अंबिकापुर,05 अगस्त 2025 (घटती-घटना)। पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने प्रदेश सरकार पर केंते एक्सटेंशन कोल लॉक को अनुमति देने को लेकर आंकड़ों में हेरफेर का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह अनुमति सरगुजा की सांस्कृतिक धरोहर रामगढ़ पर्वत और लेमरू हाथी प्रोजेक्ट के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर रही है। सिंहदेव के अनुसार, वर्ष 2020-21 में कांग्रेस सरकार ने वन विभाग से कराए गए सर्वे के आधार पर यह पाया था कि केंते एक्सटेंशन खदान, रामगढ़ पर्वत से 10 किमी की दूरी में है और इसके कारण पर्यावरण, वन्यजीव और सांस्कृतिक धरोहरों पर गंभीर असर पड़ेगा। इसके चलते उस समय खदान को अनुमति नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि खदान के चलते लेमरू क्षेत्र के हाथियों को पलायन करना पड़ेगा, जिससे मानव-हाथी संघर्ष बढ़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने तथ्यों में हेरफेर कर खदान को पर्वत से 11 किमी दूर बताया है, जिससे एनओसी मिल गई। खदान खुलने से सीता बेंगरा, जोगीमारा गुफा और प्राचीन नाट्यशाला को नुकसान पहुंचेगा। पहले से मौजूद दो खदानों के कारण पहले ही रामगढ़ पर्वत में दरारें पड़ चुकी हैं। सिंहदेव ने स्पष्ट किया कि यदि खदान की अनुमति निरस्त नहीं की गई तो वे सरगुजा की जनता के साथ मिलकर संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा, हम रामगढ़ पर्वत की अडिग चट्टानों की तरह खड़े रहेंगे। फिलहाल सिंहदेव विदेश यात्रा पर हैं, लेकिन उनकी इस प्रतिक्रिया से इलाके में आंदोलन के संकेत मिल रहे हैं।
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