
आस्था, सम्मान और सांस्कृतिक समन्वय का अविस्मरणीय संगम
छत्तीसगढ़ शासन की अभिनव पहल से एमसीबी जिले के विशिष्टजनों ने किए प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ के दर्शन,गुजरात सरकार ने किया भव्य स्वागत
-संवाददाता-
एमसीबी,28 जून 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्रीय एकता को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा’श्रद्धा, सम्मान और सांस्कृतिक समन्वय का एक ऐतिहासिक अध्याय बनकर सामने आई,इस यात्रा ने एमसीबी जिले के विशिष्टजनों को देश के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव के दर्शन कराने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं से निकटता से परिचित कराया। केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल तथा संस्कृति विभाग के संचालक डॉ.संजय कन्नौजे के विशेष प्रयासों से आयोजित यह यात्रा प्रतिभागियों के लिए जीवनभर की अविस्मरणीय स्मृति बन गई।
विशिष्टजनों को सम्मान के साथ कराया गया आध्यात्मिक सफर-यात्रा का मुख्य उद्देश्य पद्म अलंकरण एवं राज्य अलंकरण से सम्मानित विभूतियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों को देश के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर के दर्शन कराना तथा उन्हें भारतीय संस्कृति,आस्था और राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना था, एमसीबी जिले में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी संतन देवी जांगड़े,जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंकिता सोम तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) लिंगराज सिदार के मार्गदर्शन में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के जिला नोडल अधिकारी डॉ. विनोद कुमार पांडेय ने पूरी यात्रा का सफल संचालन किया।
मनेन्द्रगढ़ से रायपुर और फिर विशेष ट्रेन से सोमनाथ तक का सफर-यात्रियों को मनेन्द्रगढ़ से विशेष वातानुकूलित बस के माध्यम से रायपुर पहुंचाया गया,इसके बाद राज्य शासन द्वारा विशेष वातानुकूलित ट्रेन से सभी यात्रियों को गुजरात स्थित सोमनाथ के लिए रवाना किया गया,पूरे सफर के दौरान यात्रियों के लिए भोजन,नाश्ता,पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई,यात्रा के दौरान भजन, छत्तीसगढ़ी लोकगीत,पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
गुजरात सरकार ने किया आत्मीय और भव्य स्वागत-वेरावल रेलवे स्टेशन पहुंचते ही गुजरात सरकार की ओर से सभी अतिथियों का ढोल-नगाड़ों,लोकनृत्य और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया, इसके बाद यात्रियों को वातानुकूलित बसों से होटल पहुंचाकर ठहरने, भोजन और विश्राम की उच्चस्तरीय व्यवस्था उपलब्ध कराई गई, इस आत्मीय स्वागत ने छत्तीसगढ़ और गुजरात के बीच सांस्कृतिक समन्वय और भाईचारे की भावना को और मजबूत किया।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन ने भावविभोर किया-अगले दिन सभी यात्रियों ने प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर में विधिवत दर्शन एवं पूजन किया,इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम, बाणस्तंभ, समुद्र तट और अन्य प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण भी किया,शाम को आयोजित भव्य आरती, लेजर शो तथा सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास की प्रस्तुति ने सभी यात्रियों को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां-यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने लोकगीत, लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिन्हें सभी यात्रियों ने खूब सराहा,इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिला, जिसने दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक संवाद को नई ऊर्जा प्रदान की।
स्मृति-चिन्ह देकर किया गया सम्मानित-सोमनाथ दर्शन के उपरांत गुजरात सरकार द्वारा सभी विशिष्टजनों को स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया,वापसी के समय रेलवे स्टेशन पर भी सभी अतिथियों को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई,जिससे यात्रा का समापन गरिमामय वातावरण में हुआ।
इन विशिष्टजनों ने किया यात्रा में सहभाग-यात्रा में जिला नोडल अधिकारी डॉ. विनोद कुमार पांडेय के साथ साहित्यकार वीरेंद्र श्रीवास्तव, सतीश उपाध्याय,पूर्व संसदीय सचिव चंपा देवी पावले,सरोज यादव,रामजीत लकड़ा,भगत बाबू, कलाकार, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्टजन शामिल रहे,यात्रा के सफल संचालन में राज्य नोडल अधिकारी युगल तिवारी तथा संभागीय नोडल अधिकारी पुखराज गोस्वामी का विशेष योगदान रहा।
यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, सांस्कृतिक एकता का अभियान है- यात्रा के अनुभव साझा करते हुए जिला नोडल अधिकारी डॉ. विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि यह केवल धार्मिक दर्शन की यात्रा नहीं,बल्कि सम्मान, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, राष्ट्रीय एकता और पर्यटन संवर्धन का प्रभावी माध्यम है,उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन की यह पहल समाज के विशिष्टजनों को देश की महान सांस्कृतिक धरोहरों से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है,भविष्य में सोमनाथ,राम मंदिर तथा महाकालेश्वर मंदिर जैसे पवित्र स्थलों की यात्राएं निरंतर आयोजित होती रहेंगी तो इससे राष्ट्रीय एकता,सांस्कृतिक समन्वय और सामाजिक सद्भाव को और अधिक मजबूती मिलेगी।
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