- लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर था यह सीधा प्रहार…वह भी कुठाराघात के विरुद्ध कलम बंद अभियान के दौरान हुआ था प्रयास…
- लोकतंत्र पर हुए षड्यंत्रकारी हमले के 1 साल पूरे हुए…70 दिन तक चला था दैनिक घटती-घटना का कलम बंद अभियान
- कलम बंद अभियान को खत्म करने स्वास्थ्य मंत्री ने की थी पहल



-न्यूज डेस्क-
सरगुजा/कोरिया,28 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग से प्रकाशित होने वाला दैनिक घटती-घटना अखबार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत करने के उद्देश्य से खबरों का प्रकाशन करता है,जिसमें सच्चाई को प्राथमिकता दी जाती है कई ऐसे उदाहरण है जिसमें प्रकाशित खबर द्वारा सच्चाई पर मोहर लगाई गई है,सच्ची खबर प्रकाशित करने की वजह से अखबार हमेशा ही बड़े-बड़े लोगों के निशाने पर रहता है,कहा जाए तो दुश्मन बना रहता है फिर भी लोकतंत्र का प्रहरी होने का पूरा कर्तव्य निभाता है,जिस वजह से कई बार संस्था को सच्ची खबर प्रकाशित करने का कठिन मूल्य भी चुकाना पड़ा है,खबर का प्रकाशन सच्चाई से जुड़ा होता है पर सच्चाई से अखबार की दुश्मनी भी जुड़ जाती है फिर भी उसकी चिंता किए बिना अखबार अपना काम निरंतर जारी रखता है,पिछले साल सच्चाई दिखाने व लिखने का बहुत बड़ी कीमत भी संस्था को चुकानी पड़ी थी,खबर प्रकाशन से क्षुद हुए लोग संगठित होकर सत्ता,शासन व प्रशासन को एक करके सच्चाई पर बुलडोजर चलाने का प्रयास किए थे,जिसमें दैनिक घटती-घटना संस्था को काफी नुकसान उठाना पड़ा था,यह कार्यवाही भी उस समय हुई थी जिस समय शोक का माहौल था,यह कार्यवाही दैनिक घटती-घटना के कलम बंद अभियान को बंद करने के लिए हुई थी,दैनिक घटती-घटना ने कलम बंद अभियान भी सिर्फ इसलिए शुरू किया गया था ताकि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सही तरीके से काम करने दिया जाए और उन्हें सच लिखने की आजादी दी जाए,सच को दबाने का प्रयास न किया जाए, अखबार ने कमियों को दिखाने का प्रयास किया था पर जिनकी कमियां उजागर हो रही थी,उन्होंने पूरे सत्ता शासन व प्रशासन को अखबार के खिलाफ करके जो षड्यंत्र रचा था उसमें वह कामयाब भी हुए थे,पर कामयाबी के बीच कहीं ना कहीं लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलने का यह प्रयास मात्र था,जो षड्यंत्र सब समझ चुके थे यह षड्यंत्र नहीं यह सच्ची खबरों से क्षुद हुए दुश्मन थे जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलना चाह रहे थे।
खबर प्रकाशन की वजह से बड़े-बड़े लोगों ने अखबार को दुश्मन समझा…पर अखबार ने खबर का प्रकाशन दुश्मन बनने के लिए नहीं अपने कर्तव्यों के निर्वहन व जिम्मेदारियों के लिए किया…
खबर प्रकाशन को लेकर बड़े-बड़े लोगों से दुश्मनी अखबार ने ली थी, अखबार ने खबर का प्रकाशन दुश्मन बनने के लिए नहीं अपने कर्तव्यों के निर्वहन हिसाब से किया था,अब इस कर्तव्य निर्वहन ने भले ही दुश्मनी का रूप ले लिया हो इसके बाद भी अखबार ने झुकने का प्रयास नहीं किया,अखबार से खबरें छपने बंद हो जाए इसके लिए केंद्रीय अनुदान की राशि यानी कि विज्ञापन पर रोक लगाई, इसके बाद अखबार ने 1 जुलाई 2024 से कलम बंद अभियान शुरू किया और मौजूदा सरकार से सिर्फ एक छोटा सा सवाल किया कि आखिर क्या प्रकाशित करें ताकि सच को प्रकाशित करने से रोक ना जाए? खबर प्रकाशन की स्वतंत्रता बनी रहे पर यह भी लोगों को अच्छा नहीं लगा,इस कलम बंद अभियान को बंद करने के लिए 28 जुलाई 2024 को संस्थान यानी की अखबार के कार्यालय पर ही बुलडोजर चला दिया गया,शायद यह कार्य इसलिए किया गया ताकि अब सच्चाई छापने की कोई भी हिम्मत ना कर सके, पूरे प्रदेश में सच्चाई लिखने की हिम्मत कोई ना करें नहीं तो यही हश्र होगा?
