नई दिल्ली,17 जून 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका का नाम लिए बगैर उनके हमले में मारे गए नाविकों का मुद्दा उठाया। मोदी ने आउटरीच सत्र में नई साझेदारियां बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से मजबूत करना विषय पर बोलते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष से हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में कई भारतीय नागरिकों को भी जान गंवानी पड़ी। मोदी ने कहा, हम पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान हुआ। होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार में आई बाधा से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई नागरिकों को जान गंवानी पड़ी। वैश्विक समुद्री व्यापार से सभी देशों को जोडऩे वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और नाविक बिना भय के कार्य करें। मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आज ग्लोबल साउथ की विश्व समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। किन्तु उनकी अपेक्षा सहारे की नहीं, साथ की है। वे वैश्विक विकास के लाभार्थी नहीं,उसके भागीदार बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा,हमें दाता-प्राप्तकर्ता की सोच से आगे बढ़कर,समान सहयोगी के रूप में काम करना होगा। उनके पास-पास नहीं, साथ-साथ चलना होगा। साझेदारी को निर्भरता के बजाय, गरिमा से जोडऩा होगा। इन प्रयासों से भावी पीढिय़ों के सतत-विकास की मजबूत नींव रख सकेंगे। मोदी का बयान ऐसे समय पर आया है, जब ईरान युद्ध समाप्ति की ओर है और अमेरिका के साथ शांति समझौता होने जा रहा है। पिछले दिनों होर्मुज के पास ओमान के तट पर 3 तेल टैंकर जहाजों पर अमेरिका ने हमला किया था,
जिसमें पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर सेट्टेबेलों पर हमले से 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। भारत ने अमेरिकी उच्चायोग के सामने यह मुद्दा उठाया था। हालांकि, अमेरिका ने कोई अफसोस नहीं जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने जनसंपर्क सत्र के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठकर भाषण दिया। इससे पहले, पारंपरिक जी-7 समूह फोटो के बाद दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।
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