुई हैं।
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