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कोरिया/सोनहत@ अधिकारियों के स्थानांतरण की मांग

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  • 29 जून को ‘कोरिया न्याय यात्रा’ से बढ़ेगा जनदबाव
  • नौगई तिहरे हत्याकांड: 13 दिन बाद भी न्याय अधूरा, दो आरोपी अब भी फरार
  • पुलिस की कार्यप्रणाली, विभागीय जवाबदेही और राजनीतिक जिम्मेदारी पर उठे बड़े सवाल
  • पीड़ित परिवार ने डीजीपी से की उच्चस्तरीय विभागीय जांच, सीडीआर जांच और तीन पुलिस
  • 13 दिन बाद भी न्याय अधूरा: दो आरोपी फरार, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे बड़े सवाल
  • नौगई तिहरे हत्याकांड: न्याय की राह में 13 दिन, सवालों के घेरे में पूरी व्यवस्था
  • दो आरोपी अब भी फरार, पीड़ित परिवार ने डीजीपी से मांगी विभागीय जांच
  • नौगई हत्याकांड: गिरफ्तारी से आगे बढ़ा मामला,अब पुलिस की जवाबदेही पर बहस
  • हत्याकांड के 13 दिन बाद भी अधूरा न्याय,विभागीय जांच और तबादलों की उठी मांग
  • क्या न्याय तक पहुंचेगी जांच? दो आरोपी फरार, पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
  • नौगई हत्याकांड: पीड़ित परिवार का सवाल—आखिर न्याय कब मिलेगा?
  • गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन सवाल बाकी: नौगई हत्याकांड में अब पुलिस की भूमिका जांच के घेरे में
  • नौगई हत्याकांड: आरोपी सलाखों के पीछे, लेकिन क्या जवाबदेही से बच जाएगी पूरी व्यवस्था?


-रवि सिंह-
कोरिया/सोनहत,28 जून 2026 (घटती-घटना)।
सोनहत विकासखंड के नौगई गांव में 16 जून की रात हुई तिहरी हत्या और आगजनी की घटना को आज 13 दिन पूरे हो चुके हैं, इन 13 दिनों में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया, कुछ आरोपियों के आत्मसमर्पण की बात सामने आई, कई पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे,एक सब-इंस्पेक्टर को हटाया गया, लेकिन इसके बावजूद सबसे बड़ा प्रश्न आज भी जस का तस खड़ा है क्या पीडि़त परिवार को वास्तव में न्याय मिलने की दिशा साफ दिखाई दे रही है?
इस प्रश्न का उत्तर तलाशने की कोशिश करें तो घटनाक्रम केवल एक हत्या की विवेचना तक सीमित नहीं रह जाता,बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली,प्रशासनिकनिर्णय,राजनीतिक जवाबदेही,विभागीय लापरवाही,फरार आरोपी, आत्मसमर्पण की प्रक्रिया और अब सामाजिक आंदोलन तक पहुंच जाता है,घटना के 13 दिन बाद भी पुलिस दो आरोपियों में सुशील और अंजनी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है,दूसरी ओर पीडि़त परिवार ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को आवेदन देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय विभागीय जांच, सीडीआर जांच और कुछ पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण की मांग की है,उधर,विभिन्न सामाजिक संगठनों ने 29 जून को‘कोरिया न्याय यात्रा’ निकालने की घोषणा कर दी है,क्योकि नौगई तिहरे हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं रह गया है,यह पुलिस की कार्यप्रणाली,प्रशासनिक जवाबदेही,राज नीतिक संवेदनशीलता और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता की भी परीक्षा बन चुका है, एक ओर पुलिस अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई का दावा कर रही है,वहीं दूसरी ओर पीडि़त परिवार विभागीय जांच,सीडीआर जांच और अधिकारियों के स्थानांतरण की मांग कर रहा है, सामाजिक संगठन न्याय यात्रा निकाल रहे हैं, जबकि जनता यह जानना चाहती है कि आखिर इस पूरे मामले का अंतिम सत्य क्या है और पीडि़त परिवार को पूर्ण न्याय कब मिलेगा।
16 जून की वह रात जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया…
16 जून की रात नौगई गांव में जो हुआ,उसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया,आरोप है कि एक ही परिवार को निशाना बनाकर हमला किया गया, लाला सिंह फाचर््यूनर वाहन में जिंदा जल गए,वीरेंद्र सिंह किसी तरह जलती गाड़ी से बाहर निकले, लेकिन उन पर दोबारा धारदार हथियार से हमला किया गया,बाद में अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई, नागेन्द्र सिंह लगभग 80 प्रतिशत तक झुलस गए,रायपुर रेफर किए जाने के दौरान रास्ते में उन्होंने भी दम तोड़ दिया,मयंक सिंह गंभीर रूप से घायल हैं और उनका उपचार जारी है, योगेंद्र सिंह भी गंभीर चोटों के साथ उपचाररत हैं,एक ही परिवार के तीन लोगों की मृत्यु ने पूरे कोरिया जिले को शोक और आक्रोश से भर दिया।
क्या केवल एक सब- इंस्पेक्टर जिम्मेदार है?
