भोजपुर,21 जून 2026। बिहार के भोजपुर जिले में हुए एक विवादास्पद पुलिस एनकाउंटर का मामला अब तूल पकड़ चुका है। इस घटना में 28 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक भरत भूषण तिवारी की मौत ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया है। अब यह मामला कानूनी गलियारों में पहुँच गया है, जहाँ इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ईमेल और पत्र लिखकर इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि वह इस कथित फर्जी एनकाउंटर का स्वतः संज्ञान ले और मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच के आदेश दे, ताकि सच्चाई सामने आ सके। अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने अपनी याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों, विशेषकर ‘पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र राज्य (2014)’ का हवाला दिया है। उन्होंने मांग की है कि घटना में शामिल सभी दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज की जाए। याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राज्य पुलिस पर भरोसा करना मुश्किल है, इसलिए इस पूरे मामले की जांच या तो सीबीआई को सौंपी जाए या फिर पटना हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच दल द्वारा कराई जाए। इससे न केवल पारदर्शिता बनी रहेगी, बल्कि न्याय की उम्मीद भी बढ़ेगी। याचिका में अदालत से यह भी आग्रह किया गया है कि वे प्रशासन को निर्देश दें कि घटना से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को तत्काल सुरक्षित किया जाए और उन्हें कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इसमें भोजपुर एसपी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति, घटना के समय की आधिकारिक पुलिस लॉगबुक, मृतक का विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड्स शामिल हैं।
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