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रायपुर@सदन में ‘मुसवा’ के नाम पर हंगामा 30 विधायक सस्पेंड किए गए…

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अतिक्रमण पर मंत्री केदार के जवाब से विपक्ष का वॉकआउट
रायपुर,10 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को धान खरीदी के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दल ने ‘मुसवा’ के नाम पर सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि 2024-25 सीजन में किसानों से खरीदे गए बड़ी मात्रा में धान को चूहों ने खा लिया, कुछ धान भ्रष्ट अधिकारियों ने बेच दिया या रखरखाव के कारण खराब हो गया। कांग्रेस ने दावा किया कि इससे राज्य को करीब 8500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। हंगामे के दौरान कांग्रेस के 30 विधायकों को सदन से निलंबित कर दिया गया था। जिसे बाद में वापस ले लिया गया। वहीं, सदन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अतिक्रमण का मुद्दा उठाया। उन्होंने अवैध कब्जा करने वाले आरोपियों पर एक्शन और सख्त नियम बनाने की मांग की। मंत्री केदार कश्यप ने इस मुद्दे पर जवाब दिया लेकिन विपक्ष इससे असतुंष्ट नजर आया।
शून्यकाल में नेता
प्रतिपक्ष ने उठाया मुद्दा

शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने कहा कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के उचित भंडारण और सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है। उन्होंने बताया कि 2024-25 के खरीफ विपणन सीजन में 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था, जिसमें से विभाग की सिटीजन रिपोर्ट के अनुसार 22.71 लाख क्विंटल धान का अब तक निपटान नहीं हुआ है। महंत ने आरोप लगाया कि यह धान अब फेयर एवरेज क्वालिटी का नहीं रहा और इसे चूहों ने खा लिया, भ्रष्ट अधिकारियों ने बेच दिया या खराब भंडारण और रखरखाव के कारण यह नष्ट हो गया। उन्होंने कहा कि मार्कफेड के भंडारण केंद्रों से 16.03 लाख क्विंटल और खरीदी केंद्रों से 6.67 लाख क्विंटल धान गायब बताया जा रहा है।
मंत्री दयालदास बघेल ने आरोपों को बताया गलत
आरोपों पर जवाब देते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि धान खरीदी योजना में कुप्रबंधन या भ्रष्टाचार के कारण राज्य को भारी नुकसान होने का दावा गलत है। उन्होंने बताया कि 2024-25 के खरीफ विपणन सीजन में राज्य ने 25.49 लाख किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 149.25 लाख टन धान खरीदा। इसके लिए किसानों को रूस्क्क के रूप में 34,349 करोड़ रुपए और कृषक उन्नति योजना के तहत 11,928 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। इस तरह किसानों को कुल 46,277 करोड़ रुपए दिए गए। मंत्री ने कहा कि धान खरीदी व्यवस्था के तहत बोनस सहित प्रति क्विंटल 3100 रुपए की कीमत देने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। उन्होंने बताया कि 2024-25 सीजन में खरीदे गए धान के निपटान की अंतिम तारीख 30 अप्रैल 2026 तय की गई है और प्रक्रिया जारी है।
चूहे ने धान खाया,मंत्री
ने ये आरोप खारिज किया

मंत्री बघेल के मुताबिक,18.36 लाख टन अतिरिक्त धान का ऑनलाइन नीलामी के जरिए निपटान किया जा चुका है,जबकि करीब 1.60 लाख टन धान भंडारण केंद्रों और 67 हजार टन धान खरीदी केंद्रों में मौजूद है,जो कुल खरीदी का तीन प्रतिशत से भी कम है। दयालदास बघेल ने इस आरोप को भी खारिज किया कि धान को चूहों ने खा लिया या भ्रष्ट अधिकारियों ने बेच दिया। उन्होंने कहा कि धान को सुरक्षित रखने के लिए कवर और कीट नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने बताया कि 2739 खरीदी केंद्रों में से 2728 केंद्रों पर स्टॉक का सत्यापन पूरा हो चुका है और बाकी 11 केंद्रों पर प्रक्रिया जारी है। भंडारण में नुकसान को लेकर 78 भंडारण केंद्र प्रभारियों और जिला मार्केटिंग अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। दो भंडारण केंद्र प्रभारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और दो अन्य अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
नेशनल हेराल्ड को 5 साल में 4.24 करोड़,नवसृजन को कोई भुगतान नहीं
छत्तीसगढ़ विधानसभा में भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने नेशनल हेराल्ड, संडे नवजीवन और नवसृजन मैगज़ीन को पिछले सालों में विज्ञापन राशि के बारे में सवाल किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि नेशनल हेराल्ड को पिछले पांच सालों में कुल 4.24 करोड़ रुपए का विज्ञापन मिला, नवसृजन को कोई भुगतान नहीं किया गया और संडे नवजीवन को 3.06 करोड़ रुपए का विज्ञापन मिला।


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