घटना के बाद सब-इंस्पेक्टर राजाराम राठिया को प्रभार से हटाए जाने की जानकारी सामने आई,सूत्रों के अनुसार उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है, लेकिन अब बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या पूरी घटना की जिम्मेदारी केवल उसी अधिकारी की है जो कुछ घंटों के लिए प्रभार में था? या फिर वास्तविक थाना प्रभारी, वरिष्ठ अधिकारी और पूरी कमांड चेन की भूमिका की भी जांच होगी? यही सवाल अब स्थानीय स्तर पर सबसे अधिक पूछा जा रहा है।
थाना प्रभारी की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल…
पीडि़त परिवार का कहना है कि घटना वाले दिन वास्तविक थाना प्रभारी विनोद पासवान शाम तक थाना क्षेत्र में मौजूद थे,यदि क्षेत्र में तनाव था तो उन्होंने थाना का प्रभार दूसरे अधिकारी को क्यों सौंपा? क्या वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी जानकारी दी गई थी? क्या अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की गई थी? क्या संभावित हिंसा रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाए गए? इन सभी बिंदुओं की विभागीय जांच की मांग की गई है।
एडिशनल एसपी की भूमिका भी जांच के घेरे में…
पीडि़त परिवार ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेखा चौबे की भूमिका की भी विभागीय जांच की मांग की है,परिवार का कहना है कि यदि वरिष्ठ अधिकारियों को स्थिति की जानकारी थी तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि जानकारी नहीं थी तो यह भी गंभीर प्रशासनिक प्रश्न है, इसी कारण डीजीपी को दिए आवेदन में उनकी भूमिका की जांच की मांग की गई है।
प्रधान आरक्षक नवीन दत्त तिवारी को लेकर भी आपत्ति
आवेदन में एमसीबी जिले में पदस्थ प्रधान आरक्षक नवीन दत्त तिवारी का भी उल्लेख किया गया है, पीडि़त परिवार ने आशंका व्यक्त की है कि उनके आरोपियों से संबंध होने की संभावना की जांच की जाए,साथ ही निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उनका स्थानांतरण करने का अनुरोध किया गया है,इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या विभागीय निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
डीजीपी को सौंपा गया विस्तृत आवेदन
पीडि़त परिवार द्वारा पुलिस महानिदेशक को भेजे गए आवेदन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं घटना से पूर्व पुलिस को मिली सूचनाओं की जांच, थाना प्रभारी की भूमिका की जांच, घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों की भूमिका, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की विभागीय जांच,कथित आत्मसमर्पण की प्रक्रिया की जांच,कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और मोबाइल लोकेशन की जांच, लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई, जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों का स्थानांतरण, परिवार का कहना है कि निष्पक्ष जांच तभी संभव होगी जब जांच से जुड़े अधिकारियों को वर्तमान पदस्थापना से हटाया जाएगा।
तीन अधिकारियों के स्थानांतरण की मांग…
आवेदन में तीन अधिकारियों/कर्मचारियों के स्थानांतरण की मांग की गई है प्रधान आरक्षक नवीन दत्त तिवारी (एमसीबी),थाना प्रभारी विनोद पासवान (सोनहत),अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेखा चौबे (कोरिया) परिवार ने अनुरोध किया है कि इनका स्थानांतरण कोरिया, एमसीबी और सूरजपुर जिलों से बाहर किया जाए ताकि जांच किसी प्रकार से प्रभावित न हो।
आत्मसमर्पण की कहानी पर भी प्रश्न
घटना के बाद चार आरोपियों के आत्मसमर्पण की बात सामने आई थी,लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, पीडि़त परिवार चाहता है कि यह स्पष्ट किया जाए कि क्या वास्तव में आरोपियों ने आत्मसमर्पण किया? या पुलिस पहले से उनके संपर्क में थी? पूरी प्रक्रिया कहां और किन परिस्थितियों में हुई? यदि कोई अनियमितता नहीं हुई तो उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
