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लेख@जैव-विविधता संरक्षण में भारत की बड़ी उपलब्धि

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2.76 लाख से अधिक जैव-विविधता समितियां बनीं,2.72 लाख रजिस्टर तैयार
कानून,समुदाय और तकनीक के समन्वय से मजबूत हो रहा संरक्षण तंत्र,
2030 तक वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने पर फोकस

जैव-विविधता संरक्षण के क्षेत्र में भारत लगातार मजबूत कदम बढ़ा रहा है। राष्ट्रीय स्तर से लेकर गांवों और शहरों तक विकसित त्रि-स्तरीय व्यवस्था के माध्यम से देश जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके सतत उपयोग और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा दे रहा है। वर्तमान में देशभर में 2.76 लाख से अधिक जैव-विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) का गठन किया जा चुका है, जबकि 2.72 लाख से अधिक पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (पीबीआर) तैयार किए गए हैं। भारत का जैव-विविधता ढांचा राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण, राज्य जैव-विविधता बोर्ड और स्थानीय जैव-विविधता प्रबंधन समितियों के माध्यम से संचालित होता है। ये संस्थाएं स्थानीय प्रजातियों, पारंपरिक ज्ञान और पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
जैव-विविधता संरक्षण विकास की भी प्राथमिकता
विशेषज्ञों के अनुसार जैव-विविधता केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा,जल सुरक्षा, जलवायु संतुलन और आजीविका से भी सीधे जुड़ी हुई है। भारत के वन, आर्द्रभूमि, पर्वतीय क्षेत्र, समुद्री तट,घास के मैदान और रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र करोड़ों लोगों के जीवन का आधार हैं।
2023 में और मजबूत हुआ जैव-विविधता कानून
जैव-विविधता अधिनियम 2002 में वर्ष 2023 में संशोधन कर इसे और प्रभावी बनाया गया। संशोधित कानून शोध, नवाचार, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और जैविक संसाधनों के न्यायसंगत लाभ साझाकरण को बढ़ावा देता है। साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी और मजबूत किया गया है।
वन और संरक्षित क्षेत्रों का बढ़ा दायरा
देश का कुल वन एवं वृक्ष आवरण अब लगभग 8.27 लाख वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया है,जो भारत के भौगोलिक क्षेत्रफल का 25 प्रतिशत से अधिक है। वहीं देश में 1,134 से अधिक संरक्षित क्षेत्र लगभग 1.87 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं, जो वन्यजीवों और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा कर रहे हैं।
बाघ संरक्षण में भारत की ऐतिहासिक सफलता
भारत ने बाघ संरक्षण में विश्व स्तर पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्ष 2014 में जहां देश में 2,226 बाघ दर्ज किए गए थे, वहीं हालिया आंकड़ों के अनुसार उनकी संख्या बढ़कर 3,682 तक पहुंच गई है। यह वैज्ञानिक प्रबंधन, आवास संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का परिणाम माना जा रहा है।
स्थानीय समुदाय बन रहे संरक्षण के साझेदार
देशभर में तैयार किए गए पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टरों में स्थानीय जैविक संसाधनों, वनस्पतियों,जीव-जंतुओं और पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजी करण किया जा रहा है। इन्हें अब डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित करने की प्रक्रिया भी जारी है,जिससे संरक्षण प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।
2030 तक वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने की तैयारी
भारत ने अपनी राष्ट्रीय जैव-विविधता रणनीति एवं कार्ययोजना (2024-2030) को वैश्विक कुन्मिंग-मॉन्टि्रयल जैव-विविधता ढांचे के अनुरूप तैयार किया है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक जैव-विविधता संरक्षण,पारिस्थितिकी पुनर्स्थापना और सतत विकास के लक्ष्यों को और प्रभावी ढंग से हासिल करना है।विशेषज्ञों का मानना है कि कानून, विज्ञान, वित्तीय संसाधनों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के समन्वित प्रयासों से भारत वैश्विक जैव-विविधता संरक्षण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आने वाले वर्षों में यह मॉडल अन्य देशों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।


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