अयोध्या दौरा…चंपत राय को कार्यक्रम से दूर रहने का निर्देश
नई दिल्ली,18 जून 2026। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज को अयोध्या के एक दिवसीय दौरे पर पहुंच रहे हैं। उनके इस प्रस्तावित कार्यक्रम में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन सबसे प्रमुख है। मुख्यमंत्री के आगमन से ठीक पहले जारी हुए सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल निर्देशों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जिला प्रशासन द्वारा जारी प्रोटोकॉल के बिंदु संख्या 29 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को विशेष निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने उनसे अनुरोध किया है कि मुख्यमंत्री के मंदिर भ्रमण की व्यवस्था के लिए वे किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि नामित करें और इसकी सूचना संबंधित ड्यूटी मजिस्ट्रेट को तुरंत दें।
विवादों के साये में
प्रोटोकॉल का नया निर्देश
यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान पात्रों से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला सुर्खियों में है। हालांकि प्रशासन या ट्रस्ट की ओर से इस निर्णय के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन इसे चंपत राय की मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से दूरी बनाए रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंदिर परिसर में चल रही जांच और चढ़ावे को लेकर मचे विवाद के बीच मुख्यमंत्री की सुरक्षा और प्रोटोकॉल के तहत यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। चंपत राय की ओर से दी गई सफाई के बावजूद, प्रशासन का यह रुख कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है।
दान पात्रों के मामले में गठित एसआईटी की गहन जांच : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दान पात्रों में चोरी और चढ़ावे के संबंध में लगाए जा रहे गंभीर आरोपों के बाद योगी सरकार ने एक विशेष जांच दल का गठन किया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने का अनुरोध किया था। इस जांच दल में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार को शामिल किया गया है। ट्रस्ट का मानना है कि इस जांच से मंदिर के प्रबंधन पर लग रहे अफवाहों पर विराम लगेगा और दूध का दूध-पानी का पानी हो जाएगा।
जांच और प्रोटोकॉल
मुख्यमंत्री के दौरे पर सबकी नजरें
मुख्यमंत्री के अयोध्या दौरे को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जहां एक ओर मंदिर ट्रस्ट मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए एसआईटी जांच पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान महासचिव को दूर रखने का निर्देश ट्रस्ट की आंतरिक स्थितियों को लेकर भी कयासों का बाजार गर्म कर रहा है। प्रशासनिक दृष्टि से यह कदम मुख्यमंत्री की सुरक्षा और प्रोटोकॉल के अनुपालन का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी का इस महत्वपूर्ण दर्शन कार्यक्रम से अलग होना राज्य के राजनीतिक एवं धार्मिक हलकों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
भविष्य की राहः सच्चाई का इंतजार और सुरक्षा की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पूरे प्रदेश की निगाहें अयोध्या की व्यवस्था पर टिकी हैं। एसआईटी की जांच रिपोर्ट भविष्य में मंदिर ट्रस्ट के कार्यप्रणाली के लिए एक आधार तय करेगी। फिलहाल, मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर ट्रस्ट और प्रशासन दोनों ही सतर्क नजर आ रहे हैं। इस प्रोटोकॉल बदलाव के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री के मंदिर में दर्शन-पूजन के समय वहां का प्रबंधन किस तरह से होता है और भविष्य में ट्रस्ट के महासचिव की भूमिका इस पूरे चढ़ावा प्रकरण में किस प्रकार स्पष्ट होती है।
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