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अंबिकापुर@जिन्हें दोषपूर्ण कार्यप्रणाली के कारण पहले हटाया उन्हें ही सिफारिश पर पुनः कुर्सी पर बिठाया,क्या इतने प्रभावशाली हैं शिक्षा विभाग के दो अधिकारी?

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अंबिकापुर,20 अगस्त 2025 (घटती-घटना)। प्रदेश का शिक्षा विभाग अपने ही निर्णयों को बदलकर फिर से सुर्खियों में आ गया है। शिक्षा विभाग ने हाल ही में जिन अधिकारियों को दोषपूर्ण कार्यप्रणाली की वजह से उनके उन पदों से हटाया था जहां उनकी शिकायतें थीं उन्हें पुनः प्रमुख पद दिया है जो चर्चा का विषय बन गया है।
बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग ने हाल ही में एक तबादला सूची जारी किया था जिसमें सरगुजा संभाग के संयुक्त संचालक हेमंत उपाध्याय को रायपुर कार्यालय भेजा था वहीं एमसीबी जिले के जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा को संयुक्त संचालक कार्यालय अंबिकापुर में संलग्न किया था उस आदेश को खुद स्कूल शिक्षा विभाग ने ही पलट दिया है और ऐसा कुछ दिनों के भीतर हुआ है जो चर्चा का विषय बन गया है और कहा जा रहा है कि दोनों हटाए गए अधिकारी इतनी पहुंच पकड़ वाले थे कि उन्हें ज्यादा दिन तक प्रमुख पद से विभाग दूर नहीं रख सकता और उन्हें जल्द ही प्रमुख पद देना विभाग की मजबूरी होगी, वैसे हुआ भी ऐसा ही,संयुक्त संचालक सरगुजा से हटाए गए हेमंत उपाध्याय दुर्ग संभाग के संयुक्त संचालक बन गए और जिला शिक्षा अधिकारी पद एमसीबी जिले से हटाए गए अजय मिश्रा गृह जिले के ही जिला शिक्षा अधिकारी बन गए। अजय मिश्रा को सूरजपुर का जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है जहां वह निवास करते हैं। वैसे इन आदेशों के बाद यह तो तय हो गया कि स्कूल शिक्षा विभाग में दोषपूर्ण कार्यप्रणाली के बावजूद भी कोई अधिकारी टीका रह सकता प्रमुख पद पर ही बना रह सकता है बस उसे ऊंची पकड़ वाला होना चाहिए। शिक्षा विभाग की इस तरह की कार्यप्रणाली से विभाग की छवि कहीं न कहीं धूमिल हो रही है। संयुक्त संचालक अंबिकापुर रहते हुए हेमंत उपाध्याय ने क्या क्या गुल खिलाए थे यह किसी से छिपा नहीं है,उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस शासनकाल में पदोन्नति प्रक्रिया में इतना भ्रष्टाचार किया था कि जिसकी गूंज राजधानी तक गूंजी थी और उनके ऊपर कार्यवाही तक हुई थी,तब भी वह जुगाड से बच निकले थे। शिक्षा विभाग में ही एमसीबी जिला शिक्षा अधिकारी रहे अजय मिश्रा की कार्यप्रणाली ऐसी थी कि उन्हें एमसीबी से हटाना पड़ गया था अब उन्होंने भी जुगाड से फिर से कुर्सी हासिल कर ली है। वैसे शिक्षा विभाग में अनुशासन का होना आवश्यक है और यह कम ही देखने को मिलता है यह शिक्षकों के मामले तक ही सही तौर पर लागू नजर आता है,भ्रष्ट अधिकारियों पर अनुशासन की बात कभी नहीं होती जो इस तबादले सूची को देखकर भी समझ में आता है। शिक्षा विभाग जहां शिक्षकों के मामले में अनुशासन चाहता है वहीं विभाग को लगातार बदनाम करने वाले अधिकारियों के मामले में वह कभी यह ध्यान नहीं रखता है कि उन्हें वह हटाए और ऐसे जगहों पर बिठाए जहां से उनकी दोषपूर्ण कार्यप्रणाली विभाग की बदनामी का कारण न बने। शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार कहीं न कहीं देश के भविष्य उन बच्चों के साथ एक धोखा है जिनके उज्जवल भविष्य की जिम्मेदारी विभाग को मिली हुई है। हेमंत उपाध्याय और अजय मिश्रा जैसे अधिकारी कहीं न कहीं शिक्षा विभाग के वह चेहरे हैं जिनके ऊपर दोषपूर्ण कार्यप्रणाली का आरोप है। ऐसे अधिकारियों से शिक्षा विभाग को दूरी बनाने की जरूरत होनी चाहिए।


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