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सूरजपुर@जिला अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत से उठा बवंडर…इलाज में लापरवाही या चिकित्सा जटिलता, जांच के घेरे में पूरी व्यवस्था

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  • रामनगर की प्रसूता पूजा मानिकपुरी और नवजात की मौत के बाद परिजनों का फूटा गुस्सा, अस्पताल में हंगामा; स्वास्थ्य विभाग ने जांच के दिए निर्देश

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,17 जून 2026 (घटती-घटना)। जिला अस्पताल सूरजपुर एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है, रामनगर क्षेत्र की निवासी पूजा मानिकपुरी और उसके नवजात शिशु की उपचार के दौरान हुई मौत ने न केवल एक परिवार की खुशियां छीन लीं,बल्कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं,जिस परिवार में कुछ घंटों बाद नए सदस्य के आगमन की खुशी मनाई जानी थी,वहां अब मातम पसरा हुआ है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान बरती गई लापरवाही के कारण मां और बच्चे दोनों की जान चली गई, जबकि अस्पताल प्रबंधन इसे चिकित्सकीय जटिलता का मामला बता रहा है,घटना के बाद जिला अस्पताल परिसर में भारी संख्या में ग्रामीण और परिजन जमा हो गए,मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की, परिजनों का कहना है कि यदि समय पर उचित उपचार और गंभीरता से निगरानी की जाती तो मां और बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची थी पूजा,फिर अचानक बिगड़ गई हालत…
जानकारी के अनुसार रामनगर क्षेत्र निवासी पूजा मानिकपुरी को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार को उम्मीद थी कि कुछ ही समय में घर में किलकारियां गूंजेंगी,चिकित्सकीय परीक्षण के बाद अस्पताल में उनका उपचार शुरू किया गया,परिजनों का आरोप है कि उपचार के दौरान पूजा मानिकपुरी को एक इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी, परिवार के लोगों का कहना है कि इंजेक्शन लगने के बाद महिला बेचैन होने लगी और कुछ समय के भीतर उसकी हालत गंभीर हो गई। अस्पताल के चिकित्सक और स्टाफ उपचार में जुटे रहे, लेकिन अंततः महिला की मौत हो गई, इस बीच नवजात शिशु की भी जान नहीं बचाई जा सकी, एक ही परिवार में दो-दो मौतों ने परिजनों को तोड़कर रख दिया है। अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों के अनुसार परिवार के सदस्य लगातार यह सवाल पूछते रहे कि आखिर ऐसी कौन सी स्थिति बनी कि मां और बच्चे दोनों को नहीं बचाया जा सका।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज
फिलहाल पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज पोस्टमार्टम रिपोर्ट मानी जा रही है, यही रिपोर्ट बताएगी कि मौत का वास्तविक कारण क्या था, क्या इंजेक्शन के बाद किसी प्रकार की प्रतिकूल प्रतिक्रिया हुई? क्या महिला पहले से किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही थी? क्या श्वास नली में उल्टी फंसने की वजह से मौत हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे, लेकिन तब तक जिला अस्पताल में हुई यह दोहरी मौत पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी रहेगी।
सबसे बड़ा सवाल
एक परिवार अस्पताल में नई जिंदगी की उम्मीद लेकर पहुंचा था, लेकिन वापस लौटा दो शवों के साथ, अब जांच यह तय करेगी कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण चिकित्सकीय जटिलता थी या फिर ऐसी लापरवाही, जिसने एक मां और उसके नवजात की जिंदगी छीन ली, जनता की नजरें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि सच्चाई सामने आना उतना ही जरूरी है जितना दोषियों की जवाबदेही तय होना।
परिजनों ने लगाया गंभीर लापरवाही का आरोप
मृतका के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाई गई, उनका कहना है कि महिला को समय पर विशेषज्ञ उपचार नहीं मिला और हालत बिगड़ने के बाद भी प्रभावी प्रयास नहीं किए गए, परिजनों ने पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ग्रामीणों का कहना है कि जिला अस्पताल आम लोगों के लिए अंतिम उम्मीद का केंद्र होता है। यदि वहीं मरीज सुरक्षित नहीं हैं तो लोगों का भरोसा कैसे कायम रहेगा? घटना के बाद ग्रामीणों में भी नाराजगी दिखाई दी और उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से पारदर्शी जांच की मांग की।
डॉक्टर का पक्ष : महिला पहले से गंभीर थी…
घटना को लेकर ड्यूटी डॉक्टर डॉ. गरिमा सिंह ने अलग पक्ष रखा है, उनके अनुसार महिला की स्थिति पहले से ही सामान्य नहीं थी और उसे देखते हुए ऑपरेशन की तैयारी की जा रही थी, इसी दौरान आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत इंजेक्शन लगाया गया,डॉ. सिंह के मुताबिक इंजेक्शन दिए जाने के बाद महिला को उल्टी हुई और उल्टी का कुछ हिस्सा श्वास नली में फंस गया, इसके कारण उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई। चिकित्सकीय टीम ने उसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी, डॉक्टरों का कहना है कि कई बार प्रसव के दौरान अचानक उत्पन्न होने वाली चिकित्सकीय जटिलताएं मरीज के लिए घातक साबित हो जाती हैं,हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही संभव होगी।
जांच के आदेश… रिपोर्ट का इंतजार…
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कपिल देव पैकरा ने घटना को गंभीर बताते हुए जांच के निर्देश दिए हैं,उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और विशेषज्ञों की टीम पूरे घटनाक्रम की समीक्षा करेगी, सीएमएचओ ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा, रिपोर्ट और जांच निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल…
जिला अस्पताल में हुई यह घटना कई पुराने सवालों को फिर सामने ले आई है, आखिर क्यों अक्सर प्रसूति संबंधी मामलों में विवाद खड़े हो जाते हैं? क्या जिला अस्पतालों में प्रसव संबंधी जटिल परिस्थितियों से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं? क्या विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्टाफ की संख्या पर्याप्त है? क्या गंभीर मरीजों के लिए आपातकालीन प्रबंधन व्यवस्था मजबूत है? ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली अधिकांश गर्भवती महिलाएं जिला अस्पतालों पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में किसी भी प्रसूता की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं होती, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा देती है।


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