नई दिल्ली,07 जुलाई 2026। भारत के सुदूर और दुर्गम गांवों को अपनी इंजीनियरिंग की अद्भुत कला से जोड़ने वाले मशहूर ‘सेतु पुरुष’ (और पद्मश्री से सम्मानित गिरीश भारद्वाज का मंगलवार तड़के निधन हो गया। 76 वर्षीय भारद्वाज लंबे समय से बीमार थे और कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के सुलिया स्थित एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। एक कुशल मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में उन्होंने अपने तीन दशकों के करियर में न केवल पुलों का निर्माण किया, बल्कि हजारों लोगों के जीवन में नई आशा की किरण जगाई। उनके निधन की खबर से पूरे देश में, विशेषकर कर्नाटक में शोक की लहर दौड़ गई है और उन्हें श्रद्धांजलि देने का तांता लगा हुआ है। गिरीश भारद्वाज ने अपनी इंजीनियरिंग यात्रा की शुरुआत 1989 में पयस्विनी नदी पर अपना पहला सस्पेंशन (झूला) पुल बनाकर की थी। यह कोई सामान्य पुल नहीं था, बल्कि इसने एक नए और कम लागत वाले इंजीनियरिंग मॉडल की नींव रखी। इसके बाद उनका काम कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों से निकलकर पूरे भारत में फैल गया। उन्होंने अपने करियर के दौरान देशभर में 140 से अधिक सस्पेंशन पुलों का निर्माण किया, जिसने अलग-थलग पड़े ग्रामीण समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ा। उनके पुल केवल कंक्रीट और लोहे का ढांचा नहीं थे, बल्कि वे स्कूल, अस्पताल और बाजार तक जाने का एक सुगम मार्ग थे, जिसने हजारों ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाया। उनके उत्कृष्ट सामाजिक योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 2017 में उन्हें ‘पद्मश्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया।
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