बिलासपुर,12 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की स्वीकार्यता को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पारिवारिक न्यायालय को यह विशेष अधिकार है कि वह विवाद के प्रभावी निपटारे के लिए ऐसे दस्तावेज या सामग्री को भी साक्ष्य के रूप में स्वीकार कर सकता है,जो सामान्यतः साक्ष्य अधिनियम के तहत मान्य न हों। न्यायालय ने पत्नी की याचिका खारिज कर दी। रायपुर निवासी एक व्यक्ति ने फैमिली कोर्ट में अपनी पत्नी के खिलाफ तलाक की अर्जी दाखिल की थी। पति ने अदालत से आग्रह किया कि पत्नी के अन्य लोगों के साथ हुए व्हाट्सऐप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग को रिकॉर्ड पर लिया जाए। पत्नी ने इसका विरोध करते हुए आरोप लगाया कि पति ने उसके मोबाइल फोन को हैक कर अवैध तरीके से यह सामग्री हासिल की है, जिससे उसके निजता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। फैमिली कोर्ट ने पति की अर्जी स्वीकार कर ली,जिसे पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। एकल पीठ के न्यायाधीश जस्टिस सचिन सिंह राजपूत ने सुनवाई के दौरान कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त निजता का अधिकार पूर्ण (एब्सोल्यूट) नहीं है। निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार सार्वजनिक न्याय से जुड़ा है और कई बार यह व्यक्तिगत निजता से ऊपर हो सकता है।
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