
सूरजपुर में न्यायपालिका और पुलिस की संयुक्त कार्यशाला
बीएनएस,बीएनएसएस,एनडीपीएस और पॉक्सो कानूनों की बारीकियों पर मिला प्रशिक्षण,वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन पर रहा विशेष जोर
-संवाददाता-
सूरजपुर,28 जून 2026 (घटती-घटना)। गंभीर अपराधों की विवेचना को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से शनिवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों, थाना प्रभारियों और विवेचकों को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस),भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस),एनडीपीएस एक्ट तथा पॉक्सो एक्ट से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों और वैज्ञानिक अनुसंधान तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनीता वार्नर ने किया।
न्यायपालिका और पुलिस के बीच समन्वय से बेहतर होगी विवेचना
कार्यशाला में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मानवेन्द्र सिंह,डीआईजी एवं एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर,डीडीपी विरेन्द्र लकड़ा तथा डीपीओ मनोज चतुर्वेदी ने नवीन आपराधिक कानूनों,प्रमुख धाराओं और न्यायिक प्रक्रियाओं पर विस्तार से जानकारी दी, अधिकारियों ने विवेचकों के प्रश्नों का समाधान करते हुए विवेचना में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर भी चर्चा की।
एफआईआर से चालान तक हर चरण में बरतें कानूनी सावधानीः न्यायाधीश-प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनीता वार्नर ने कहा कि विवेचना में छोटी-सी प्रक्रियात्मक त्रुटि भी न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है,इसलिए एफआईआर दर्ज करने से लेकर न्यायालय में चालान प्रस्तुत करने तक प्रत्येक चरण में विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करना आवश्यक है,उन्होंने विवेचकों को नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि सात वर्ष अथवा उससे अधिक दंड वाले सभी अपराधों में फोरेंसिक जांच अनिवार्य है, डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित संकलन और सही दस्तावेजीकरण दोषियों को सजा दिलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एनडीपीएस मामलों में छोटी गलती भी आरोपी को दिला सकती है राहत- अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मानवेन्द्र सिंह ने विशेष रूप से एनडीपीएस एक्ट से जुड़े मामलों में अनुसंधान की कानूनी प्रक्रिया पर प्रकाश डाला,उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में कई बार विवेचक ऐसी त्रुटियां कर बैठते हैं, जिनका सीधा लाभ आरोपी को न्यायालय में मिल जाता है,उन्होंने सुझाव दिया कि एनडीपीएस मामलों की जांच के दौरान आवश्यक चेकलिस्ट हमेशा साथ रखें,ताकि प्राथमिकी दर्ज करने से लेकर जब्ती,नमूना संकलन,सीलिंग और न्यायालयीन कार्रवाई तक सभी प्रक्रियाएं विधिसम्मत ढंग से पूरी की जा सकें।
फोरेंसिक साक्ष्य ही मजबूत अभियोजन की सबसे बड़ी ताकत
कार्यशाला में संयुक्त संचालक एफएसएल आर.के. पैंकरा, कुलदीप कुजूर एवं डॉ. रसलीन कौर ने वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन के आधुनिक तरीकों पर विस्तृत प्रस्तुति दी, विशेषज्ञों ने बताया कि घटनास्थल पर मिलने वाले छोटे-छोटे भौतिक और डिजिटल साक्ष्य ही अपराधी तक पहुंचने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं, उन्होंने घटनास्थल को सुरक्षित रखने, साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से संकलित करने, डिजिटल डाटा संरक्षित रखने तथा फोरेंसिक जांच की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर विशेष जोर दिया।
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