कहा…उनकी सरकार में विदेशी एजेंसियों का प्रभाव था,कांग्रेस ने पैसे देकर एआई समिट को बदनाम किया
नई दिल्ली,26 फरवरी 2026। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का कंप्रोमाइज्ड चाचा बताया। पात्रा ने कहा कि मैं बताता हूं कि असली समझौता किसने किया। इस सिलसिले में नेहरू का नाम सबसे पहले आता है। पात्रा ने कहा कि नेहरू के निजी सचिव रहे एम.ओ. माथाई को लेकर कहा जाता था कि वे अमेरिकी एजेंट थे। 1960 के दशक में सोवियत खुफिया एजेंसी केजीबी के एजेंट प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच रखते थे। पात्रा बोले…उस दौर में यह चर्चा आम थी कि विदेशी एजेंसियों को जो भी संवेदनशील दस्तावेज चाहिए होते थे,वे आसानी से मिल जाते थे। संबित पात्रा ने दिल्ली में प्रेस कॉंफ्रेंस में ये बातें कहीं। उन्होंने ये भी कहा कि एआई समिट को बदनाम करने के लिए कांग्रेस ने इन्फ्लुएंसर्स को पैसे के ऑफर्स दिए।
संबित पात्रा की पांच बड़ी बातें…
– 1958 में ओमान के सुल्तान ने ग्वादर पोर्ट भारत को सौंपने की पेशकश की थी, लेकिन नेहरू ने उसे अस्वीकार कर दिया। आज ग्वादर पोर्ट चीन और पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम बन चुका है।
– नेहरू ने विदेशी देशों को भारतीय क्षेत्र देने की चर्चा क्यों की। ऐसे फैसलों के पीछे किस तरह का दबाव या परिस्थिति थी।
– यह समझना जरूरी है कि क्या उस समय किसी बड़े लाभ या बाहरी प्रभाव के चलते ऐसे कदम उठाए गए। क्या इन मुद्दों पर कांग्रेस नेतृत्व को जवाब देना चाहिए।
– सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट और रील्स वायरल हो रहे हैं,जिनमें दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस कार्यालय या वरिष्ठ नेताओं की ओर से एआई इम्पैक्ट समिट के खिलाफ पोस्ट या रील बनाने पर 25 हजार रुपए से लेकर 1.5 लाख रुपए तक देने के संदेश भेजे गए हैं।
– ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं और स्क्रीनशॉट सार्वजनिक रूप से शेयर किए गए हैं।
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