बिलासपुर,07 जुलाई 2026। एनटीपीसी सीपत परियोजना से प्रभावित क्षेत्र के किसानों की परेशानी एक बार फिर सामने आई है। वर्षों से दलदल और जलभराव की समस्या झेल रहे किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी खेती योग्य जमीन लगातार खराब होती जा रही है, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान के बजाय उन्हें हर साल मुआवजे के लिए संघर्ष करना पड़ता है। किसानों का कहना है कि एनटीपीसी परियोजना के प्रभाव से कई गांवों के खेतों में जलभराव और दलदल की स्थिति बनी हुई है। इसके कारण खेती करना मुश्किल हो गया है और उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। बावजूद इसके मुआवजा पाने के लिए किसानों को बार-बार आवेदन देना पड़ता है और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार इस वर्ष भी लगभग 30 किसानों का मुआवजा काट दिया गया है, जिससे प्रभावित किसानों में भारी नाराजगी है। किसानों ने आरोप लगाया कि एनटीपीसी के अधिकारियों की कार्यप्रणाली के कारण वास्तविक स्थिति प्रशासन तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाती और हर वर्ष प्रभावित किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। लगातार शिकायतों और विरोध के बाद कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने खेतों की स्थिति का जायजा लिया और किसानों की समस्याएं सुनीं। हालांकि किसानों का आरोप है कि निरीक्षण के दौरान खेतों के भीतर जाकर वास्तविक हालात देखने के बजाय अधिकांश अवलोकन बाहर से ही किया गया, जिससे जमीन की वास्तविक स्थिति का सही आकलन नहीं हो सका। किसानों ने बताया कि वर्षों से सर्वेक्षण ऐसे समय कराया जाता है जब गर्मी के कारण खेत अपेक्षाकृत सूखे दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि जून-जुलाई में बारिश शुरू होते ही अधिकांश खेत दलदल में बदल जाते हैं। वहीं अक्टूबर-नवंबर में फसल पकने के समय भी कई स्थानों पर पानी और कीचड़ बना रहता है,जिससे फसल की कटाई तक प्रभावित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई जगह मेड़ तक पहचान में नहीं आती।
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