- सुपरमैन रंजीत गुप्ता की टीम ने फिर पकड़े 80 इंजेक्शन,पर हर बार सप्लायर तक पहुंचकर क्यों रुक जाती है जांच?
- 50 से ज्यादा प्रकरण,सैकड़ों गिरफ्तारियां और हजारों इंजेक्शन जब्त…फिर भी सरगुजा में नशे का नेटवर्क क्यों नहीं टूट रहा?
-संवाददाता-
अंबिकापुर,19 जून 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा संभाग में नशीले इंजेक्शनों के अवैध कारोबार के खिलाफ आबकारी विभाग का ऑपरेशन क्लीन लगातार जारी है। संभागीय आबकारी उड़नदस्ता टीम ने एक बार फिर कार्रवाई करते हुए लुंड्रा क्षेत्र से दो कथित नशे के सप्लायरों को 80 नग नशीले इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार किया है। विभाग इसे बड़ी सफलता बता रहा है,लेकिन लगातार हो रही गिरफ्तारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है…आखिर नशे की सप्लाई की जड़ तक जांच कब पहुंचेगी? सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई करते हुए रवि घासी निवासी झेराडीह और किशुन राम उर्फ बबलू ठाकुर निवासी गढ़वीरा को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 40 नग REXOGESIC और 40 नग AVIL इंजेक्शन बरामद किए गए। दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(सी) के तहत कार्रवाई कर न्यायालय में पेश किया गया,जहां से जेल भेजने की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई निश्चित रूप से विभाग की सक्रियता दिखाती है,लेकिन इसके साथ ही पिछले कई मामलों की तरह फिर वही सवाल सामने खड़ा हो गया है—क्या कार्रवाई केवल स्थानीय सप्लायरों तक ही सीमित रह जाएगी या इस बार पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होगा?
कार्रवाई पर कार्रवाई… फिर भी क्यों नहीं थम रहा कारोबार?
आबकारी विभाग के अनुसार पिछले एक वर्ष में नशीली दवाइयों के खिलाफ 50 से अधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। कई आरोपी गिरफ्तार हुए, बड़ी मात्रा में इंजेक्शन जब्त हुए और लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
लेकिन आंकड़ों के दूसरी तरफ एक कड़वा सवाल भी है…
यदि कार्रवाई इतनी बड़ी संख्या में हो रही है तो फिर नशीले
इंजेक्शन बाजार तक पहुंच कैसे रहे हैं?
हर कुछ दिनों बाद नई खेप पकड़ी जा रही है।
नए चेहरे सामने आ रहे हैं। और पुराने सवाल फिर खड़े हो रहे हैं।
क्या केवल छोटे विक्रेताओं और कैरियरों पर कार्रवाई से पूरा नेटवर्क खत्म हो सकता है?
वाहिद से मोशीम और अब लुंड्रा तक…जांच की दिशा पर सवाल
हाल ही में वाहिद अंसारी की गिरफ्तारी के बाद उसके कथित सप्लायर मोशीम अंसारी तक आबकारी टीम पहुंची थी। मोशीम के पास से 400 नशीले इंजेक्शन बरामद किए गए थे।
अब लुंड्रा क्षेत्र से दो और कथित सप्लायर पकड़े गए हैं।
लगातार कार्रवाई यह बताती है कि क्षेत्र में नेटवर्क सक्रिय है।
लेकिन सवाल यह है कि इतने लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी वह मुख्य सप्लाई चैन क्यों सामने नहीं आ रही,जहां से बड़ी मात्रा में इंजेक्शन पहुंच रहे हैं?
गढ़वा कनेक्शन पर फिर उठे सवाल
सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता ने खुद बताया था कि मोशीम अंसारी को नशीले इंजेक्शन गढ़वा क्षेत्र के सप्लायरों से मिलते थे और वहां तक पहुंचने में विभाग को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने संसाधनों की कमी, साइबर सेल नहीं होने, सीमित बल और अन्य तकनीकी सुविधाओं के अभाव की बात कही।
यहीं से सवाल उठता है…
जब सप्लाई का स्रोत सामने है तो वहां तक पहुंचने के लिए स्थायी
रणनीति क्यों नहीं बन पा रही?
क्या झारखंड पुलिस के साथ नियमित संयुक्त अभियान चलाया गया?
क्या अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच शुरू हुई?
क्या बड़े सप्लायरों तक पहुंचने के लिए कोई विशेष टीम गठित की गई?
जज्बा…बनाम संसाधन…असली चुनौती यही?
सुपरमैन रंजीत गुप्ता का कहना है कि विभाग के पास सीमित संसाधन हैं,लेकिन नशे के खिलाफ लड़ाई का जज्बा है। यह बात विभागीय कर्मचारियों के प्रयास को दर्शाती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े नेटवर्क को खत्म करने के लिए केवल जज्बा पर्याप्त नहीं होता।
इसके लिए चाहिए…
तकनीकी जांच
साइबर मॉनिटरिंग
अंतरराज्यीय समन्वय
आर्थिक जांच
सप्लाई चैन की निगरानी
यदि यह सभी कडि़यां नहीं जुड़तीं तो कार्रवाई के बाद भी नेटवर्क नए रास्ते तलाश लेता है।
बैच नंबर खोल सकता है पूरा नेटवर्क
जब्त इंजेक्शनों के बैच नंबर पूरे मामले की अहम कड़ी हो सकते हैं।
इनसे पता लगाया जा सकता है—
किस कंपनी ने बनाया?
किस स्टॉकिस्ट को भेजा?
किस मेडिकल चैनल से बाहर आया?
कहां से अवैध बाजार तक पहुंचा?
लेकिन सवाल यह है कि क्या इन बैच नंबरों की विस्तृत जांच कर बड़े सप्लायरों और संबंधित संस्थानों तक पहुंच बनाई जा रही है?
ड्रग विभाग की भूमिका पर भी नजर…
नशीले इंजेक्शन आखिर किसी न किसी वैध दवा आपूर्ति चैन से निकलकर अवैध बाजार में पहुंचते हैं। ऐसे में केवल आबकारी विभाग की कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। औषधि प्रशासन विभाग को भी यह जांच करनी होगी कि…क्या किसी मेडिकल दुकान या स्टॉकिस्ट की भूमिका है? क्या रिकॉर्ड में गड़बड़ी है?,क्या लाइसेंसधारी संस्थानों से गलत तरीके से बिक्री हुई?
जनता के सवाल
50 से अधिक मामलों के बाद भी नशे का नेटवर्क क्यों सक्रिय है?
बड़े सप्लायर और मास्टरमाइंड तक जांच कब पहुंचेगी?
गढ़वा से आने वाली सप्लाई लाइन कब टूटेगी?
क्या वित्तीय लेन-देन की जांच होगी?
क्या केवल गिरफ्तारियां होंगी या पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई होगी?
क्योंकि सवाल यह नहीं है कि कितने इंजेक्शन पकड़े गए।
सवाल यह है कि…
इतनी कार्रवाई के बाद भी नशे का कारोबार चला कौन रहा है?
सरगुजा की जनता अब केवल गिरफ्तारी नहीं,बल्कि पूरे नेटवर्क के पर्दाफाश का इंतजार कर रही है।
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