गृह मंत्री और स्थानीय विधायक से इस्तीफे की मांग…
घटना के बाद अब सामाजिक संगठनों के बीच राजनीतिक जवाबदेही की मांग भी तेज हो गई है, संगठन का आरोप है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा तथा क्षेत्र की विधायक रेणुका सिंह द्वारा अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई, इसी आधार पर कुछ संगठन दोनों से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग कर रहे हैं,हालांकि इस संबंध में संबंधित जनप्रतिनिधियों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।
13 दिन बाद भी दो आरोपी फरार
पुलिस का कहना है कि मामले में अधिकांश आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन दो आरोपी—सुशील और अंजनी—अब भी फरार हैं, यही वह तथ्य है जिसने पूरे घटनाक्रम को फिर चर्चा में ला दिया है,जनता पूछ रही है कि जब इतने बड़े हत्याकांड में पुलिस लगातार कार्रवाई का दावा कर रही है तो दो आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर कैसे हैं? क्या वे पुलिस से बच रहे हैं? क्या पुलिस को उनके ठिकानों की जानकारी नहीं है? या फिर जांच किसी अन्य कारण से धीमी है? इन प्रश्नों का उत्तर फिलहाल पुलिस के पास ही है।
क्या पुलिस घटना होने का इंतजार करती है?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर प्रश्न यही है,घटना के बाद पूरे क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी गई,भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया,लगातार गश्त शुरू हो गई, हर आने-जाने वाले पर निगरानी रखी जाने लगी,लेकिन लोग पूछ रहे हैं की यदि यही पुलिस व्यवस्था घटना से पहले दिखाई जाती,जब गांव में विवाद लगातार बढ़ रहा था,तो क्या इतनी बड़ी घटना टाली नहीं जा सकती थी? क्या पुलिस के पास पहले से तनाव की सूचना थी? यदि थी तो समय रहते निवारक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि सूचना नहीं थी तो यह भी पुलिस के सूचना तंत्र की विफलता मानी जाएगी,यही वे प्रश्न हैं जो अब केवल आपराधिक विवेचना नहीं बल्कि विभागीय जांच की मांग को भी मजबूत कर रहे हैं।
29 जून को ‘कोरिया न्याय यात्रा’ का ऐलान…
नौगई हत्याकांड को लेकर‘कोरिया न्याय यात्रा’ का आयोजन 29 जून को किया जा रहा है,सोशल मीडिया पर जारी पोस्टर के माध्यम से समाज के लोगों से बड़ी संख्या में कोरिया पहुंचने का आह्वान किया गया है,पोस्टर में ‘न्याय दिलाओ, नहीं तो छत्तीसगढ़ बंद कराओ’ जैसे नारे लिखे गए हैं। साथ ही इसे अन्याय के विरुद्ध जनआंदोलन बताते हुए समाज के लोगों से कोरिया पहुंचकर पीडि़त परिवार के समर्थन में आवाज बुलंद करने की अपील की गई है, पोस्टर के अनुसार गुजरात से समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर भी इस आंदोलन में शामिल होने के लिए कोरिया पहुंचने वाले हैं। हालांकि कार्यक्रम की सफलता और उसमें शामिल होने वालों की संख्या आयोजन के दिन ही स्पष्ट होगी।
जनता पूछ रही है…अब पूरे जिले में कुछ सवाल लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं…
दो आरोपी अब तक फरार क्यों हैं?
पुलिस उन्हें कब गिरफ्तार करेगी?
क्या पुलिस की लापरवाही की विभागीय जांच होगी?
क्या डीजीपी पीडि़त परिवार के आवेदन पर कार्रवाई करेंगे?
क्या सीडीआर जांच होगी?
क्या संबंधित अधिकारियों का स्थानांतरण किया जाएगा?
क्या आत्मसमर्पण की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक होगी?
क्या पुलिस की जवाबदेही भी तय होगी या केवल आरोपियों तक कार्रवाई सीमित रहेगी?

अब आगे क्या?
फिलहाल पूरे मामले की निगाहें तीन महत्वपूर्ण घटनाओं पर टिकी हैं पहली—फरार दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी, दूसरी—डीजीपी को दिए गए आवेदन पर विभागीय कार्रवाई, तीसरी—29 जून को प्रस्तावित ‘कोरिया न्याय यात्रा ‘, जिससे इस मामले में सामाजिक और जनदबाव बढ़ने की संभावना है।


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