
सोशल मीडिया वीडियो को लेकर थाने में दी गई तहरीर
मनेन्द्रगढ़,07 फरवरी 2026(घटती-घटना)। जिला अधिवक्ता संघ मनेन्द्रगढ़ ने सोशल मीडिया पर वकीलों के विरुद्ध कथित अभद्र टिप्पणी और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने के मामले में कड़ा विरोध दर्ज कराया है,संघ ने सिटी कोतवाली प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है, शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित वीडियो व तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस से की गई मांग तत्काल FIR और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई
अधिवक्ता संघ ने पुलिस को दिए गए पत्र में स्पष्ट रूप से मांग रखी है कि: दोनों आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए,आईटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए,वीडियो को हटाने और भविष्य में इस तरह की सामग्री प्रसारित होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं,संघ का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इससे कानून व्यवस्था और अधिवक्ता समुदाय की गरिमा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पुलिस जांच में जुटी, सभी पहलुओं की होगी पड़ताल
सिटी कोतवाली पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता,संदर्भ और उसमें की गई टिप्पणियों की कानूनी स्थिति का परीक्षण किया जाएगा। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
‘दस्तक’ चैनल संचालक और रघुनाथ पोद्दार पर गंभीर आरोप — आईटी एक्ट सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग, पुलिस जांच में जुटी आगे क्या?
अब सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है, यदि प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। वहीं अधिवक्ता संघ ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस मामले को लेकर पीछे हटने वाला नहीं है और गरिमा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी कृत्य का विरोध जारी रहेगा।
क्या है पूरा मामला?
फेसबुक इंटरव्यू बना विवाद की वजह
अधिवक्ता संघ द्वारा पुलिस को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, रघुनाथ पोद्दार उर्फ कल्लू तथा ‘दस्तक’ नामक चैनल के संचालक शराफत अली के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप है कि 25 जनवरी 2026 को शराफत अली ने अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से रघुनाथ पोद्दार का एक इंटरव्यू प्रसारित किया था,संघ का कहना है कि इस वीडियो इंटरव्यू में रघुनाथ पोद्दार ने वकीलों के खिलाफ कथित तौर पर अमर्यादित और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। शिकायत में उल्लेख है कि इंटरव्यू के दौरान वकीलों पर राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर नेक्सस चलाने तथा प्रोपेगेंडा करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, जिससे अधिवक्ता समुदाय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम पेशे की गरिमा-शुरू हुई नई बहस
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मनेन्द्रगढ़ में सोशल मीडिया की जिम्मेदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी बहस छिड़ गई है,एक ओर अधिवक्ता संघ पेशे की गरिमा की रक्षा की बात कर रहा है,वहीं कुछ लोग इसे सोशल मीडिया पर बढ़ती बयानबाजी का परिणाम बता रहे हैं,कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयान यदि किसी समुदाय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाते हैं,तो कानून के तहत कार्रवाई संभव है।
13 मिनट का वीडियो बना विवाद का केंद्र
अधिवक्ता संघ के अनुसार लगभग 13 मिनट लंबे इस वीडियो को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और साझा किया। संघ का कहना है कि इस तरह की सामग्री समाज में वकीलों के प्रति नकारात्मक धारणा पैदा कर सकती है और पेशे की गरिमा को नुकसान पहुंचाती है, संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि वीडियो जानबूझकर इस तरह प्रस्तुत किया गया जिससे अधिवक्ताओं की छवि धूमिल हो और उनके कार्य पर सवाल उठाए जाएं।
आवश्यक बैठक में लिया गया सर्वसम्मति से निर्णय
मामले की गंभीरता को देखते हुए 04 फरवरी 2026 को जिला अधिवक्ता संघ की एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई,बैठक में उपस्थित अधिवक्ताओं ने वीडियो की सामग्री पर आपत्ति जताते हुए सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि इस मामले को कानूनी रूप से उठाया जाएगा,बैठक में यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी भी पेशे या समुदाय के खिलाफ अपमानजनक सामग्री प्रसारित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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