रायपुर,09 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग की साड़ी वितरण योजना अब एक बड़े विवाद में बदलती नजर आ रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए खरीदी गई साडि़यों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं,जिनमें न सिर्फ मापदंडों की अनदेखी हुई है,बल्कि गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल वर्ष 2024-25 के लिए प्रदेश की लगभग 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी वितरण किया गया। इसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपए की दर से करीब 9.7 करोड़ रुपए खर्च किए गए। सरकारी मापदंड के अनुसार हर साड़ी की लंबाई 5.5 मीटर होनी थी,लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आई। कई जिलों में बांटी गई साडि़यां 5 मीटर या उससे भी कम पाई गईं। इस कमी का सीधा असर उन महिलाओं पर पड़ा है, जिन्हें ये साडि़यां पहननी हैं।
छोटे साड़ी को पहनकर काम करना मुश्किल : आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का कहना है कि जब 4 फुट की हाइट वाली कार्यकर्ता तक यह साड़ी ठीक से नहीं पहन पा रही है तो सामान्य कद की महिलाओं के लिए यह साड़ी कैसे उपयोगी हो सकती है। साड़ी छोटी होने के कारण उसे ठीक से लपेटना मुश्किल हो रहा है,जिससे काम के दौरान असहज स्थिति बन रही है। सिर्फ लंबाई ही नहीं, साड़ी की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। कई जगहों पर यह सामने आया है कि साड़ी को धोने के बाद उसका रंग उतर गया और कपड़ा सिकुड़ गया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसी साड़ी पहनकर सार्वजनिक स्थानों पर काम करना उनके लिए असहज और अपमानजनक स्थिति पैदा करता है।
मामले की निष्पक्ष जांच हो, अच्छी गुणवत्ता की साड़ी दे सरकार : इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार हो रहा है, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को घटिया और गुणवत्ताहीन साडि़यां बांटी गई हैं। बहनें साड़ी तक नहीं पहन पा रही हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री खुद महिला होने के बावजूद उनके अधिकारों पर डाका डालने का काम कर रही है। जो साड़ी वितरित की गई है वही लक्ष्मी राजवाड़े को दी जाए।
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