अंबिकापुर,24 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। नगर पालिका निगम अंबिकापुर द्वारा 26 टेंडरों को अचानक रद्द कर दिया गया है। यह टेंडर रद्द करने का निर्णय निविदा तिथि के अंतिम दिन लिया गया,जिससे नगर निगम के इस कदम पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी दल के नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने निगम सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे निगम सरकार की मनमानी तथा शहर की जनता के साथ धोखा बताया है। वहीं, निगम के महापौर मंजूषा भगत और एमआईसी सदस्य व पीडल्यूडी प्रभारी मनीष सिंह ने इस फैसले को लेकर गोलमोल बयान दिए और केवल ‘तकनीकी कारण’ बताते हुए रद्द किए जाने की बात कही। हालांकि, उन्होंने इस तकनीकी कारण का स्पष्ट रूप से जवाब नहीं दिया, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या वाकई में यह निर्णय पूरी तरह से तकनीकी था या इसके पीछे कुछ और कारण छिपे हुए हैं। नगर निगम अंबिकापुर द्वारा शहर में सडक, नाली, और अन्य विकास कार्यों के लिए 3 करोड़ 34 लाख रुपए की निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। इन निविदाओं को लेकर नगर निगम ने 900 निविदा फार्म भी बेचे थे, जिनकी कीमत कुल 6 लाख 81 हजार रुपए थी। निविदा प्राप्ति की तिथि 23 जुलाई थी, जबकि निविदा खुलने की तिथि 25 जुलाई थी। लेकिन अचनाक 23 जुलाई को निगम आयुक्त ने बिना किसी स्पष्ट कारण के इन निविदाओं को निरस्त कर दिया। नगर निगम द्वारा टेंडर रद्द किए जाने के बाद, नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने एक प्रेस वार्ता आयोजित की, जिसमें उन्होंने नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। शफी अहमद ने इस कदम को निगम सरकार की मनमानी करार दिया और कहा कि यह निर्णय बिना किसी ठोस वजह के लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस टेंडर से भाजपा के किसी नेता को फायदा नहीं हो रहा था, इसलिए इस पर राजनीतिक दबाव डालकर इसे रद्द किया गया। अहमद ने कहा कि शहर की जनता के लिए जो विकास कार्यों की उम्मीद थी, वह अब अधर में लटक गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निविदा को रद्द करने का यह कदम निगम प्रशासन की भ्रष्टाचार और मनमानी को उजागर करता है। उनका मानना था कि यह निर्णय विकास कार्यों में रुकावट डालने के लिए लिया गया है, ताकि किसी खास राजनीतिक दल के उम्मीदवार को लाभ न हो सके।
महापौर और पीडल्यूडी प्रभारी का बयान
इस मामले पर गुरुवार को निगम के महापौर मंजूषा भगत और पीडल्यूडी प्रभारी मनीष सिंह ने एक प्रेस वार्ता आयोजित की, जिसमें उन्होंने निविदा रद्द किए जाने के कारण को केवल ‘तकनीकी कारण’ बताया। महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि यह कदम निगम आयुक्त के विशेषाधिकार के तहत लिया गया था। उनके अनुसार,इस निर्णय का आधार तकनीकी प्रक्रिया है,जो पूरी तरह से नियमानुसार था। हालांकि,जब महापौर से इस ‘तकनीकी कारण’ के बारे में विस्तार से पूछा गया, तो उनका जवाब अस्पष्ट था। वे इसे निगम आयुक्त का अधिकार बताते हुए इस बारे में ज्यादा जानकारी देने से बचते नजर आए। पीडल्यूडी प्रभारी मनीष सिंह ने भी महापौर का समर्थन करते हुए कहा कि यह निर्णय तकनीकी कारणों से लिया गया है, लेकिन उन्होंने भी इस कारण की स्पष्टता देने से इंकार किया।
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