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अम्बिकापुर@इलाज या कारोबार? लक्ष्मी नारायण अस्पताल पर सवालों की लंबी फेहरिस्त,अब आयुष्मान योजना में कथित धोखाधड़ी का भी मामला दर्ज

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  • नियमों के पालन,पार्किंग,फायर सेफ्टी,भवन अनुमति,पैथोलॉजी संचालन और पारदर्शिता पर पहले से उठ रहे थे सवाल…
  • अब मरीज से नकद वसूली और आयुष्मान कार्ड से भी राशि निकालने के आरोप ने बढ़ाई गंभीरता


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,07 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।शहर के गुदरी चौक,विजय मार्ग स्थित लक्ष्मी नारायण अस्पताल एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। अस्पताल के संचालन को लेकर पहले से नर्सिंग होम नियमों,भवन अनुमति,फायर सेफ्टी,पार्किंग व्यवस्था, पैथोलॉजी संचालन और मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं पर सवाल उठ रहे थे। अब इसी अस्पताल के संचालक के खिलाफ आयुष्मान भारत योजना के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने के बाद पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं, बल्कि गरीब मरीजों के लिए संचालित सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
आयुष्मान कार्ड ब्लॉक
बताकर नकद राशि लेने का आरोप

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार बलरामपुर जिले के ग्राम गिरवानी निवासी विवेक जायसवाल ने आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने बड़े पिता राजेन्द्र प्रसाद जायसवाल को 17 अप्रैल 2026 को पेट दर्द की शिकायत पर लक्ष्मी नारायण अस्पताल में भर्ती कराया था। शिकायत में कहा गया है कि अस्पताल प्रबंधन ने पहले इलाज आयुष्मान कार्ड से होने की बात कही, लेकिन बाद में कार्ड ‘ब्लॉक’ होने का हवाला देकर 1.60 लाख रुपये नकद जमा करा लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में जांच करने पर पता चला कि अस्पताल ने आयुष्मान योजना से भी 1,50,460 रुपये का भुगतान प्राप्त कर लिया। साथ ही आरोप है कि नकद भुगतान का विधिवत बिल भी उपलब्ध नहीं कराया गया। पुलिस ने आवेदन के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की है। मामले की सत्यता अब पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पहले से कई मुद्दों पर घेरे में था अस्पताल
अस्पताल को लेकर पहले भी कई शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप लगाए गए हैं कि प्रचार सामग्री में विशेषज्ञ चिकित्सकों और अत्याधुनिक सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं,जबकि मरीजों का कहना है कि डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता और ओपीडी संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं होती। यह भी आरोप है कि कई चिकित्सक केवल ‘ऑन कॉल’ व्यवस्था में उपलब्ध रहते हैं।
आईसीयू,वार्ड और मूलभूत सुविधाओं पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों एवं शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अस्पताल की आईसीयू,जनरल वार्ड, टॉयलेट,बाथरूम और अन्य सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। अस्पताल के अलग-अलग हिस्सों में ओपीडी,जांच और भर्ती वार्ड संचालित होने की भी चर्चा है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सभी इकाइयों के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति प्राप्त है।
पैथोलॉजी संचालन और
नियमों के पालन पर भी प्रश्न

अस्पताल से संबद्ध प्रयाग मेडिकल एवं पैथोलॉजी लैब को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नियमों के अनुसार पैथोलॉजी लैब का पंजीयन, योग्य पैथोलॉजिस्ट की निगरानी,प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ,बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन तथा मूल हस्ताक्षरयुक्त रिपोर्ट अनिवार्य हैं। स्वास्थ्य विभाग भी समय-समय पर इन नियमों के पालन के निर्देश जारी करता रहा है। ऐसे में लोगों की मांग है कि संबंधित लैब की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सड़क पर पार्किंग से
रोज बिगड़ती व्यवस्था

अस्पताल और मेडिकल व्यवसाय से जुड़े वाहनों के कारण मुख्य सड़क पर लगातार जाम जैसी स्थिति बनने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्याप्त पार्किंग नहीं होने के कारण मरीजों और आम नागरिकों दोनों को परेशानी उठानी पड़ती है। आपातकालीन वाहनों के आवागमन पर भी इसका असर पड़ सकता है।
फायर सेफ्टी पर भी गंभीर सवाल
स्वास्थ्य संस्थानों में अग्नि सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल में अग्निशमन व्यवस्था,आपातकालीन निकास और सुरक्षा संकेतकों की स्थिति की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
जांच टीम बनी,लेकिन
रिपोर्ट का इंतजार

आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता डॉ. डी.के. सोनी की शिकायत पर नगर निगम ने मार्च 2026 में जांच टीम गठित की थी। टीम को भवन अनुमति,निर्माण और संचालन संबंधी तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन कई महीने बाद भी जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर हुई कार्रवाई सार्वजनिक नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जांच का निष्कर्ष क्या रहा।
आवासीय अनुमति पर
व्यावसायिक संचालन का आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिस भवन को आवासीय अनुमति मिली थी,वहां वर्तमान में अस्पताल संचालित किया जा रहा है। साथ ही सेटबैक, पार्किंग,रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अन्य निर्माण संबंधी शर्तों के पालन पर भी प्रश्न उठाए गए हैं।
जनहित के सवाल
– यदि आयुष्मान कार्ड से भुगतान लिया गया तो मरीज से नकद राशि क्यों ली गई?
– क्या नकद भुगतान की विधिवत रसीद और बिल जारी किए गए?
– अस्पताल के प्रचार में दिखाए गए सभी विशेषज्ञ चिकित्सक नियमित रूप से उपलब्ध हैं?
– क्या भवन और अस्पताल संचालन सभी वैधानिक अनुमतियों के अनुरूप है?
– क्या फायर सेफ्टी,पार्किंग और पैथोलॉजी संचालन के मानकों का पालन हो रहा है?
– नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
निष्पक्ष जांच की मांग…
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पूरा मामला सीधे मरीजों के हित और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ा है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग,नगर निगम,पुलिस और जिला प्रशासन को सभी आरोपों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं तो अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना चाहिए और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता का विश्वास बना रहे।


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