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अम्बिकापुर@रामगढ़ महोत्सव में रामभक्ति प्रकृति और लोकसंस्कृति से सराबोर रहा सरस कवि-सम्मेलन

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-संवाददाता-
अम्बिकापुर,02 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। रामगढ़ महोत्सव के अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा आयोजित सरस कवि-सम्मेलन में रामभक्ति,प्रकृति संरक्षण, लोकसंस्कृति और मानवीय मूल्यों पर आधारित काव्य प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ गीतकार रंजीत सारथी की सरगुजिहा श्रीराम वंदना से हुआ। मंच संचालन संतोष दास ‘सरल’ ने किया। विभिन्न कवियों ने भगवान राम के आदर्शों,निष्काम कर्म,नारी सम्मान,रामराज्य और भारतीय संस्कृति पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं। वरिष्ठ गीतकार संतोष दास ‘सरल’ ने अपने सरगुजिहा गीत ‘चल न संगी रामगढ़ देखे-बुले जाबो…’ के माध्यम से रामगढ़ और सरगुजा की सांस्कृतिक विरासत का सुंदर चित्रण किया। वहीं आशुकवि विनोद हर्ष ने ‘सतपुड़ा-सी वादियां, छोटे-मोटे अबूझमाड़ रहने दो, बदौलत इन्हीं के है जलचक्र, धरा पर आषाढ़ रहने दो’ कविता के माध्यम से प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया। कार्यक्रम में प्रदेश के अनेक वरिष्ठ कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से समां बांधा।


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