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लेख@विनम्रता,सहजता और संकल्प बड़ी सफलता के मार्ग

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मनुष्य सदैव प्रयास करता है कि उसे लक्ष्य और सफलता जल्द से जल्द प्राप्त हो पर वस्तुतः ऐसा होता नहीं है,स्थाई सफलता के लिए कठोर श्रम, संकल्प,सहजता और विनम्रता सच्चे सन्मार्ग हैं। जल्दी का काम शैतान का होता है ऐसा कहावतें कहती है,लक्ष्य प्राप्ति के लिए जीवन में निरंतर श्रम सहजता सरलता और संघर्ष के साथ संयम का बड़ा योगदान होता है। प्रत्येक व्यक्ति जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है वह जीवन के हर सोपान में अपने आप को उत्तम स्थिति में रखना चाहता है। किंतु जीवन की सफलता मनुष्य के संघर्ष और उसके आचरण में अंतर्निहित विनम्रता पर भी निर्भर करती हैं। मनुष्य यदि सब कुछ प्राप्त करके भी वह विनम्र नहीं है तो उसका जीवन अधूरा है। रावण बहुत बड़ा विद्वान और शास्त्रों का ज्ञाता था किंतु उसके जीवन में और उसके आचरण में विनम्रता ना होकर दंभ और अहंकार समाविष्ट था, अतः वह अपने अहम और विनम्रता विहीन जीवन के कारण प्रभु श्री राम के हाथों मारा गया। विनम्रता मनुष्य का वह गुण है जो मनुष्य के निजी जीवन में समाजीकरण की प्रक्रिया में उसके द्वारा आत्मसात किया जाता है। मनुष्य मूलतः अहंकारी, स्वार्थी, लालची तथा पद प्राप्त करने वाला लोभी रूप होता है। किंतु धीरे-धीरे वह सामाजिक परिवेश में अपने आसपास के ज्ञानी ,साधु एवं सच्चे सद्गुणी नागरिकों के संपर्क में आकर अपने लोभ तथा लालच की अहंकारी गतिविधियों में सुधार लाकर सहिष्णु, सौहार्द, करुणा, सहयोग आदि गुणों को अपने में समाहित कर विनम्रता के सद्गुण को ग्रहण कर लेता है। विनम्रता सही मायने में सामाजिक अच्छाई की परिणति है। सद्गुण और विनम्रता महान लोगों के द्वारा ग्रहण किया हुआ वह अलंकार है जो उसे लोक तथा परलोक में सर्वमान्य रूप से स्थापित करता है। छोटा और तुच्छ व्यक्ति अपनी छोटी-छोटी गतिविधियों में रहकर अपने आप को सर्वशक्तिमान एवं सर्व ज्ञानी समझकर कुएं के मेंढक की तरह अधजल गगरी छलकत जावे की कहावत को सिद्ध करता है। महान तथा ज्ञानी व्यक्ति के व्यक्तित्व में विनम्रता झलकती है वह उसे प्रदर्शित करने से परहेज करते हैं क्योंकि विनम्रता उनके संपूर्ण व्यक्तित्व में समाहित होती है। विनम्रता किसी भी सज्जन व्यक्ति की जीवन की शैली होती है। महान और विनम्र व्यक्ति की प्रशंसा करने पर भी वे उसे स्वीकार न कर किसी दूसरे व्यक्ति को इसका श्रेय देते हैं। और अज्ञानी और छोटी सोच के कारण व्यक्ति अपने मियां मिट्ठू बनने से नहीं अघाते हैं। ज्ञानी व्यक्ति अपनी उपलब्धि को समाज की बेहतरी के लिए उपयोग में लाता है, ना कि उसे केवल अपने अथवा अपने करीबी या परिवार के लिए ही सीमित नहीं रखता है।
विनम्र व्यक्ति सदा ज्ञान तथा सद्गुणों की खोज में रहता है एवं उसके जीवन में नई-नई उपलब्धियां अपने आप आने लगती हैं । जिस तरह फलदार वृक्ष सदैव झुके हुए होते हैं उसी तरह विनम्र और ज्ञानी व्यक्ति भी बहुत अधिक विनम्र तथा देश समाज और राष्ट्र के प्रति निष्ठावान होता है।

संजीव ठाकुर
रायपुर,छत्तीसगढ़


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