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कुसमी@अवैध खनन छिपाने के लिए हुई हत्या? एसडीएम की गिरफ्तारी के बाद खुलासा,कुसमी बंद…

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कुसमी,17 फरवरी 2026 (घटती-घटना)।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में कानून के रखवालों पर ही कानून तोड़ने का संगीन आरोप लगा है। जिले के हंसपुर गांव में कुसमी एसडीएम करूण डहरिया और उनके साथियों पर तीन ग्रामीणों के साथ बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगा है। इस हिंसक झड़प में गंभीर रूप से घायल 60 वर्षीय ग्रामीण राम नरेश राम की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई,जबकि दो अन्य ग्रामीण—अजीत उरांव और आकाश अगरिया—गंभीर रूप से घायल हैं। इस घटना ने पूरे प्रदेश में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
सर्व आदिवासी समाज और कांग्रेस ने किया प्रदर्शन : ग्रामीण की मौत के विरोध में आज सर्व आदिवासी समाज और कांग्रेस कमेटी ने कुसमी नगर को पूरी तरह बंद करा दिया। प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को देखते हुए दोपहर तक सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। बस स्टैंड के पास भारी संख्या में लोग धरने पर बैठे हैं। पीडि़त परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की जा रही है। साथ ही घायलों को 5-5 लाख रुपये मुआवजा की मांग भी शामिल है। इससे पहले सोमवार को भी ग्रामीणों ने न्याय की मांग को लेकर करीब 4 घंटे तक चक्काजाम किया था, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित रहा।
एसडीएम समेत चार आरोपी गिरफ्तार,देर रात भेजे गए जेल : पुलिस की प्रारंभिक जांच,प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर मामले की गंभीरता को देखते हुए धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुसमी एसडीएम करूण डहरिया, पूर्व भाजयुमो अध्यक्ष विक्की सिंह उर्फ अजय प्रताप सिंह, मंजीत कुमार यादव और सुदीप यादव को गिरफ्तार कर लिया है।
सभी आरोपियों को देर रात ही कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। हालांकि, नायब तहसीलदार पारस शर्मा को इस मामले में क्लीन चिट दी गई है, क्योंकि वे विवाद की सूचना पाकर बाद में मौके पर पहुंचे थे और मारपीट में उनकी संलिप्तता नहीं पाई गई।
अवैध उत्खनन और ‘जंगलराज’ विपक्ष ने सरकार को घेरा
इस मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस ने इसे ‘जंगलराज’ करार देते हुए पूछा है कि क्या प्रदेश में खनन माफिया का साम्राज्य चल रहा है? भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो अधिकारी अवैध उत्खनन रोकने के लिए जिम्मेदार हैं,वे ही तस्करों को संरक्षण देने के लिए आदिवासियों की हत्या कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि खेत की सिंचाई कर लौट रहे बेगुनाह ग्रामीणों को प्रशासनिक दबाव में पीटा गया।


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