कलम बंद अभियान को बंद करने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने पहल की सार्थक बातचीत के बीच अभियान 11 अगस्त 2024 को 70 दिन बाद स्थगित हुआ
इस घटना के बाद सच्ची खबरों के प्रकाशन से प्रभावित हुए लोगों के लिए यह दिन काफी अच्छा दिन था, यह उनके दिल दिमाग को सुकून देने वाला दिन था पर पाठकों के लिए यह दिन काफी खराब था,सरकार के लिए लोगो की सोच बदल गई थी, इस घटना की निंदा भी खूब हुई थी भले ही इस योजना में कुछ लोग सफल थे और उनके लिए सुकून वाली खबर थी पर वही पूरे प्रदेश में इस खबर और इस घटना की आलोचना भी हो रही थी,इसके बाद भी अखबार ने कलम बंद अभियान को बंद नहीं किया और यह अभियान चलता रहा सफेद पन्ने विरोध में काले होते रहे,कलमबंद अभियान को बंद करने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने पहल की सार्थक बातचीत के बीच यह कलम बंद अभियान 11 अगस्त 2024 को 70 दिन बाद बंद हुआ, स्वास्थ्य मंत्री ने बातचीत में सारी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया और 1 साल में उन्होंने खबर प्रकाशन के मुद्दे के सभी मांगों पर कार्यवाही भी कर दिखाया,उन्होंने अपने दिए गए आश्वासन को समय के साथ पूरा किया,पर 28 जुलाई 2024 छत्तीसगढ़ के इतिहास के पन्नों में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलने के लिए हमेशा याद रखा जाएगा यह छत्तीसगढ़ के इतिहास के पन्ने में दर्ज हो गया,किसी अखबार ने 70 दिन तक ऐसा अभियान चलाया यह भी छत्तीसगढ़ के लिए एक इतिहास हो गया है।
दैनिक घटती-घटना परिवार आज भी अपनी जिम्मेदारी बेबाकी से निभा रहा है…
प्रदेश क े एक जिम्मेदार समाचार-पत्र होने का जनसरोकार से नाता बनाए रखने का वादा लेकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ स्वरूप अपनी जिम्मेदारी निभाने निकला दैनिक घटती-घटना परिवार आज भी अपनी जिम्मेदारी बेबाकी से निभा रहा है और वह निडर होकर जनसरोकार के उन मुद्दों को उन मामलों को उजागर कर रहा है जो कहीं न कहीं ऐसे विषय हैं जिनका जुड़ाव जनता सरकार और शासन से सीधा है और जिसमें एक पक्ष कहीं न कहीं मनमानी कर रहा है या गलतियां उसकी सुधर नहीं रही हैं। दैनिक घटती-घटना आज पाठकों के लिए एक ऐसा विश्वास बन चुका है प्रिंट मीडिया क्षेत्र में कि लोग जानते हैं कि खबरों से समझौता न करने का संकल्प ही इसका अस्तित्व है जिसे दैनिक घटती-घटना परिवार खुद मिटकर भी भूलने वाला नहीं। आज के चकाचौंध वाले जमाने में केवल कर्तव्य संकल्प लेकर आम लोगों की समस्याओं कठिनाइयों साथ ही उनकी शिकायतों को उजागर करना दैनिक घटती-घटना अपना मूल कर्तव्य मानता है,आज यह परिवार हर उस व्यक्ति के साथ खड़ा है जो अन्याय के विरुद्ध अकेला है,शासन-प्रशासन की मजबूरियां रही होंगी बुलडोजर कार्यवाही की….लेकिन दैनिक घटती-घटना परिवार ने इस मामले में भी संयम से काम लिया और सभी तरह के विकल्प को खुला रखकर लोकतंत्र की सलामती के लिए प्रयासरत रहा,जब मामला कलम बंद अभियान के पटाक्षेप का आया दैनिक घटती-घटना परिवार ने तब भी यह साबित किया कि बातचीत और मुलाकात से जन्म लेने वाले किसी भी ऐसे मामले में वह स्वीकृति देता है जहां लोकतंत्र और उसके ही चौथे स्तंभ में टकराव न हो।
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