बिलासपुर,16 जून 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट कर दिया है कि यदि मृत शासकीय कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत है, तो परिवार के किसी अन्य सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई मौलिक या कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों में दी जाने वाली राहत है, जिसे केवल निर्धारित नीति और नियमों के तहत ही प्रदान किया जा सकता है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस संबंध में सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी। मामला धमतरी जिले के कुरुद तहसील कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 स्वर्गीय अशोक कुमार रंगारी से जुड़ा है, जिनका 5 नवंबर 2024 को सेवाकाल के दौरान निधन हो गया था। उनके निधन के बाद पुत्र हेनरी रंगारी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। जांच में पता चला कि मृतक का बड़ा पुत्र और हेनरी का सौतेला भाई वीरेंद्र बहादुर रंगारी पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत है और जगदलपुर में पदस्थ है। इसी आधार पर जिला स्तरीय अनुकंपा नियुक्ति समिति ने आवेदन निरस्त कर दिया था। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वीरेंद्र बहादुर रंगारी वर्ष 2006 से परिवार से अलग रह रहा है।
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